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रविवार, 21 जून 2015
शुक्रवार, 12 जून 2015
गुरुवार, 11 जून 2015
#YOGAA DAY योग दिवस से पहले योगगुरू की ‘पाठशाला’
योग दिवस से पहले योगगुरू की ‘पाठशाला’
राजपथ में 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों के लिए योगगुरु बाबा रामदेव ने जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में एक विशाल प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है। 14 जून से बाबा रामदेव सुबह 5.30 बजे से 7.30 बजे तक लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस शिविर में पंतजलि योगपीठ के 5200 साधक हिस्सा लेंगे । पतंजलि योग पीठ ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को उत्साहपूर्वक मनाने के लिए बनाई गए विश्वस्तरीय कार्ययोजना के अंतर्गत इस शिविर का आयोजन किया है ।इस शिविर में दुनिया को योग के प्रति जागरुक करने के लिए और सही तरह से योग करने के लिए 21 जून को होने वाले 35 मिनट के योग प्रोटोकॉल का डिमोन्स्ट्रेशन एवं अभ्यास किया जाएगा। इस कार्ययोजना के अंतर्गत पंतजलि योगपीठ ने 1 लाख से अधिक योग कार्यक्रम का आयोजन करेगा । इसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में कम से कम 200 से लेकर 100 योग कार्यक्रम जिले, तहसील एवं गावों में आयोजित करेगा। इन कार्यक्रमों की देख रेख के लिए योगाचार्य और कार्यकर्ताओं को कार्यभार सौंपा गया है।इनके आयोजन में समस्त पांचों संगठन पंतजलि योग समिति, पंतजलि महिला योग समिति, भारत स्वाभिमान, युवा भारत एवं किसान मंच मिलकर सहयोग करेंगे।
राजपथ में 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों के लिए योगगुरु बाबा रामदेव ने जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में एक विशाल प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है। 14 जून से बाबा रामदेव सुबह 5.30 बजे से 7.30 बजे तक लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस शिविर में पंतजलि योगपीठ के 5200 साधक हिस्सा लेंगे । पतंजलि योग पीठ ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को उत्साहपूर्वक मनाने के लिए बनाई गए विश्वस्तरीय कार्ययोजना के अंतर्गत इस शिविर का आयोजन किया है ।इस शिविर में दुनिया को योग के प्रति जागरुक करने के लिए और सही तरह से योग करने के लिए 21 जून को होने वाले 35 मिनट के योग प्रोटोकॉल का डिमोन्स्ट्रेशन एवं अभ्यास किया जाएगा। इस कार्ययोजना के अंतर्गत पंतजलि योगपीठ ने 1 लाख से अधिक योग कार्यक्रम का आयोजन करेगा । इसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में कम से कम 200 से लेकर 100 योग कार्यक्रम जिले, तहसील एवं गावों में आयोजित करेगा। इन कार्यक्रमों की देख रेख के लिए योगाचार्य और कार्यकर्ताओं को कार्यभार सौंपा गया है।इनके आयोजन में समस्त पांचों संगठन पंतजलि योग समिति, पंतजलि महिला योग समिति, भारत स्वाभिमान, युवा भारत एवं किसान मंच मिलकर सहयोग करेंगे।
शुक्रवार, 29 मई 2015
shimla himachal pradesh शिमला को सतर्क होने की जरूरत sunil k himachali
शिमला को सतर्क होने की जरूरत !
