बुधवार, 18 मार्च 2015

akshar e dastan



जान सके
मुझे अपने ही मेरे पहचान सके
मेरा ही दाम जान सके ,
यूँ तो रटते फिरते थे
मेरे ही गुनाहों का जनाज़ा
मेरी ही बातों का मतलब जान ना सके ,
किस भ्रम में डूब गए जो
आज भीड़ में नहीं
अँधेरे में नहीं
अपने ही दमन तले जान सके। .
हाँ
मेरे ही आगोष में शायद दावानल ही पलते होंगे
मेरी ही भूल थी ,,, वो हम पर मरते होंगे
यही सोचते रहे ,मुझे याद भूले से ही सही। करते होंगे। .
आज आया जो है आइना सामने
तो खुद को भी पहचान सके
अपने ही आप को      हम   जान सके

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

CULTURE NEW RAP SONG

माने न बेटा तू बाप का कहणा  
जो भी है ..तुझसे आज है कहणा
ए सुन नटखट एक ही बात
तू है बेबो ओरत जात
पहण kके बाबु तू क्या आया
किसका तूने कर्टन है उठाया
आधी नंगी तू यूँ ना नाच
भूल गई क्या रे ...

तू इज्जत की विसात 

SPICY NEW RAP SONG

१ तू है स्पाइसी बड़ी
दूर क्यों बेबो तू है खड़ी
जान ले बाबु एक ही बात
तुझसे जुड़ा मेरा दिन हर रात
तू है इडली
मै तेरा डोसा
तू है पानी.... मै हूँ लोटा
पास तो आजा  
आग भुजाजा

तन-मन का ..साथ निभाजा 

KAHAN GAYE HUM LOG



16
 मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......माना की मै आमिर नहीं हूँ.... जो भी कहो ये बात तो सच है ..लेकिन अगर कोई अपना बना ले..तो ...उसका हर गम खरीद सकता हूँ .. इसीलिए देख कर दुनिया को कभी कभी यही सोचता हूँ .. की आखिरकार .. कहाँ गए हम लोग ,,,

KAHAN GAYE HUM LOG

15

मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......आज थोडा शायराना अंदाज़ में एक वाक्य आपसे बयाँ करूंगा .. मैंने देखा कुछ लोग डूबता है तो समन्दर को दोष देते है ...मंजिल न मिले तो किस्मत को दोष देते है ..खुद तो संभल कर चलते नहीं ,,जब लगती है ठोकर तब पत्थर को दोष देतें है ,, आखिर कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

14
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......मैंने मा की हथेली पर एक टिल देखा कहा ममी जी ये तो दौलत का टिल है ..ममी ने मेरा चेहरा दोनों हत्थों में लिया और बोली ... मेरे दोनों हाथों में कितनी दौलत है .. लेकिन आज हम यहाँ दौलत के चक्कर में ये भूल जाते है की हमें जन्म देने वाले कैसे है .. जरा सोचो कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

13
 मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......मुझे हर उस इंसान से नफरत है जो हर छोटी छोटी बात पर मम्मी ..की पापा की कसम खा लेता है ...पूछना चाहूँगा उन सबसे/..  क्या मम्मी पापा इतने सस्ते है जो उन्हें दांव पर लगा देता है ... जरा सोचो कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

12
 मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......मा से पैसे लेते लेते कब मा को पैसे देने की उम्र आ गयी पता ही नहीं चला .... जरा सोचो ,, कहाँ गए हम लोग 

KAHAN GAYE HUM LOG

11
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......जीत हासिल करनी हो तो काबिलियत बढाओ, किस्मत की रोटी तो कुत्तों को भी नसीब होती है! अगर हर वक्त किस्मत को दोष देते रहे तो कल को यही दोहराओगे ..कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

9
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों...... आप  नेक बनने के लिए ऐसी कोशिश करो  ... जैसे कोशिश खूबसूरत दिखने के लिए करते हो !अगर बुरे बनेंगे आप और हम तो यही कहेंगे ,, की कहाँ गए हम लोग
10 मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......हम सबको भाग्य के दरवाजे पर सर पीटने से बेहतर है, कर्मो का तूफ़ान पैदा करें ताकि सारे दरवाजे खुल जायेंगे!अगर हर वक्त किस्मत को दोष देते रहे तो कल को यही दोहराओगे ..कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......आज उन सब को तहे दिल से अभिन्दन जो मेरे साथ .. मेरे तरह ..कोइ  पढाई करने आया है तो कोइ नौकरी .. जो अपने घर से ,अपनी माँ से दूर है यहाँ .. वस आज दिल भर गया,, और आंखे नम सी हो गई है .. एक ही वाकय  कहूँगा ,, मा आपकी बात सताती है मेरे पास आ जाओ .. थक गया हूँ आज .. मुझे अपने आँचल में छुपा लो आज... हाथ अपना फेर कर मेरे बालों में एक बार फिर लोरियां सूना दो ...  वस् आप सबसे यही निवेदन है थोडा सा टाइम निकल कर .. घर कॉल कर लो....थोडा टाइम अपनी मा को अपनी फैमली को भी दो नहीं तो कल को अकेले बैठ के सोचोगे कहाँ गए हम लोग ...

