सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

a women

नारी को कभी पैरों की जुती नहीं समझा गया नारी को कभी भोग्य की दृष्टि से नहीं देखा गया
जबकि इस देश में नारी इतनी महँ है की उसके बारे में वर्णन करते करते अल्फाज़ कम पड़ जाते है .
अगर नारी के परिचय का वर्णन करूँ तो पंक्तियाँ भी सुन्दरता धारण कर लेती है .नारी का परिचय इतना है ,यह भारत की तस्वीर है  ,मात्र भूमि पर मर मिटने वालों की पीर है ,यह उन वीरों की दुहिता है जो हस हस झुला झूल गए ,नारी उन शेरो की माता है जो रण प्रांगण में जूझ गए ,नारी जीजा की अमर सहेली ,पन्ना की प्रतिछाया है ,कृष्णा के कुल की मरियादा .लक्ष्मी की समसिर है,नारी का परिचय इतना है यह भारत की तस्वीर है ,कालीदास का अमर काव्य, नारी तुलसी की रामायण ..नारी अमर बोल है श्री गीता के जिसका घर घर होता परायण .नारी सूरदास के मधुर गीतों में मीरा का एक तारा है . नारी का परिचय इतना है यह भारत की तस्वीर है..


रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग

रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग
अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मनुष्यों की रीढ़ की हड्डी में एक छोटे मस्तिष्क का पता लगाया है, जो हमें भीड़ के बीच से गुजरते वक्त या सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त संतुलन बनाने में मदद करती है और फिसलने या गिरने से बचाता है।

इस तरह के कार्य अचेतन अवस्था में होते हैं। हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के समूह संवेदी सूचनाओं को इकट्ठा कर मांसपेशियों के आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं, कैलिफोर्निया स्थित एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान साल्क के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के मुताबिक हमारे खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग इस छोटे दिमाग को दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं।

उनके मुताबिक इस अध्ययन के जरिए हमें हमारे शरीर में मौजूद ब्लैक बॉक्स के बारे में पता चला। हमें आज तक नहीं पता था कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं, प्रत्येक मिलीसेकेंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं, इसमें शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए संकेतक भी शामिल हैं।

अपने अध्ययन में साल्क वैज्ञानिकों ने इस संवेदी मोटर नियंत्रण प्रणाली के विवरण से पर्दा हटाया है, अत्याधुनिक छवि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इन्होंने तंत्रिका फाइबर का पता लगाया है, जो पैर में लगे संवेदकों की मदद से रीढ़ की हड्डी तक संकेतों को ले जाते हैं।

इन्होंने पता लगाया है कि ये संवेदक फाइबर आरओआरआई न्यूरॉन्स नाम के तंत्रिकाओं के अन्य समूहों के साथ रीढ़ की हड्डी में मौजूद होते हैं, इसके बदले आरओआरआई न्यूरॉन मस्तिष्क के मोटर क्षेत्र में मौजूद न्यूरॉन से जुड़े होते हैं, जो मस्तिष्क और पैरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध हो सकते हैं।

गोल्डिंग की टीम ने जब साल्क में आनुवांशिक रूप से परिवर्धित चूहे की रीढ़ की हड्डी में आरओआरआई न्यूरॉन को निष्क्रिय कर दिया तो पाया कि इसके बाद चूहे गति के बारे में कम संवेदनशील हो गए, गोल्डिंग की प्रयोगशाला के लिए शोध करने वाले शोधकर्ता स्टीव बॉरेन ने कहा,हमें लगता है कि ये न्यूरॉन सभी सूचनाओं को एकत्र कर पैर को चलने के लिए निर्देश देते हैं, यह शोध तंत्रिकीय विषय और चाल के नियंत्रण की निहित प्रक्रियाओं व आसपास के परिवेश का पता लगाने के लिए शरीर के संवेदकों पर विस्तृत विचार पेश करती है।

गुरुवार, 29 जनवरी 2015

green tea ग्रीन टी मुंह के कैंसर के इलाज में कारग


ग्रीन टी मुंह के कैंसर से लड़ने में कारगर हो सकता है। हाल में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ग्रीन टी में पाए जाने वाला एक यौगिक मुंह के कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है, जबकि यह सामान्य कोशिकाओं को क्षति नहीं पहुंचाता।

शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

goal of boll

कहते है गेंद की तरह है ये दुनिया
अंदर है जिसके बहुत सी कहानिया ...
जब भी चाहा देख कर खोलना मैंने ये पिटारा
बहुत कुछ कहने सुनने लायक है जिसका नज़ारा ...
सहम सी जाती  हूँ पल भर के लिए
देख कालचक्र में जलते जीवन के दिए .....
तिरमिरा सी जाती है भावशून्य
सुनकर उसकी जिवंत दास्ताँ
उपलब्धियां कम नहीं जिसके जीवन की
वस सपनों तक पहुंचने से पूर्व
वक्त के हत्थों बाजुओं की कम लम्बाई
जो आज बन गई है जिंदगी में तन्हाई
कोई तो सुनेगा जिसकी  पूकार
जो खड़ा है आज मझधार
पूकार एक अनसुनी आवाज़



मंगलवार, 20 जनवरी 2015

gave punishment that animal

हर पन्ने को बदला
हर लफ्ज़ पर आँखों को रगडा
उन आँखों में टूटे हुए सपनो को देखा
जो सोने नहीं देते थे कभी .........
हर पंक्ति की एक ही धारा
हर मज़बूरी का एक ही सहारा .........
आज फिर से मजबूर हूँ
लिखने को एक व्यंग्य रस धारा .......
सुना था ,, देखा था
पुजारियों को पूजा करते
एक नया रूप मिला मुझे
मानवता के मात्थे पर कलंक धरते .....
जब भी पढ़ता हूँ
सन सी हो जाती है रूह
हवस के पुजारियों को
क्यों नहीं गर्त तक ले जाती है रूह .....
बेवस लाचार सी हो जाती है मेरी कलम
क्या तर्क उठाऊं , किस मुद्दे को सुलझाऊं ,,,,,
कौन सी पंक्ति लिखूं
ताकि हवस के पुजारियों पर
अंकुश अन्तकाल तक लगा जाऊं .......
क्या उनकी नहीं है माँ बहन और बेटी
क्या है उनकी भी इच्छा
वो भी हो किसे के निचे लेटी ???
शर्मसार होता हूँ रोज़
पंक्तियों को पृष्ठों में पढ़कर
हो जाती है एक नहीं दस आबरू तार तार
चाँद डूबने के बाद जब आता है रवि चढ़कर उस पार ....




शनिवार, 17 जनवरी 2015

अक्षर-ए-दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान


बहुत देर से एक अधूरी-सी
 रोशनी में बैठा था
चढ़ते सूरज से... ढलते चाँद तक
ना जाने कितनी बैचेनियां पाल बैठा था
अंधेरों की जिंदगी जो मेरी   उसके चिराग में..
वस -. एक सुकून की तलाश में
आज भी सहम जाता हूँ
देख अपने गुलिस्तां की हालत
सिक्कों का मोल यहाँ
तराजू जो दिल का उसका तोल कहाँ  ?
कोई तो सुनेगा मेरी पुकार
है जो आज बेवश जिंदगी , लाचार मेरी
होगा कहीं फरिश्ता कोई
जो सुनकर मेरी आवाज
जला देगा सुनील जिंदगी का चिराग
तब लिख देंगे नई

अक्षर-ए-दास्तान 

अक्षर-ए-दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान

कलम आज भी उठती है
चलती है ,रुक  जाती है
मेरे ही इशारों की गुलाम ये
मुझे  भी अपना मुरीद बनाती है !
शांत सी ,बेजान सी
मेरी जिंदगी की पहचान भी
अपने ही जहन की दस्तांन
लिख देता हूँ  ...... करके गर्त तक ब्यान  !
क्या हो गई गुस्ताखी
मेरे जिवंत रंग को देख लगता है .
आ गई है इसके चहरे पर उदासी
कोई तो सुन रहा होगा
आज मेरे सखा की पुकार
जिस कलम को नहीं नसीब
 अब पन्नों की बहार !
क्या करूं अब सुनील
क्या यहीं तक थी

तेरी अक्षर-ए-दास्तान !

अक्षर-ए-दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान

पल - पल  जहन  में एक ही सवाल
कर रहा है जो मेरा जीना मौहाल
नाराज क्यों है खुद ही - खुदा हमसे !
किसको सुनाऊँ अपना दर्द
क्या हो गया मेरे सीने में बढ़ते
दिनों- दिन इन जख्मों का हाल
जुडी है जहाँ मुझसे ,मुझी तक
 ओरों की भी जिंदगी !
अब बता ए बन्दे
किसे सुनील पुकार लगाउँ

किसे अक्षर-ए-दास्तान समझाऊं !

