बुधवार, 19 अप्रैल 2017

अनजान है अज़ान से सोनू , कुछ ज्यादा ही बोल गए- अब गर्माएगा माहौल


आज कल कोई भी कहीं भी कुछ भी बोल जाता है |  शायद हमारे  संविधान ने जो हमें बोलने का और लिखने का अधिकार दिया है, उसका हम पूरा का पूरा फायदा उठा रहे है | बेशक कोई दोराय नही किसी को भी चार से ज्यादा अपने मौलिक और नैतिक अधिकार याद नहीं होंगे अगर एकाएक पूछ लिया जाए | हाँ- होंगे भी क्यूँ जिंदगी में कहने को तो कोई कुछ ख़ास नहीं कर रहा , बस वक्त ही रफ्तार पकडे  हुए है|
 
सोनू निगम ने हाल ही में एक बयान दिया लेकिन कोई नई बात नहीं है कि इस तरह का कोई यह पहला बयान है | अगर मै यहाँ बयां करने लगूं तो शायद दो – चार नाम भूल जाऊं लेकिन आपको शायद दो – चार नाम कम पता होंगे कि किसने कौन सा विवादित बयान दिया| हाँ- यह भी है कि आपको 8-10 नाम ऐसे भी पता हो जो खासे दिन मिडिया में सुर्खियाँ रहे और बहस का मुद्दा , क्यूंकि मुद्दा कोई भी हो –किस्सा कोई भी उसपर राजनीती न गरमाए ऐसा कहाँ होता है|

अभी सोनू दा भी बोल पड़े हैं – लेकिन अब होगा क्या, प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होगा, राजनीती गर्माएगी – न्यूज़ पेपर और टीवी चैनल की हैडलाइन बनेगी | अंत में होगा क्या ? बयान पर सोनू साहिब माफीनामा जाहिर कर देंगे |  लेकिन वो अब अपने बयान को न बदल सकते है और न ही बयां कर सकते है वो विचार शायद जिसको वो बोल न सके. हो भी सकता है वो कहना कुछ और चाहते हों लेकिन शब्द न सूझे हों – एक सरल सा रास्ता न मिला हो |

बात ये भी है कि अगर लाऊड स्पीकर का  एक सही मानक तय कर दिया जाए तो भी बेहतर है | ताकि जो बात अस्पताल और स्कूल के बहार लिखी होती है – हॉर्न न बजाए और शोर न मचाएं | हाँ  अगर ध्वनि का मानक मन्दिर, मस्जिद और गुरुद्वारा में तय कर दिया जाए तो शायद उत्तम रहेगा| न कोई झिक झिक न कोई परेशानी |  

लेकिन सोनू जी मैंने कभी आपका घर तो नहीं देखा और न ही मुझे पता है कि आपके घर के  पास कोई मस्जिद, गुरुद्वारा, या कोई मन्दिर है| लेकिन अगर सुबह आपको उठने में दिक्कत है तो इसमें समाज कुछ नहीं कर सकता | करना आपको ही पड़ेगा | समाज में हर कोई अपने विचारो से जीता है | लेकिन आपके बयान की निंदा करूँ तो सही रहेगा, क्यूंकि आपको अपनी नींद प्यार है – और शायद आप भूल गए कि नींद और निंदा शायद इंसान को कभी आगे नहीं बढ़ने नहीं देती | अब आपके भी अपने विचार है – जो कहना कहिए लेकिन ऐसा कुछ न कहिए की वो जन मानस के हित में न हो | और हमारी तो यही राय  है कि आप अगर जल्दी उठा करें तो शरीर और स्वास्थ्य भी सही रहेगा |

वैसे भी एक नेता और अभिनेता को ऐसा बयान देने से पहले सोचना जरुर चाहिए | नेता वोट बैंक के लिए और अभिनेता फैन्स के लिए | चलो भाई अब आपके विचार है जो कहा सही कहा – लेकिन आपने जनाब अपनी समझ से और जिसने आपके बयान को जितना समझा वो भी अपनी समझ से | 

क्यूंकि विचारों का आदान-प्रदान करते रहना चाहिए | ताकि कुछ तो किसी के विचार से देश को नयी दिशा मिलेगी  –जिससे हमारे देश की दशा में थोडा सुधार हो सके |

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

125 करोड़ कहाँ है हम और कहाँ स्टैंड है हमारा ?