KAHAN GAYE HUM LOG

7
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......आजकल जो देख रहा हूँ एक ही बात कहूँगा ..किसी पर भरोसा करो तो अंतिम साँस तक करो ..उसका एक फायदा जरुर होगा .. या तो आप एक अछा दोस्त पाओगे या फिर अछी शिक्षा ,,, अगर हर किसी का भरोसा तोड़ते रहोगे तो कल को खुद ही बोलोगे .. कहाँ गए हम लोग ..

KAHAN GAYE HUM LOG

6
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......हर ख़ुशी है हम लोंगों के दामन में ,पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं .दिन रात दौड़ती दुनिया में ,ज़िन्दगी के लिये ही वक़्त नहीं .आखिर कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

5
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......हम सब बहुत अछे है जो आप और हम अछी अछी बाते करते है ,, लेकिन बहुत से गुण होने के बाबजूद भी एक दोष हमारे विनाश का कारण बन जाता है .. इसलिए हमेशा पॉजिटिव रहो ,, अगर negtiveनेगटिव हुए तो कल को खुद ही बोलोगे कहाँ गए हम लोग ...

KAHAN GAYE HUM LOG

4
 मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......हर कोई आज अपना नाम बनाना चाहता है ,,, सही है गलत कुछ नहीं वस काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही हर काम हो जाए .. लेकिन सच के रास्ते पर चलकर,,, अगर जूठ का साथ पकड़ा तो कब तक ,, सच सामने आने के बाद पूछते फिरोगे कहाँ गए हम लोग 


KAHAN GAYE HUM LOG

3
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......फूल खुशियों की तरह थोड़ी देर तक ही हमारे आंगन में खिलते है .. और मुरझा जाते है .. जबकि कांटे हमारे साथ एक लम्बा जीवन जीते है... इसलिए कभी किसी से नफरत मत कीजिए ,, हरेक को प्यार दीजिए .. नहीं तो कल को आप ही कहोगे कहाँ गए हम लोग .... 



KAHAN GAYE HUM LOG

2
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों......जो लोग लगातार दुःख में रहते है उहने जीवन में कभी सुख नहीं मिलता .. इसलिए हमेशा आप हरेक के साथ खुशियाँ बांटों अगर खुद दुखी रहोगे तो सामने वाले को भी दुःख पहुंचेगा ,,, अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम सब फिर यही सोचेंगे की आखिर कहाँ गए हम लोग

KAHAN GAYE HUM LOG

१ 
मै सुनील कुमार हिमाचली मुखातिब हूँ आपसे .. दोस्तों ~आज आपको ज़िन्दगी का  सच बतलाता हूँ ~ जिंदगी देने वाली माँ के सिवा कोई वफादार नही हो सकता…!!! और गरीब का कोई दोस्त नही हो सकता…!! आज भी लोग अच्छी सोच को नहीअच्छी सूरत को तरजीह देते हैं…!!! क्यूंकि इज्जत सिर्फ पैसे की है, इंसान की नही…!!!जिस शख्स को अपना खास समझो….अधिकतर वही शख्स दुख दर्द देता है…!!! इसलिए हम आप सब से विनती है इंसानियत का धर्म निभाएं ..एक दुसरे से इर्ष्या करना छोड़ दें .. नहीं तो बाद में सोचोगे की कहाँ गए हम लोग ...



