बुधवार, 21 जनवरी 2015
मंगलवार, 20 जनवरी 2015
gave punishment that animal
हर पन्ने को बदला
हर लफ्ज़ पर आँखों को
रगडा
उन आँखों में टूटे
हुए सपनो को देखा
जो सोने नहीं देते थे
कभी .........
हर पंक्ति की एक ही
धारा
हर मज़बूरी का एक ही
सहारा .........
आज फिर से मजबूर हूँ
लिखने को एक व्यंग्य
रस धारा .......
सुना था ,, देखा था
पुजारियों को पूजा
करते
एक नया रूप मिला
मुझे
मानवता के मात्थे पर
कलंक धरते .....
जब भी पढ़ता हूँ
जब भी पढ़ता हूँ
सन सी हो जाती है
रूह
हवस के पुजारियों को
क्यों नहीं गर्त तक
ले जाती है रूह .....
बेवस लाचार सी हो
जाती है मेरी कलम
क्या तर्क उठाऊं ,
किस मुद्दे को सुलझाऊं ,,,,,
कौन सी पंक्ति लिखूं
ताकि हवस के
पुजारियों पर
अंकुश अन्तकाल तक
लगा जाऊं .......
क्या उनकी नहीं है
माँ बहन और बेटी
क्या है उनकी भी इच्छा
वो भी हो किसे के
निचे लेटी ???
शर्मसार होता हूँ
रोज़
पंक्तियों को
पृष्ठों में पढ़कर
हो जाती है एक नहीं
दस आबरू तार तार
चाँद डूबने के बाद
जब आता है रवि चढ़कर उस पार ....
शनिवार, 17 जनवरी 2015
अक्षर-ए-दास्तान
अक्षर-ए-दास्तान
बहुत देर से एक
अधूरी-सी
रोशनी में बैठा था
चढ़ते सूरज
से... ढलते चाँद तक
ना जाने कितनी
बैचेनियां पाल बैठा था
अंधेरों की
जिंदगी जो मेरी उसके चिराग में..
वस -. एक सुकून
की तलाश में
आज भी सहम जाता
हूँ
देख अपने
गुलिस्तां की हालत
सिक्कों का मोल
यहाँ
तराजू जो दिल
का ? उसका तोल कहाँ ?
कोई तो सुनेगा
मेरी पुकार
है जो आज बेवश
जिंदगी , लाचार मेरी
होगा कहीं
फरिश्ता कोई
जो सुनकर मेरी
आवाज
जला देगा सुनील
जिंदगी का चिराग
तब लिख देंगे
नई
अक्षर-ए-दास्तान
अक्षर-ए-दास्तान
अक्षर-ए-दास्तान
कलम आज भी उठती
है
चलती है ,रुक जाती है
मेरे ही इशारों
की गुलाम ये
मुझे भी अपना मुरीद बनाती है !
शांत सी ,बेजान सी
मेरी जिंदगी की
पहचान भी
अपने ही जहन की
दस्तांन
लिख देता
हूँ ...... करके गर्त तक ब्यान !
क्या हो गई
गुस्ताखी
मेरे जिवंत रंग
को देख लगता है .
आ गई है इसके
चहरे पर उदासी
कोई तो सुन रहा
होगा
आज मेरे सखा की
पुकार
जिस कलम को
नहीं नसीब
अब पन्नों की बहार !
क्या करूं अब सुनील
क्या यहीं तक थी
तेरी अक्षर-ए-दास्तान !
अक्षर-ए-दास्तान
अक्षर-ए-दास्तान
पल - पल जहन
में एक ही सवाल
कर रहा है जो
मेरा जीना मौहाल
नाराज क्यों है
खुद ही - खुदा हमसे !
किसको सुनाऊँ
अपना दर्द
क्या हो गया
मेरे सीने में बढ़ते
दिनों- दिन इन
जख्मों का हाल
जुडी है जहाँ
मुझसे ,मुझी तक
ओरों की भी जिंदगी !
