रविवार, 28 अगस्त 2016

ज़मीनी हक़ीक़त ..... तो कभी नहीं बदलेगी देश की दिशा और दशा ?

हर छोटा-बड़ा नेता और फिल्मो अभिनेता यही कहता कि हम देश की दिशा और दशा बदलेंगे। फ़िल्मी बातें तो काल्पनिक है लेकिन जो वास्तविक है वो समाज में सरेआम है। हर कोई भलीं भांति वाकिफ है की कौन क्या कर रहा है: लेकिन उस पर या तो हमारे ही होंठ बंद जाते है या  आंख और कान से हम अपँग हो जाते है. वर्तमान में भी कुछ है हर राजनितिक पार्टी देश को बदलने की बात कर  रही है। ये जूठ नहीं बदलाब हुआ है। इतना बदलाब हुआ है कोई  नेता कभी हाथ से मौका नहीं जाने देता विपक्ष को लपेटे में लेने से। लेकिन अब इन राजनितिक पार्टियों में एकता और अखण्डता की बात भी खत्म सी होने लगी है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की बात करें या पंजाब की दोनों ही राज्यों में वर्ष 2017 में चुनाव होने वाले है। जिसको लेकर हर पार्टी जनता को लुभाने में जुटी हुई है। इसी बीच पार्टियों की अंदरूनी कलह बाहर खुलकर आने लगी है। चाहे वो सपा के मुलायम सिंह यादव का तंज़ हो या फिर आप के सुच्चा सिंह छोटेपुर की खुद की अढाई साल की कहानी। दोनों से साफ़ है जिस परिवार के भीतर ही क्लेश है वो बाहर किसी को क्या सही दिशा दिखाएगा - किसी की क्या दशा सुधरेगा। बचपन में पढ़ा था कि जिस परिवार में कहल हो बुद्धिमान और विद्वान उस स्थान को ही छोड़ देते है। लेकिन हम कुछेक राजनेताओं के द्वारा भ्रष्ट किए हुए देश को नहीं छोड़ सकते। पर नेताओं और इनकी बनाई हुई नीतियों से जरूर मुह मोड़ सकते है। प्राथमिक शिक्षा  लेकर माध्यमिक तक सबने पढ़ा है बुरा मत देखोबुरा मत सुनो, बुरा मत  बोलो और अब बुरा पढ़ो भी क्योंकि इन नेतओं के द्वारा कभी कभी ऐसे बयान दिए जाते है की न्यूज़ में सुनना तो दूर न्यूज़ पेपर में पढ़ना भी सही नहीं -- (किस्सा याद गयागॉव की बात है अपनी पड़ोस में आंटी से अखबार मांगने गया तो उहोने मुझे काफी धरातल से जुड़ा हुआ बयान देते हुए कहा -: हमने अखबार लेना बंद कर दिया इतना अनाफ सनाफ़ होता है ,हर चौथे पेज़ पर तो लड़की से हुए गलत काम (बलात्कार) की खबर होती है। बच्चों के सामने और घर में हर कोई कहीं ना कहीं अखबार लेकर बैठा रहता था तो ऐसे में कैसे अखबार पढ़े और आजकल तो लीडर भी कुछ भी बोल देते है ऊपर से अखबार वाले भी बड़े बड़े अक्षरों में लिखते है - दूर से ही नज़र हो जाती है ,खबर तो तेरे अंकल को बोल कर मैंने अखबार ही बंद करवा दी )  - ये बात भी सच है - नेताओं के ब्यानों और उनके विचारों की तो हम रीस ही नहीं कर सकते है। साफ़ बात ये है की हर नेता आपस में एक  चरित्र पर कालख उछालने पर लगे रहते है। खुदा कसम:_- चाहे कश्मीर का मुददा हो या शहीद का प्रतिक्रियाओं में ही जंग शुरू हो जाती है। और किस्सा ख़त्म होता है सदन का वक़्त बर्बाद करके। जिस देश में देश के कर्ताधर्ता और उसके  साथियों नहीं पता की देश किस दिशा में है और देश की दशा क्या वो देश तरकी कैसे करेगा। सत्ता और विपक्ष को तो बयानों पर प्रतिक्रिया देने से ही वक़्त नही तो काम कैसे करेंगे , कौन करेगा। आपत्ति जनक टिपण्णियों से देश की जनता का पेट भरेगा। .




शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

गुड़गांव और मेवात जिले का नाम बदलने पर होगा काफी बदलाब

हरियाणा सरकार ने गुड़गांव और मेवात जिले का नाम बदलने का फैसला  2016 के  आर्थिक वार्षिक वर्ष की तीसरी तिमाही में  लिया गया । 12 अप्रैल मंगलवार को लिए गए फैसले के मुताबिक, अब गुड़गांव का नाम गुरुग्राम और मेवात का नूंह होगा। बीजेपी सरकार ने इसे लोगों की मांग बताया ।


                                                               क्यों जाना जाता है गुड़गांव?
- गुड़गांव, दिल्ली-एनसीआर में आता है। दिल्ली से सटे होने के कारण पिछले कुछ सालों में यहां काफी डेवलपमेंट हुआ है।
- गुड़गांव की पहचान नाॅर्थ इंडिया की साइबर सिटी के तौर पर भी है।
- कनेक्टिविटी और बिजनेस फ्रेंडली होने के चलते काॅरपोरेट्स कंपनियों की पहली पसंद दिल्ली के बाद गुड़गांव ही है।

                                                     गुड़गांव हरियाणा का इंडस्ट्रियल हब
 बता दें कि गुड़गांव हरियाणा का इंडस्ट्रियल हब है और यहां की आबादी करीब 70 लाख है,,,23 लाख से ज्यादा आबादी वाले गुड़गांव को मिलेनियम सिटी के नाम से भी जाना जाता है. गुड़गांव हरियाणा का आर्थिक केंद्र है. यहां पर मारुति सुजुकी का सबसे बड़ा प्लांट है. फॉर्च्यून 500 में शामिल 250 से ज्यादा कंपनियों का दफ्तर भी गुड़गांव में ही है. एक अनुमान के मुताबिक शहर में 1100 ऊंची रिहायशी इमारते हैं, जबकि 26 शॉपिंग मॉल हैं. आर्थिक केंद्र होने की वजह से गुड़गांव देश का तीसरा सबसे ज्यादा प्रतिव्यक्ति आय वाला शहर है.


                                                    महाभारत में मिलता है गुरुग्राम का जिक्र
- मौजूदा गुड़गांव का महाभारत में जिक्र मिलता है।
- बताया जाता है कि यहां गुरु द्रोणाचार्य स्टूडेंट्स को शिक्षा दिया करते थे।
- बीजेपी का कहना है कि लोग लंबे वक्त से चाहते थे कि गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम किया जाए।


                                                        मेवात जिले का नाम बदलकर नूह किया
मेवात दरअसल एक भौगोलिक और सांस्कृतिक इकाई है, न कि एक शहर। यह हरियाणा से बाहर पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ है।मेवात जिले का मुख्यालय नूह शहर है। इलाके के लोग और निर्वाचित प्रतिनिधि मांग कर रहे थे कि इसका नाम बदलकर नूह कर दिया जाए। 


                                                           कांग्रेस ने क्यों जताया एतराज?
- पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि मेवात का नाम नहीं बदला जाना चाहिए था।
- उन्होंने कहा कि 1857 की पहली फ्रीडम फाइट के दौरान ही मेवात जिले का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है।
- "मेवात के लोगों ने ही सबसे पहले अंग्रेज फौजों का डटकर मुकाबला किया था।"
- इससे पहले दूसरे नेताओं ने खट्टर सरकार पर आरएसएस के भगवा एजेंडे को आगे बढ़ाने के आरोप लगाए।
- हालांकि, हुड्डा ने गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम किए जाने के फैसले का स्वागत किया है।
- उन्होंने कहा कि पहले इसका नाम गुरुग्राम ही था जिसका महाभारत में भी जिक्र मिलता है।


                                             कांग्रेस का सवाल क्यों बदला मेवात का नाम...
- सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दोनों जिलों के नाम बदलने के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है।
- इस पर कांग्रेस ने बीजेपी पर आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
- वहीं, बीजेपी का कहना है कि गुड़गांव और मेवात जिलों के डीसी की तरफ से राज्य सरकार के पास इन जिलों के नाम बदलने के प्रपोजल आए थे।

                                                                   मंत्री ने क्या कहा?
- हरियाणा सरकार में मिनिस्टर अनिल विज के मुताबिक, लोकल लोगों की मांग पर काफी डिस्कशन के बाद दोनों जिलों के नाम बदले जाने की मंजूरी दी गई।
- सरकार ने कहा कि गुरुग्राम का जिक्र महाभारत में भी है। यहां गुरु द्रोणाचार्य कौरव और पांडवों को शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा दिया करते थे।
- बता दें कि इससे पहले भी हरियाणा सरकार यमुनानगर जिले के मुस्तफाबाद का नाम बदलकर सरस्वती नगर कर चुकी है।