बहाने नहीं सफलता के रास्ते खोजिए

बहाने नहीं सफलता के रास्ते खोजिए. . . . .!
————————————————-
1. मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला।
उचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नही मिला।
2. अत्यंत गरीब घर से हूँ।
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे।
3. बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था।
प्रख्यात संगीतकार ए.आर.रहमान के पिता का भी देहांत बचपन मे हो गया था।
4. मै बचपन से ही अस्वस्थ था।
आँस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी।
5. मैने साइकिल पर घूमकर आधी ज़िंदगी गुजारी है।
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचकर आधी ज़िंदगी गुजारी।
6. एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी।
प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर नकली है।
7. मुझे बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है।
थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जाता था।
8. मै इतनी बार हार चूका, अब हिम्मत नही।
अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने थे।
9. मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी।
लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।
10. मेरी लंबाई बहुत कम है।
सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है।
11. मै एक छोटी सी नौकरी करता हूँ, इससे क्या होगा।
धीरु भाई अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे।
12. मेरी कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है, अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा।
दुनिया की सबसे बङी शीतल पेय निर्माता कम्पनी भी दो बार दिवालिया हो चुकी है।
13. मेरा दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है, अब क्या कर पाउँगा?
डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।
14. मेरी उम्र बहुत ज्यादा है।
विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था।
15. मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है पर लोग अस्वीकार कर देते है।
जेराँक्स फोटो कापी मशीन के आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था पर आज परिणाम सामने है।
16. मेरे पास धन नही है।
इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था, उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पड़े थे।
आप कहेगे कि यह जरुरी नही कि जो प्रतिभा इन महानायको मे थी, वह मुझ में भी हो।
मै इस बात से सहमत हूँ।
लेकिन, यह भी जरुरी नही कि जो प्रतिभा आपके अंदर है वह इन महानायको में भी हो!
कोशिश तो कीजिये हो सकता है की आप उनसे भी आगे निकल जाये।

मतलब यह है कि…..
यदि आप आगे बढ़ना चाहते है तो आपको दो में एक को चुनना होगा…..
बहाना या सफलता का रास्ता!

शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

Valentine Week List & Schedule Full list

1. February 7, 2015: Rose Day Rose Day
2. February 8, 2015: Propose Day
3.  February 9, 2015: Chocolate Day
4.  February 10, 2015: Teddy Day SMS
5.  February 11, 2015: Promise Day
6. February 12, 2015: Hug Day
7.  February 13, 2015: Kiss Day Kiss Day
8.  February 14, 2015: Valentine Day


After the Valentine Week. there are also some Days which celebrate after Valentines Day. I hope You have collects Full List of Valentine Week 2015. There are lots of Days and each days have itself Important.


9.  February 15, 2015: Slap Day
10.  16 February 2015: Kick Day
11. 17, February 2015: Perfume Day
12. 18, February 2015: Flirting Day
13. 19, February 2015: Confession Day
14. F20, February 2015: Missing Day
15.  21, February 2015: Break Up Day

सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

a women

नारी को कभी पैरों की जुती नहीं समझा गया नारी को कभी भोग्य की दृष्टि से नहीं देखा गया
जबकि इस देश में नारी इतनी महँ है की उसके बारे में वर्णन करते करते अल्फाज़ कम पड़ जाते है .
अगर नारी के परिचय का वर्णन करूँ तो पंक्तियाँ भी सुन्दरता धारण कर लेती है .नारी का परिचय इतना है ,यह भारत की तस्वीर है  ,मात्र भूमि पर मर मिटने वालों की पीर है ,यह उन वीरों की दुहिता है जो हस हस झुला झूल गए ,नारी उन शेरो की माता है जो रण प्रांगण में जूझ गए ,नारी जीजा की अमर सहेली ,पन्ना की प्रतिछाया है ,कृष्णा के कुल की मरियादा .लक्ष्मी की समसिर है,नारी का परिचय इतना है यह भारत की तस्वीर है ,कालीदास का अमर काव्य, नारी तुलसी की रामायण ..नारी अमर बोल है श्री गीता के जिसका घर घर होता परायण .नारी सूरदास के मधुर गीतों में मीरा का एक तारा है . नारी का परिचय इतना है यह भारत की तस्वीर है..


रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग

रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग
अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मनुष्यों की रीढ़ की हड्डी में एक छोटे मस्तिष्क का पता लगाया है, जो हमें भीड़ के बीच से गुजरते वक्त या सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त संतुलन बनाने में मदद करती है और फिसलने या गिरने से बचाता है।

इस तरह के कार्य अचेतन अवस्था में होते हैं। हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के समूह संवेदी सूचनाओं को इकट्ठा कर मांसपेशियों के आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं, कैलिफोर्निया स्थित एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान साल्क के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के मुताबिक हमारे खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग इस छोटे दिमाग को दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं।

उनके मुताबिक इस अध्ययन के जरिए हमें हमारे शरीर में मौजूद ब्लैक बॉक्स के बारे में पता चला। हमें आज तक नहीं पता था कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं, प्रत्येक मिलीसेकेंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं, इसमें शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए संकेतक भी शामिल हैं।