अब बता ए बन्दे
किसे सुनील
पुकार लगाउँ
किसे
अक्षर-ए-दास्तान समझाऊं !
अक्षर –ए – दास्तान
अक्षर-ए-दास्तान
हरपल मुझे एक
ही ख्याल
जहन में मेरे उठाता ... एक ही सवाल
जो देखा है
मैने गुजरे वक्त तक
या जो देखा
मैंने अभी वर्तमान !
क्या बोलूं ’’’ कहां से शुरू करूं
हर घर की नयी
कहानी !
व्यक्त करूं
जिसे ...अपनी जुवानी
वहां बैठा है
कोई आपकी ताक में
निगाहों से
पैमाने नाप के
निरतंर लगाए एक
ही आलाप
वस है जो जिंदगी
सुनील कोई होगा
यहाँ
सुन लेगा
अक्षर-ए-दास्तान
अक्षर –ए – दास्तान
अक्षर-ए-दास्तान
आँखों में मेरी
खाब कई
जिंदगी के मेरी
साज कई
किस धुन में अब
आपको बताऊँ
किस भाषा से
आपको समझाऊँ
देख लेता अगर
मंजर मेरा खुदा !
आज पुकार ना
लगाता
ना ही कभी हाथ
फैलता
वस गिर जाता
नतमस्तक होकर
उस खुदा के आगे
!
चाहे रख ले
मुझे अब
चरणों की धूल
में वसाके
सुनील के शब्द
आज भी
अक्षर –ए –दास्तान
है समझाते !
अक्षर –ए – दास्तान ,,,
अक्षर –ए – दास्तान
हर बार एक ही बात
हर पन्ने पर एक ही
अलफ़ाज़
ये भी आई
वो भी गई
क्या कर गई हमारी
सरकार !
क्या शुरू करूँ
क्या अंत धरुं
कौन सा कलमा लिखूं
मै सरकार !
दिनों दिन बढते जा
रहे है पन्ने
कुछ अछे
कुछ गंदे
जब उठाए हमने प्रश्न
कई दिग्गज हो गए
नंगे !
रंग काला है
दिन काला नहीं
काले धन के पन्नो का
बिल काला नहीं !
एक दशक से उठ रहा
सवाल
काले धन का हल
कर पाएगी सरकार ?
लिखने को तो लिखता
रहूँ
पन्ने काले करके
विकता रहूँ !
सुनील बनेगा नया
इतिहास ?
या यूँ ही लिखता
रहेगा
अक्षर –ए – दास्तान
जिसकी बढ़ रही विसात
!
रविवार, 11 जनवरी 2015
poem of the wind
कशिश ए तमन्ना होती
है निगाहों से ‘
धुप या छाओं हो रहना
चाहूँ तेरी निगाहों में ‘
और जन्नत की चाह
रखते है ज़ीने के लिए
हम गर्त तक जाएंगें
शाकी तुझे पाने के लिए ‘’
दीन मेरे अमान ,रूह
ए रमजान
क्या है शाकी रूह ए फ़रमान ;;
राजी है तू खुदा की
रहमत में
बता तो सही खिदमत है
किस रज़ा में .
कशिश ए तमन्ना होती
है निगाहों से ‘
धुप या छाओं हो रहना
चाहूँ तेरी निगाहों में ‘
आज फिर उमस सी उठी
है सीने में
क्या रखा है ज़ीने
में
महखाने में जाकर
आऊँ..