4 अप्रैल 1905 को
आया था प्रलयकारी भूकंप ,शिमला ले नेपाल भूकंप से सीख!,नेपाल में अब तक आए भूकंप के 204 झटके
चंडीगढ़ - सुनील
के. हिमाचली ( सहयोगी पत्रकार)
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 25 मई को
भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक ये झटके लगभग 10 सेकेंड तक आते रहे। जिसके
चलते वर्षों पुरानी याद भी ताज़ा हो गई है ,आपको
बता दें की 25 मई को
सोमवार दोपहर लगभग 1 बजकर 50 मिनट पर आए। प्राप्त जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र चंबा
के होली में था। रिक्टर पैमाने के अनुसार जिले में 3.3 तीव्रता
वाले झटके महसूस किए गए हैं।हालांकि ज्यादातर लोगों को ये झटके महसूस नहीं हुए
लेकिन बहुमंजिला भवनों में ठहरे लोगों में हड़कंप जरूर मच गया। गौरतलब है कि पिछले
दो महीने के दौरान नेपाल के साथ साथ हिमाचल में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए
हैं। हालांकि यहां किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। हिमाचल प्रदेश में आज से लगभग
एक सौ दस साल और एक महिना 20 दिन पहले कांगडा घाटी में 4 अप्रैल 1905 को आए भूकंप में
527 लोग मारे गए थे ,और हाल
ही में नेपाल आए प्रलयकारी भूकंप में लगभग 9 हज़ार से ज्यादा लोग मारे गए थे ,वहीँ अब हिमाचल में पहाड़ों की रानी
कहे जाने वाले शिमला पर भी प्राकृतिक आपदा खुदा –न खालसा आए लेकिन उसकी चिंता सताने लगी है ,क्योंकि
राजधानी शिमला
में बेतरतीब तरीके से बनी इमारतों और अतिक्रमणों पर संज्ञान लेते हुए राज्य उच्च
न्यायालय ने निर्माताओं को नेपाल में पिछले महीने आए विनाशकारी भूकंप से सीख लेने
के लिए कहा। न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यहां अधिकतर इमारतें ढलान
पर बनी हैं, जो बेहद खतरनाक हैं। न्यायालय ने कड़ी
टिप्पणी करते हुए कहा कि नेपाल का विनाशकारी भूकंप भी प्रशासन को नींद से नहीं जगा
पाया है कि वे शिमला में अवैध निर्माण पर रोक लगाएं, जिसकी
वजह से यह पहाड़ी क्षेत्र झुग्गी में तब्दील होता जा रहा है। नेपाल में 25 अप्रैल और 12 मई को आए विनाशकारी भूकंप के बाद से अबतक 204 झटके आ चुके हैं, जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने
पर 4 से ज्यादा मापी गई है। विनाशकारी
भूकंप में 8,000 लोगों की मौत हो चुकी है।गौरतलब है कि पिछले दो महीने के दौरान नेपाल के साथ साथ हिमाचल में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि यहां किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है।नेपाल में 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप के बाद बार-बार भूस्खलन हो रहा है। पिछले महीने आए 7.8 तीव्रता के भूकंप में नेपाल में आठ हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। वहीँ हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बेतरतीब तरीके से बनी इमारतों और अतिक्रमणों पर संज्ञान लेते हुए राज्य उच्च न्यायालय ने निर्माताओं को नेपाल में पिछले महीने आए विनाशकारी भूकंप से सीख लेने के लिए कहा। न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यहां अधिकतर इमारतें ढलान पर बनी हैं, जो बेहद खतरनाक हैं।
न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और
न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह सुनाए गए अपने 29 पृष्ठों के फैसले में कहा कि हालिया अध्ययनों ने इस बात के
संकेत किए गए हैं कि हिमाचल प्रदेश का अधिकतर हिस्सा भूंकप की दृष्टि से संवेदनशील
क्षेत्र-5 और बाकी हिस्सा क्षेत्र-4 में आते हैं।
लेकिन यह तथ्य भी शिमला में अधिकारियों को नींद से जगा नहीं पाया। पीठ ने शिमला के
बाजारों में हो रहे अतिक्रमण पर स्वत: संज्ञान में लेते हुए कहा कि भूकंप की आशंका
वाला क्षेत्र होने के कारण कभी ब्रिटिश राज की राजधानी रही शिमला में नेपाल जैसे
विनाश के खतरे को नहीं टाला जा सकता।
पीठ ने कहा कि अवैध निर्माण को वैध
नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही पूरे हिमालयी क्षेत्र में भूकंप की हालिया गतिविधियों
पर विचार करते हुए निर्माण संबंधी उपनियमों को संशोधित किया जाना चाहिए। न्यायालय
ने कहा कि अधिकतर इमारतें ढलान पर बनी हैं। उच्च तीव्रता वाला भूकंप इन घनी
बस्तियों और संकरे रास्तों के लिए घातक होगा। न्यायालय ने कहा कि बेढ़ंगे और अवैध निर्माण के कारण कभी सात खूबसूरत पहाडिय़ों
का नगर रहा यह शहर कंक्रीट के जंगल में तब्दील होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बात को नकारा