अपने अध्ययन में साल्क वैज्ञानिकों ने इस संवेदी मोटर नियंत्रण प्रणाली के विवरण से पर्दा हटाया है, अत्याधुनिक छवि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इन्होंने तंत्रिका फाइबर का पता लगाया है, जो पैर में लगे संवेदकों की मदद से रीढ़ की हड्डी तक संकेतों को ले जाते हैं।

इन्होंने पता लगाया है कि ये संवेदक फाइबर आरओआरआई न्यूरॉन्स नाम के तंत्रिकाओं के अन्य समूहों के साथ रीढ़ की हड्डी में मौजूद होते हैं, इसके बदले आरओआरआई न्यूरॉन मस्तिष्क के मोटर क्षेत्र में मौजूद न्यूरॉन से जुड़े होते हैं, जो मस्तिष्क और पैरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध हो सकते हैं।

गोल्डिंग की टीम ने जब साल्क में आनुवांशिक रूप से परिवर्धित चूहे की रीढ़ की हड्डी में आरओआरआई न्यूरॉन को निष्क्रिय कर दिया तो पाया कि इसके बाद चूहे गति के बारे में कम संवेदनशील हो गए, गोल्डिंग की प्रयोगशाला के लिए शोध करने वाले शोधकर्ता स्टीव बॉरेन ने कहा,हमें लगता है कि ये न्यूरॉन सभी सूचनाओं को एकत्र कर पैर को चलने के लिए निर्देश देते हैं, यह शोध तंत्रिकीय विषय और चाल के नियंत्रण की निहित प्रक्रियाओं व आसपास के परिवेश का पता लगाने के लिए शरीर के संवेदकों पर विस्तृत विचार पेश करती है।

गुरुवार, 29 जनवरी 2015

green tea ग्रीन टी मुंह के कैंसर के इलाज में कारग


ग्रीन टी मुंह के कैंसर से लड़ने में कारगर हो सकता है। हाल में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ग्रीन टी में पाए जाने वाला एक यौगिक मुंह के कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है, जबकि यह सामान्य कोशिकाओं को क्षति नहीं पहुंचाता।

शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

goal of boll

कहते है गेंद की तरह है ये दुनिया
अंदर है जिसके बहुत सी कहानिया ...
जब भी चाहा देख कर खोलना मैंने ये पिटारा
बहुत कुछ कहने सुनने लायक है जिसका नज़ारा ...
सहम सी जाती  हूँ पल भर के लिए
देख कालचक्र में जलते जीवन के दिए .....
तिरमिरा सी जाती है भावशून्य
सुनकर उसकी जिवंत दास्ताँ
उपलब्धियां कम नहीं जिसके जीवन की
वस सपनों तक पहुंचने से पूर्व
वक्त के हत्थों बाजुओं की कम लम्बाई
जो आज बन गई है जिंदगी में तन्हाई
कोई तो सुनेगा जिसकी  पूकार
जो खड़ा है आज मझधार
पूकार एक अनसुनी आवाज़



मंगलवार, 20 जनवरी 2015

gave punishment that animal

हर पन्ने को बदला
हर लफ्ज़ पर आँखों को रगडा
उन आँखों में टूटे हुए सपनो को देखा
जो सोने नहीं देते थे कभी .........
हर पंक्ति की एक ही धारा
हर मज़बूरी का एक ही सहारा .........
आज फिर से मजबूर हूँ
लिखने को एक व्यंग्य रस धारा .......
सुना था ,, देखा था
पुजारियों को पूजा करते
एक नया रूप मिला मुझे
मानवता के मात्थे पर कलंक धरते .....
जब भी पढ़ता हूँ
सन सी हो जाती है रूह
हवस के पुजारियों को
क्यों नहीं गर्त तक ले जाती है रूह .....
बेवस लाचार सी हो जाती है मेरी कलम
क्या तर्क उठाऊं , किस मुद्दे को सुलझाऊं ,,,,,
कौन सी पंक्ति लिखूं
ताकि हवस के पुजारियों पर
अंकुश अन्तकाल तक लगा जाऊं .......
क्या उनकी नहीं है माँ बहन और बेटी
क्या है उनकी भी इच्छा
वो भी हो किसे के निचे लेटी ???
शर्मसार होता हूँ रोज़
पंक्तियों को पृष्ठों में पढ़कर
हो जाती है एक नहीं दस आबरू तार तार
चाँद डूबने के बाद जब आता है रवि चढ़कर उस पार ....