आग बुझाकर आऊँ
गुरुवार, 1 जनवरी 2015
बुधवार, 24 दिसंबर 2014
शनिवार, 15 नवंबर 2014
GILRS HARMONS PROBLEM
किशोरियां अक्सर हो जाती हैं अंडाशय विकार का शिकार (00:12)
11 नवंबर --भारतीय किशोरियों में सुस्त जीवनशैली, बासी भोजन की आदतें और मोटापे के कारण पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) फैलने की संभावना बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक, 10 से 30 फीसदी किशोरियां इससे प्रभावित हो रही हैं।
11 नवंबर --भारतीय किशोरियों में सुस्त जीवनशैली, बासी भोजन की आदतें और मोटापे के कारण पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) फैलने की संभावना बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक, 10 से 30 फीसदी किशोरियां इससे प्रभावित हो रही हैं।
save your child (HIV0) COW MILK
=
गाय के दूध से आसान हो सकता है शिशुओं में एड्स का उपचार
सामान्यत: एड्स से बचाव और उपचार में प्रयोग की जाने वाली वाली एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं पानी में बहुत घुलनशील नहीं होती हैं। लेकिन इन एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं से युक्त दूध बच्चों को एचआईवी संक्रमण से बचाने और उपचार में बेहतर मदद कर सकता है।
गाय के दूध से आसान हो सकता है शिशुओं में एड्स का उपचार
सामान्यत: एड्स से बचाव और उपचार में प्रयोग की जाने वाली वाली एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं पानी में बहुत घुलनशील नहीं होती हैं। लेकिन इन एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं से युक्त दूध बच्चों को एचआईवी संक्रमण से बचाने और उपचार में बेहतर मदद कर सकता है।
डायबिटीज
मोटापे को कहें अलविदा, मधुमेह से पाएं मुक्ति
खान-पान की गलत आदतें, धूम्रपान की लत और अस्वस्थ जीवनशैली भारतीय युवाओं में मधुमेह (डायबिटीज) की आशंका को बढ़ा रही है। मोटापा इसमें समस्या और बढ़ा देता है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और मोटापे से दूर रहकर मधुमेह जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है
खान-पान की गलत आदतें, धूम्रपान की लत और अस्वस्थ जीवनशैली भारतीय युवाओं में मधुमेह (डायबिटीज) की आशंका को बढ़ा रही है। मोटापा इसमें समस्या और बढ़ा देता है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और मोटापे से दूर रहकर मधुमेह जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है
girls like her mother
किसी लड़की को मां ही बनाती है बुद्धिमान
माताएं बातचीत के दौरान बेटे के बजाय बेटी से ज्यादा भावनात्मक रूप से घुली-मिली होती हैं और इस प्रक्रिया में लड़कों की अपेक्षा लड़कियां भावनात्मक रूप से ज्यादा बुद्धिमान होकर निखरती हैं।
माताएं बातचीत के दौरान बेटे के बजाय बेटी से ज्यादा भावनात्मक रूप से घुली-मिली होती हैं और इस प्रक्रिया में लड़कों की अपेक्षा लड़कियां भावनात्मक रूप से ज्यादा बुद्धिमान होकर निखरती हैं।
Listen to many
LiSteN tO maNy, speAk to A fEw. My definition of an intellectual is someone who can listen to the William Tell Overture without thinking of the LoNe RaNgeR. ANYWAY You have to listen to the people who have a negative opinion as well as those who have positive opinion. Just to make sure that you are blending all these opInIonS in your mind before a decision is made.
diedly
देखा होगा दुनिया वालों ने बेटे के कंधो पर बाप का जनाजा।
लेकिन आज क्या गुजरी होगी उस बाप पर जिसके कंधे पर था बेटे का जनाजा।
एक यहाँ फूटा जो नसीब ? ए -खुदा कफ़न भी नहीं हुआ उन्हें हमारे हाथों का नसीब।
लेकिन आज क्या गुजरी होगी उस बाप पर जिसके कंधे पर था बेटे का जनाजा।
एक यहाँ फूटा जो नसीब ? ए -खुदा कफ़न भी नहीं हुआ उन्हें हमारे हाथों का नसीब।
गुरुवार, 6 नवंबर 2014
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