नहीं जा सकता कि बेतरतीब, अनियोजित और अवैध निर्माणों ने पहाड़ी इलाकों, खासतौर से राजधानी शिमला की खूबसूरती को नुकसान पहुंचाया
है। फिर प्रशासन इसे झुग्गी में परिवर्तित करने की अनुमति क्यों दे रहा है? न्यायालय ने शिमला नगर निगम को छह सप्ताह के भीतर सभी अवैध
परियोजनाओं को ध्वस्त करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि शिमला में न सिर्फ
बाजारों, बल्कि सार्वजनिक सड़कों पर भी अतिक्रमण है, जिससे आपातकालीन वाहनों को गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी
होती है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि बेढंगे
विकास और पर्यावरणीय ह्रास के बाद भी शिमला को यूनेस्को विशव धरोहर स्थल की सूची में
शामिल होने की उम्मीद है। लेकिन लेकिन क्या वर्तमान परिदृश्य में शहर को यह हैसियत
मिल सकती है? शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने आईएएनए (न्यूज़ एजेंसी) को
बताया कि सरकार कुछ सरकारी कार्यालयों को राजधानी से अलग आस-पास के क्षेत्रों में
ले जाकर, शहर की भीड़-भाड़ कम करने की कोशिश कर रही है।
गुरुवार, 28 मई 2015
akshar-e-dastaan by sunil k himachali
अज़मता है जमाना सब्र मेरा
बार-बार कर जिक्र तेरा
धुआं हुए है बेशक अरमान मेरे
राख होना बाकि है शाह ए शरीर मेरा
फर्क पड़ता नहीं अब खाक मुझे
हो चूका है जो हीरा दिल मेरा
रब तक कर इवादत
गर्त तक जाना है तय तेरा
अज़मता है जमाना सब्र मेरा
बार-बार कर जिक्र तेरा
बार-बार कर जिक्र तेरा
धुआं हुए है बेशक अरमान मेरे
राख होना बाकि है शाह ए शरीर मेरा
फर्क पड़ता नहीं अब खाक मुझे
हो चूका है जो हीरा दिल मेरा
रब तक कर इवादत
गर्त तक जाना है तय तेरा
अज़मता है जमाना सब्र मेरा
बार-बार कर जिक्र तेरा
गुरुवार, 21 मई 2015
DHARMSHALA GAING RAPE
देव भूमि बना दिल्ली
- बलात्कार – आज का विशेष समाचार
आए दिनों किसी भी
पन्ने पर किसी की सोशल नेट्वोर्किंग साइड पर पढ़ने को मिलता है वस् एक ही अध्याय –
बलात्कार – आज का विशेष समाचार .भूतकाल से लेकर वर्तमान तक और न जाने भविष्य में
भी और कितनी ऐसी घटनाए सामने आएंगी जो फिर से ‘निर्भया कांड’ का दर्द जगाएँगी .16
दिसम्बर 2012का निर्भया काण्ड या फिर मोगा बस कांड 25 अप्रैल 2015 की आग से चलने
वाली हवाओं की तपश कम हुई ही नहीं कि फिर से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में
गैंगरेप की ख़बरों ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया है .प्रशासन जहाँ चुपी साधे हुए है
वहीँ कुछ अलानेताओं को इस खबर की भनक तक नहीं थी. (सो रहे थे नेता-मस्ती में था
बेटा- देश की बेटी की इज्जत को तार-तार करके ,हवस का बना शिकार बाँहों में लपेटा)और
कुछके अधिकारीयों का यहाँ तक कहना भी है की ऐसा कोई कांड हुआ ही नहीं .अब ये घटना
सची है या झूठी उस लड़की के सामने आने पर ही ज्ञात होगा ,पर सवाल ये भी उठता है कि
प्रशासन के द्वारा उस लड़की के ब्यान को जनता के सामने क्यों नहीं लाया जाता है .वहीँ
कयास ये भी लगाए जा रहे है कि गैंगरेप के आरोपियों के सम्बन्ध राजनितिक घरानों से
होने के चलते मामले को दबाया जा रहा है .परन्तु ये कदापि उचित नहीं है ,जो भी
अधिकारी इस मामले को दबा रहे है क्या सिर्फ इसलिए की पीड़ित लड़की उनकी बेटी या बहन
नहीं थी या फिर उनके किसी रिश्तेदार की बेटी नहीं है ,बताया जाता है घटना शुक्रवार
15 मई 2015 की है लेकिन चार दिन तक मामले को दबाया गया ,यहाँ तक की समाचार पत्र की
सुर्ख़ियों से भी मिटाया गया .सोमवार तक सोशल मिडिया में आने के बाद मुद्दा उछालना
शुरू हुआ लेकिन अब भी किसी प्रकार का सरकार ,प्रशासन द्वारा उचित कदम नहीं उठाया
गया ,एस आई टी की गठित टीम जाँच कर रही है ,लेकिन संज्ञान में क्या है कुछ ज्ञात
नहीं ,हर प्रश्न धर्मशाला गैंग रेप के उपर पहेली सा बन गया है ,लेकिन जाहिर सी बात
है ( डर का दावानल हवस के प्यासों के भी सोने नहीं देता होगा ,हर चढ़ते सुरज से
डूबते चाँद तक उनको भी चिंता होगी अपने किए हुए की शमशान तक ).आज नही तो कल आरोपी
सलाखों के पीछे होंगे ,आखिर कब तक बकरे की माँ खैर मानेगी . आखिर में आरोपी पकडे
जाने पर यही कहेंगे - मैं अंग छूकर कहता हूँ साहब, मैने पाजेब नहीं देखी,,,,वैसे
भी अब मुदा सुलग उठा है धर्मशाला गैंगरेप के चलते एक बार फिर इतिहास दोहराया जाएगा
नहीं रचाया जाएगा क्योंकि इस बार भी युवा और विद्यार्थियो की शक्ति और उनकी एकता
,एक है .