अक्षर –ए – दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान

हरपल मुझे एक ही ख्याल
जहन  में मेरे उठाता ...  एक ही सवाल
जो देखा है मैने गुजरे वक्त तक
या जो देखा मैंने अभी वर्तमान !
क्या बोलूं ’’’ कहां से शुरू करूं
हर घर की नयी कहानी !
व्यक्त करूं जिसे ...अपनी जुवानी
वहां बैठा है कोई आपकी ताक में
निगाहों से पैमाने नाप के
निरतंर लगाए एक ही आलाप
वस है जो जिंदगी
सुनील कोई होगा यहाँ
सुन लेगा अक्षर-ए-दास्तान



अक्षर –ए – दास्तान

अक्षर-ए-दास्तान


आँखों में मेरी खाब कई
जिंदगी के मेरी साज कई
किस धुन में अब आपको बताऊँ
किस भाषा से आपको समझाऊँ
देख लेता अगर मंजर मेरा खुदा !
आज पुकार ना लगाता
ना ही कभी हाथ फैलता
वस गिर जाता नतमस्तक होकर
उस खुदा के आगे !
चाहे रख ले मुझे अब
चरणों की धूल में वसाके
सुनील के शब्द आज भी
अक्षर –ए –दास्तान है समझाते !



अक्षर –ए – दास्तान ,,,

अक्षर –ए – दास्तान


हर बार एक ही बात
हर पन्ने पर एक ही अलफ़ाज़
ये भी आई
वो भी गई
क्या कर गई हमारी सरकार !
क्या शुरू करूँ
क्या अंत धरुं
कौन सा कलमा लिखूं मै सरकार !
दिनों दिन बढते जा रहे है पन्ने
कुछ अछे
कुछ गंदे
जब उठाए हमने प्रश्न
कई दिग्गज हो गए नंगे !
रंग काला है
दिन काला नहीं
काले धन के पन्नो का
बिल काला नहीं !
एक दशक से उठ रहा सवाल
काले धन का हल
कर पाएगी सरकार ?
लिखने को तो लिखता रहूँ
पन्ने काले करके विकता रहूँ !
सुनील बनेगा नया इतिहास ?
या यूँ ही लिखता रहेगा
अक्षर –ए – दास्तान
जिसकी बढ़ रही विसात !



रविवार, 11 जनवरी 2015

poem of the wind

कशिश ए तमन्ना होती है निगाहों से ‘
धुप या छाओं हो रहना चाहूँ तेरी निगाहों में ‘
और जन्नत की चाह रखते है ज़ीने के लिए
हम गर्त तक जाएंगें शाकी तुझे पाने के लिए ‘’
दीन मेरे अमान ,रूह ए रमजान
 क्या है शाकी रूह ए फ़रमान ;;
राजी है तू खुदा की रहमत में
बता तो सही खिदमत है किस रज़ा में .
कशिश ए तमन्ना होती है निगाहों से ‘
धुप या छाओं हो रहना चाहूँ तेरी निगाहों में ‘
आज फिर उमस सी उठी है सीने में
क्या रखा है ज़ीने में
महखाने में जाकर आऊँ..
 आग बुझाकर आऊँ



शनिवार, 15 नवंबर 2014

GILRS HARMONS PROBLEM

किशोरियां अक्सर हो जाती हैं अंडाशय विकार का शिकार (00:12)
11 नवंबर --भारतीय किशोरियों में सुस्त जीवनशैली, बासी भोजन की आदतें और मोटापे के कारण पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) फैलने की संभावना बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक, 10 से 30 फीसदी किशोरियां इससे प्रभावित हो रही हैं।

save your child (HIV0) COW MILK

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गाय के दूध से आसान हो सकता है शिशुओं में एड्स का उपचार
सामान्यत: एड्स से बचाव और उपचार में प्रयोग की जाने वाली वाली एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं पानी में बहुत घुलनशील नहीं होती हैं। लेकिन इन एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं से युक्त दूध बच्चों को एचआईवी संक्रमण से बचाने और उपचार में बेहतर मदद कर सकता है।

डायबिटीज

मोटापे को कहें अलविदा, मधुमेह से पाएं मुक्ति 
खान-पान की गलत आदतें, धूम्रपान की लत और अस्वस्थ जीवनशैली भारतीय युवाओं में मधुमेह (डायबिटीज) की आशंका को बढ़ा रही है। मोटापा इसमें समस्या और बढ़ा देता है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और मोटापे से दूर रहकर मधुमेह जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है

girls like her mother

किसी लड़की को मां ही बनाती है बुद्धिमान 
माताएं बातचीत के दौरान बेटे के बजाय बेटी से ज्यादा भावनात्मक रूप से घुली-मिली होती हैं और इस प्रक्रिया में लड़कों की अपेक्षा लड़कियां भावनात्मक रूप से ज्यादा बुद्धिमान होकर निखरती हैं।