शनिवार, 17 जनवरी 2015

अक्षर-ए-दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान


बहुत देर से एक अधूरी-सी
 रोशनी में बैठा था
चढ़ते सूरज से... ढलते चाँद तक
ना जाने कितनी बैचेनियां पाल बैठा था
अंधेरों की जिंदगी जो मेरी   उसके चिराग में..
वस -. एक सुकून की तलाश में
आज भी सहम जाता हूँ
देख अपने गुलिस्तां की हालत
सिक्कों का मोल यहाँ
तराजू जो दिल का उसका तोल कहाँ  ?
कोई तो सुनेगा मेरी पुकार
है जो आज बेवश जिंदगी , लाचार मेरी
होगा कहीं फरिश्ता कोई
जो सुनकर मेरी आवाज
जला देगा सुनील जिंदगी का चिराग
तब लिख देंगे नई

अक्षर-ए-दास्तान 

अक्षर-ए-दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान

कलम आज भी उठती है
चलती है ,रुक  जाती है
मेरे ही इशारों की गुलाम ये
मुझे  भी अपना मुरीद बनाती है !
शांत सी ,बेजान सी
मेरी जिंदगी की पहचान भी
अपने ही जहन की दस्तांन
लिख देता हूँ  ...... करके गर्त तक ब्यान  !
क्या हो गई गुस्ताखी
मेरे जिवंत रंग को देख लगता है .
आ गई है इसके चहरे पर उदासी
कोई तो सुन रहा होगा
आज मेरे सखा की पुकार
जिस कलम को नहीं नसीब
 अब पन्नों की बहार !
क्या करूं अब सुनील
क्या यहीं तक थी

तेरी अक्षर-ए-दास्तान !

अक्षर-ए-दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान

पल - पल  जहन  में एक ही सवाल
कर रहा है जो मेरा जीना मौहाल
नाराज क्यों है खुद ही - खुदा हमसे !
किसको सुनाऊँ अपना दर्द
क्या हो गया मेरे सीने में बढ़ते
दिनों- दिन इन जख्मों का हाल
जुडी है जहाँ मुझसे ,मुझी तक
 ओरों की भी जिंदगी !
अब बता ए बन्दे
किसे सुनील पुकार लगाउँ

किसे अक्षर-ए-दास्तान समझाऊं !

अक्षर –ए – दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान

हरपल मुझे एक ही ख्याल
जहन  में मेरे उठाता ...  एक ही सवाल
जो देखा है मैने गुजरे वक्त तक
या जो देखा मैंने अभी वर्तमान !
क्या बोलूं ’’’ कहां से शुरू करूं
हर घर की नयी कहानी !
व्यक्त करूं जिसे ...अपनी जुवानी
वहां बैठा है कोई आपकी ताक में
निगाहों से पैमाने नाप के
निरतंर लगाए एक ही आलाप
वस है जो जिंदगी
सुनील कोई होगा यहाँ
सुन लेगा अक्षर-ए-दास्तान



अक्षर –ए – दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान


आँखों में मेरी खाब कई
जिंदगी के मेरी साज कई
किस धुन में अब आपको बताऊँ
किस भाषा से आपको समझाऊँ
देख लेता अगर मंजर मेरा खुदा !
आज पुकार ना लगाता
ना ही कभी हाथ फैलता
वस गिर जाता नतमस्तक होकर
उस खुदा के आगे !
चाहे रख ले मुझे अब
चरणों की धूल में वसाके
सुनील के शब्द आज भी
अक्षर –ए –दास्तान है समझाते !



अक्षर –ए – दास्तान ,,,

अक्षर –ए – दास्तान


हर बार एक ही बात
हर पन्ने पर एक ही अलफ़ाज़
ये भी आई
वो भी गई
क्या कर गई हमारी सरकार !
क्या शुरू करूँ
क्या अंत धरुं
कौन सा कलमा लिखूं मै सरकार !
दिनों दिन बढते जा रहे है पन्ने
कुछ अछे
कुछ गंदे
जब उठाए हमने प्रश्न
कई दिग्गज हो गए नंगे !
रंग काला है
दिन काला नहीं
काले धन के पन्नो का
बिल काला नहीं !
एक दशक से उठ रहा सवाल
काले धन का हल
कर पाएगी सरकार ?
लिखने को तो लिखता रहूँ
पन्ने काले करके विकता रहूँ !
सुनील बनेगा नया इतिहास ?
या यूँ ही लिखता रहेगा
अक्षर –ए – दास्तान
जिसकी बढ़ रही विसात !