पिछले 2 साल से ज्यादा वक्त से सुन रहा हूँ, हमारे देश की जनसख्या सवा सौ करोड़ है | सब जानते भी है कौन कहता है ‘मेरे देश के सवा सौ करोड़ देश वासियों’ लेकिन मै किसी व्यक्ति विशेष पर  न कभी कोई टिप्पणी करता हूँ न आज करूँगा और खुद पर विशवास है कि कभी करूँगा भी नहीं  | हाँ बात यहाँ  125 करोड़ देश वासियों की है | लेकिन क्या आपको सही मायने में लगता है कि मेरे देश भारत की जनसंख्या 125 करोड़ है | शायद प्रश्न सा जहन में बन जाए ? क्यूंकि जब जमीनी हकीकत को देखता हूँ तो विश्वास तो दूर . दूर – दूर तक इस संख्या पर यकीं नहीं होता |
शायद प्रधानमंत्री सहित जो भी ये बात कहता है मेरे हिसाब से गणित का ज्ञान तो बहुत होगा |लेकिन माना हुआ अभी भी XX ही है | क्यूंकि गणित में पढ़ाया जाता था – मान लो संख्या X ! लेकिन यहाँ तो X और Y का जो गणित चला हुआ है वो थमते कहीं नहीं दिखता | X और Y हारमोंस के  चक्कर में यहाँ दिन व् दिन रात होते ही अगली सुबह तक लगता है 8 – 10 हज़ार की वृद्धि हो ही जाती होगी|
मंच पर आजकल हर कोई दोहराता है, हर अखबार और हर मिडिया हाउस का भी यही कहना है कि भारत के सवा सौ करोड़ देश वासी है | अब इस बात पर सबका स्टैंड स्पष्ट है कि भारत में सवा सौ करोड़ देश वासी है |
गौर करें सब कहते है सवा सौ करोड़ देशवासी !? कभी भी नहीं शायद गलती हो गई होगी देशवासी की जगह या तो नागरिक बोलना और लिखना चाहिए या फिर उन वासियों में से बच्चों की गिनती निकाल देनी चाहिए |
हाँ ये भी हो सकता है कि जनगणना के आधार पर या फिर जिन लोगों ने आधार कार्ड बनाए है | उन आंकड़ों के बल पर कहा जाता है कि भारत के सवा सौ करोड़ देशवासी है| लेकिन में ये संख्या कम नहीं होने का सवाल भी नहीं उठता | हाँ 10 -12 करोड़ का अनुमान नहीं हकीकत में इजाफा होने की बात स्वीकारता हूँ | क्यूंकि आज भी खुद उन लोगों से मुलकात कर चूका हूँ जिनका आधार कार्ड नहीं है | उन लोगों से बात कर चूका हूँ जो भीख मांगते है | उनको लोगों को समझा चूका हूँ जो अभी अच्छे से रोड भी क्रोस नहीं कर पाते – हाँ रेलवे स्टेशन, मार्किट या फिर बस स्टैंड पर भीख मांगते हैं| कुछ लोग यूँ ही इधर उधर वक्त गुजारते है . कुछेक झुगियों में रहकर जीवन व्यतीत करते है | बस मुसाफिर बनकर जिंदगी काट रहे है | क्यूंकि इनकी गिनती ही नहीं है | इनकी गिनती करना भी मुश्किल है | और जो काम मुश्किल है वहां से तो हम पहले ही पल्ला झाड लेते है - फिर भी हमारा स्टैंड स्पष्ट है - सवा सौ करोड़ देशवासी | आजकल तो भीख मांगने के तरीके भी अलग –अलग है उस पर बात फिर कभी बयान सही लेकिन यहाँ मेरा स्टैंड स्पष्ट है – सवा सौ करोड़ देशवासी और बाकि के प्रवासी|  जी हाँ....

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

मौसम की तरह बदलेंगे अब डीज़ल और पेट्रोल के दाम!