लिखा जाएगा हिमाचल
प्रदेश का नया ‘राजनितिक कांड’
जिस तरह से दिल्ली
के बाद अब गैंगरेप का मामला हिमाचल प्रदेश के छोटे से शहर धर्मशाला में सामने आया
है ,ये मामला भी दिल्ली की राजनीती की तरह ‘तख्ता पलट’ करवा सकता है जिसमे निसंदेह
कोई संकोच नहीं है .क्यूंकि दिल्ली में 2012 की घटना के बाद ही राजनितिक गलियारों
से हवा ने रुख विपक्ष की और मोड़ लिया था ,और शायद ये भी प्रकृति का ही कोई संकते
था ,और धर्मशाला विश्वप्रसिद्घ होने के नाते इस तरह की घटना कलंकित करती है देव
भूमि हिमाचल की छवि को . और धर्मशाला गैंगरेप मामले में
आरोपियों के सर पर राजनीतीkक हाथ होने के कारण इस मामले की सुलग को दबाया जा रहा
था ,और जब आरोपी सामने आएँगे तब यही कहलाया जाएगा - गवाह मेरे भाई का मित्र निकला,
उसने उसे आँख मारी,
अन्यथा वह मेरे
विरुद्ध गवाही दे देता। वैसे सम्भव है यदि इस मामले को राजनीती उठापठक के बीच
बातों के आंकड़ो में आँका जाता है तब
भविष्य में हिमाचल प्रदेश की राजनीती में फेरबदल संभव है और उदहारण दिल्ली का आपके
समक्ष है .
बुधवार, 22 अप्रैल 2015
sunil k himachali
आज भी सवाल है
जहन में
आज भी ख्याल है
जहन में
तेरे आने से पहले का
तेरे जाने के बाद का
क्या हुआ कसूर
क्यूँ हुआ मजबूर
गलत मै कहाँ पर था
यहीं बता देते हजुर
आज भी सवाल है
जहन में
आज भी ख्याल है
जहन में
तेरे दिल में क्या
था ये तू जाने
या उस वक्त हम तुझे
नहीं पहचाने
बता दूँ तेरी विरह
को ... अभी .. मिटा नहीं ख़ाक में
जिन्दा हूँ वस् तेरे
आने की आस में
आज भी सवाल है
जहन में
आज भी ख्याल है
जहन में
उम्मीद है एक आश है
इन धुंधली सी आँखों
में लो
और दिल में थोड़ी सी
खटास है
तेरे रूह ए प्यार की
मिठास है ..
आज भी क्यूँ तेरे
पास होने का
उस बेरंग बेढंग
प्यार का एहसास है
आज भी क्यूँ तेरी
यादों में मेरा विश्वाश है
है जो यु जिंदगी
जिंदा दिल
आज भी सवाल है
जहन में
आज भी ख्याल है
जहन में
तेरे अपने पन का
तेरे ही शाकी दिए हर
गम
खुद ही खुदा बनकर
निश्चय कर लिया
सोचा भी नहीं तनिक
जीवन आंसुओं से भर
लिया
चल हम गर्त तक नहीं
गए
दिल से निकाल दे भय
अब करें शुरू
शुरुआत ए अंत की
चाहत नहीं दुरी की
अब भी यही पूछूँगा
तेरी क्या मज़बूरी
या ,,,, सिर्फ मेरी
सुनील करनी थी मशहूरी
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015
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