कई विकसित देशों के बाज़ार के तर्ज़ पर मई की 1 तारीख़ से भारत में डीज़ल और पेट्रोल के दाम सोने और चांदी की तरह  रोज़ बदलेंगे. इंडियल ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड देश के पांच शहरों में इस संबंध में एक प्रयोग करने जा रहे हैं.बाद में इसे पूरे भारत में लागू करने की योजना है. इंडियल ऑयल के चेयरमैन बी अशोक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया है कि फिलहाल इस योजना को पुदुचेरी, आंध्र प्रदेश के वाइज़ैग, राजस्थान के उदयपुर, झाड़खंड के जमशेदपुर और चंडीगढ़ में लागू या जाएगा.
लेकिन अब ये तो तय  है की जहाँ जहाँ मई की 1 तारीख़ से भारत में डीज़ल और पेट्रोल के दाम सोने और चांदी की तरह  रोज़ बदलेंगे | वहां वहां अपराध और भ्रष्टाचार को बढ़वा मिलना शुरू हो जाएगा | क्यूंकि पहले अपराध ज्यादातर नशे के कारण हुआ करते थे | लेकिन अब तो शराब के ठेके भी कम ही दिखाते है | शराब के ठेके को सर्च करने के लिए अब बाईक और कार में तेल की मात्र भी ज्यादा रखनी होगी|
जाहिर सी  बात है सरकार ने शराब बंदी कर दी है | अब डीज़ल और पेट्रोल के माध्यम से पैसे कमाने का रास्ता निकाला है |रोज़ डीज़ल और पेट्रोल के दाम बदलेंगे, जिस दिन पम्प मालिकों को पता होगा आज सबसे कम दाम है उस दिन ज्यादा मात्र में तेल स्टोर कर लेंगे | और जिस दिन दाम बढेंगे उस दिन उसका प्रयोग किया जाएगा | साथ ही लोगों का धंधा भी चमकने वाला है | जो लोग अवैध तरीके से शराब बेचा करते करते थे – अब वह डीज़ल और पेट्रोल की धड्ले से बिक्री किया करेंगे |
वैसे भी जमीनी हकीकत यही है आम आदमी को कहाँ ज्ञात होता है कि आज किस चीज़ का क्या भाव है | क्यूंकि रोज़मर्रा के कामो से फुर्सत ही नहीं मिलती है|रोज़ की निगरानी कौन करेगा ? लेकिन ये बात भी तय है कि अब मार्किट के भाव जानना आम आदमी सिख जाएगा | जागरूक रहने शुरू हो जाएगा – की आज  डीज़ल और पेट्रोल के भाव यह हैं! अब डीज़ल और पेट्रोल के दाम भी तापमान की तरह घटते-बढ़ते रहेंगे|लोगों को हररोज़ पैट्रोल भरवाने से पहले शेयर मार्किट के बारे में भी ज्ञान हासिल करना होगा|
इतना  ही नहीं और भी क्या क्या होगा इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है| लेकिन जो भी होगा उसकी सुर्खिया रोज़ अख़बार और टीवी चैनल पर तो रहेंगी ही साथ ही किस्सा भी बनेगा हरेक की जुबान पर|

तो अब ... आधार पे से उंगली मार डाकुओं की होगी वापसी!




केंद्र की मोदी सरकार ने भीम एप शुरू कर दिया है| आधार पे का सिस्टम शुरू हो गया गया है |डिजिटल इंडिया का सपना जल्द ही साकार होगा| हमारा देश भी विकसित हो जाएगा| लेकिन इसी बीच एक और बात ख़ास होगी – वो ये की अब चोरी और अपराध की वारदातों में कमी आएगी | साथ ही पुलिस को भी अब थोड़ी राहत मिलेगी | लेकिन शायद अब आफत गले पड़ने वाली है | क्यूंकि अब हर पेमेंट एक ऊँगली से हुआ करेगी –तो ऐसे में चोर या ऐसे अपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग उँगलियाँ ही काटा करेंगे | फिर ऊँगली या अंगूठा ही उनकी तिजोरी की चाबी हुआ करेगी |

शायद सुर्खियाँ  भी यही बने ( पेमेंट देते वक्त एक गिरफ्तार, १० उँगलियाँ बरामद – कौन सी महिला की- कौन सी पुरुष की , पहचान कर पाना मुश्किल , जाँच के बाद होगा खुलासा) ऊँगली मार डाकुओं से अब सबको सावधान रहना होगा | किसी से हाथ मिलते वक्त भी शायद ध्यान रखना होगा | क्यूंकि पहले गले काटे जाते थे अब उँगलियाँ काटी जाएंगी और इस बात को कहने में कोई हर्ज़ नहीं होगा की ऊँगलीमार डाकुओं की वापसी होगी | लेकिन संज्ञा बदल दी जाएगी. शायद उनको कोई और नाम दिया जाए या किसी पर्यायवाची शब्द का इस्तेमाल हो!

इतना ही नहीं अगर किसी ने दो- चार उँगलियाँ काट भी ली तो इनकी भी एक अवधि हुआ करेगी| क्यूंकि एक कटी हुई ऊँगली कितने दिन काम कर पायेगी| जिसके बाद ऊँगली मार डाकुओं को नई ऊँगली की तलाश हुआ करेगी|

इसका सबसे बढ़ा नुक्सान उनको भी होगा जो बाज़ार से सामान लाने के बाद घर पहुँचने तक उसके दाम में ५ या १० रूपये की वृद्धि कर दिया करते थे| हंसने वाला किस्सा नहीं है_ बचपन में हर कोई करता है और सबने किया भी होगा इसमें कोई दोराय नहीं है | जो भी हो सब आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि आधार पे का जमीनी आधार कितना सफल हो पाता है| उम्मीद सब बेहतरीन होने की है |

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

दिल और दिमाग के प्यार हज़ारों देखे

दिल और दिमाग के प्यार हज़ारों देखे
लेकिन महसूस हुआ तो रूह राज का
खफा लाख सही ज़िन्दगी हमसे
मोहताज़ हो गया हूँ आप का
कदर नहीं है हमे शायद 
प्यार है भी लेकिन कबूल नहीं
यही है एहसास आज का
नशा नहीं तेरे हुस्न का कोई
मुरीद हो गया हूँ तेरी एक बात का
फर्क किसी को पड़ेगा नहीं
दो पल बहेगा आंसू जजबात का
मेरी आंख से नहीं छलका
शायद नसीब ही नहीं पानी देह ए राख का
माफ़ करना गुस्ताखी होगी कोई
गिला लाख सही साकी उदासी नहीं कोई

ब्यान नहीं कर सकता हूँ ...

ब्यान नहीं कर सकता हूँ 
भावनाएं क्या है ?
जान ही नहीं भर सकता हूँ ||
भावनाएं क्या है ?
एहसास ही बन सकता हूँ 
बार- बार व्यक्त नहीं कर सकता हूँ ||
दिल में क्या है
दिमाग से जंग कर सकता हूँ ||
मोहताज़ नहीं हूँ जिंदगी का
सांसों से भी जंग कर सकता हूँ ||
भीगी नहीं है पलके अभी तक
गला भी गले तक ही भर सकता हूँ ||
आह भी निकलती नहीं है अब
दिल की दरारों में मिर्ची भर सकता हूँ ||
बहुत देखे हैं चहरे चाहने वाले
आइना भी खुद ही खुदी का बन सकता हूँ ||
बजूद क्या है जनता हूँ,
कौन क्या है पहचानता हूँ,
अभी हुआ नहीं है दिमाग ख़राब
सोच- विचार कर ही हल निकालता हूँ ||

क्यूँ लेता हूँ फैंसला

क्यूँ लेता हूँ फैंसला 
जो टूटता नहीं है हौंसला 
क्यूँ खुद ही खुदी का दुश्मन हूँ 
जो लम्हा भर नहीं सोचता 
क्यूँ लेता हूँ फैंसला 
सवाल ही सवाल है
वस मौत का मूल ही जबाव हैं
क्यूँ लेता हूँ फैंसला
जल्दबाजी भीं नहीं
जालसाजी भीं नहीं
अंत नहीं शुरुआत है
जो यूँ लेता हूँ फैंसला
सोचा नहीं उस बात का
भविष्य मेरे हाथ का
वर्तमान में जो लिया है
फैंसला मेरे साथ का
जो यूँ लेता हूँ फैंसला
फिर ना सोचूंगा सुनील
क्यूँ लेता हूँ फैंसला
फैंसला मेरे विश्वास का

अगर तुम कहो की ये आंसू न हमारे है,

अगर तुम कहो की ये आंसू न हमारे है, 
जो भी है ये वक्त के इशारे हैं,
सोच तुम्हारी घूमे दुनिया सारी -
फिर कहाँ कौन किसके सहारे किनारे हैं ।। 
अगर तुम कहो की ये आंसू न हमारे है ,
जो भी है ये वक्त के इशारे हैं ,
मंज़िल करीब ना दूर रूह से सही
रुकना नहीं सिलसिला इरादों में हमारे है।।

जो भी गया- हसा के गया

जो भी गया- हसा के गया 
हरे जख्मो में नमक लगा के गया॥ 
मरहम है अब यादों का 
दिल की गहराइयों में जो समाते गया॥ 
रंगीन ज़िन्दगी में किसी ने -
अच्छा- किसी ने अपना कहा हमे॥
मिली नहीं वो रूह-
जिसे सच्चा कहा हमने,
जो भी गया- हसा के गया
हरे जख्मो में नमक लगा के गया॥
खुश हूँ यादें तो है -
मेरे अंदर जो दफ़न -इरादे तो हैं॥
उलझन नहीं कोई -इतिहास गवाह है,
उल्फत में अक्सर ऐसा ही होता है-
मानते हो तुम मंज़िल जिसे अपनी
हमसफर उनका कोई और होता है॥
ये तमाशा आज सरे बाजार हो गया-
जिस्म इश्क से नहीं, रूह से सरोकार हो गया ॥
जो भी गया- हसा के गया
हरे जख्मो में नमक लगा के गया॥
दर्द-ए- उल्फ़त 'सुनील' की खातिर एक ही है,
ख़ाक का पुतला इस जहान में इंसान हो गया॥

याद वो भीं नहीं

इतना याद वो भीं नहीं, 
जिन्हें याद किया जाए। 
तुम्हे याद करके भी- 
क्यों भूलने की फरियाद की जाए॥ 
आंख ओझल-
फिर भी खाब लिया जाए।
परत एक तरफ नमकीन पानी की,
छलकी आंख से तस्वीर भी साफ़ नज़र आए॥
तय करना अब मुश्किल है,
क्या फ़रयाद में फ़रमाए-
जवाब निकले तो तब,
जब कोई सवाल समझ आए॥

मेरे जीते जी ही मुझे कफन दे जाना

मेरे जीते जी ही मुझे कफन दे जाना , मरने के बाद कौन खबर देगा मेरी !! आज हूँ जिन्दा तो ख्याल ही है मेरा - वो भी तब जब वर्तमान मे आहट है मेरी !! कोई ना मुझे याद करना, याद रखना अंत तक बात मेरी !! गुस्ताखी जो कर दी आपने कभी, आह ! निकल ना सकेगी गले से- आंख नम हो जायेगी , ये औकत है मेरी !! मेरे जीते जी कफन दे जाना , मेरे मरने के बाद कौन खबर देगा मेरी !!

ख़ूबसुरत गुनाह करता हूँ

ख़ूबसुरत गुनाह करता हूँ।
उसको पाने की चाह करता हूँ ।।
उसका चेहरा नज़र ही आता है ।
जिस भी जानिब निग़ाह करता हूँ ।।
वो हक़ीक़त में मिल नहीं पाता ।
ख़्वाब में रस्मो-राह करता हूँ ।।
जख्म न लगे तुझे ,
न छेड़ मेरे शीशे की तरह टूटे हुए दिल को।
सुना है -
धार तेज़ हो जाती है शीशे के टूटने के बाद।।

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

सालों से किए काम से नहीं, व्यक्ति सिखने से आगे बढ़ता है



एक अरसे से हम एक बात सुनते आए है. बड़पन ही होगा शायद जो जमीं से जुड़ते आए हैं, औकात की बात करते हैं नहीं , क्योंकि खुद खुदा ने भी जन्म दाता और गुरु के आगे सर झुकाए है. ख्याल भी नहीं उन बातों का, जिसने राह में रोड़े अटकाए हैं। अनुभव तो सियासत के धुरधंरों को भी बहुत है -फिर क्यों वो हारते आए हैं। जीत उनके सर जो पञ्च तत्वों से भी सीख कर, लकीर के फ़क़ीर से तक़दीर चमकाते आए है। काम तो है सालो का उनका, अनुभव फिर क्यों सवालों में अब, जो हमारे कर्म पर तंज़ और मेहनत को भ्रम समझते आए है।