                                                  गुड़गांव की पहचान एक ब्रांड के रूप में
पूरी दुनिया में गुड़गांव की पहचान एक ब्रांड के रूप में है। यह पहचान यहां निवेश के रूप में हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद मिली है। अब गुरुग्राम को गुड़गांव की तरह ब्रांड बनाने में आने वाले खर्च को लेकर विशेषज्ञों ने आकलन शुरू कर दिया है। आइटी क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने में कम से कम पांच हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा और दो से तीन साल तक लगातार मेहनत करनी होगी। 
अनुमान लगाया जा सकता है कि गुड़गांव को गुरुग्राम नाम से ब्रांड बनाने में कितना खर्च होगा। ठीक है कि अब ब्रांडिंग के लिए आइटी आधारित कार्य अधिक हो गए हैं, इस वजह से ब्रांड बनाने में अधिक समय नहीं लगेगा। इसके बावजूद प्रदीप का आकलन है कि इस काम में कम से कम पांच हजार करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।


                                                      हर एक जगह बदलना होगा नाम
गुड़गांव देश के भीतर एक ऐसी ग्लोबल सिटी है, जिसकी पहचान दुनिया के कोने-कोने में है और यहां मल्टीनेशनल कंपनियों की भरमार है। इन सभी को अपनी फाइलों में नाम बदलना होगा, सभी बोर्ड बदलने होंगे, गूगल में जाकर नाम बदलवाना होगा आदि। सबसे बड़ी बात यह है कि आज पूरी दुनिया के लोगों की जुबान पर गुड़गांव नाम चढ़ चुका है, यह स्थान जुबान पर गुरुग्राम को दिलाने के लिए विज्ञापन के ऊपर भी काफी खर्च करना होगा। गुड़गांव में आइटी, टेलीकॉम, आइटी इनेबल्ड एरिया से जुड़ी 2000 से अधिक कंपनियां हैं। इनमें से 600 कंपनियां मल्टीनेशनल हैं। मल्टीनेशनल कंपनियों में सबसे अधिक संख्या अमेरिकन कंपनियों की है। इसके अलावा जापान, कोरिया, कनाडा, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी एवं ऑस्ट्रेलिया सहित अधिकतर देशों की कंपनियां गुड़गांव में हैं। इसी तरह अन्य सेक्टरों की कंपनियां भी हैं। नया नाम बदलने के लिए सभी के ऊपर कुल मिलाकर बेकार में हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का दबाव आ जाएगा।


                         नाम बदलने की बजाय अंतरराष्ट्रीय संस्थान बना दें
 प्रदेश सरकार यदि गुरुग्राम शब्द को प्रचारित करना चाहती है तो इस नाम से कोई अंतरराष्ट्रीय संस्थान गुड़गांव में बना दे। ऐसा संस्थान बनाए कि पूरी दुनिया के लोग उसमें आने को मजबूर हो जाएं। यदि गुड़गांव में मल्टीनेशनल कंपनियां नहीं आती तो क्या इसका नाम पूरी दुनिया में होता।

गुरुवार, 28 जुलाई 2016

सिद्धू ने क्यों नहीं खोले पत्ते

नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को दिल्ली में 10 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस तो की, लेकिन वहां मौजूद मीडिया के लोगों की एक बात नहीं सुनी। वे बस बोलते गए। फिर उठकर चले गए। असल कहानी प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले शुरू हो गई थी।सूत्रों ने मुलाबिक प्रेस कंफ्रेसन वाले दिन 25 जुलाई की सुबह सिद्धू अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ ब्रेकफास्ट टेबल पर थे। सिद्धू का इसी महीने AAP ज्वाइन करना तय था। लेकिन केजरीवाल के बिजी होने के कारण यह टल गया। वहीं, सिद्धू ने बीजेपी के बारे में कुछ  दावे भी किए-
शेर--शायरी से इशारों में अकाली दल और बीजेपी पर हमला करते हुए काफी कुछ बोले-लेकिन बीजेपी छोड़ी या नहीं, आप में जाएंगे या नहीं, इस पर कुछ नहीं कहा। जब सिद्धू प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए तो उन्होंने 18 जुलाई को राज्यसभा मेंबरशिप से इस्तीफा देने को लेकर चुप्पी तोड़ी, लेकिन पत्ते नहीं खोले।

सिद्धू ने क्यों पत्ते नहीं खोले
- सूत्रों के मुताबिक, सिद्धू का 29 जुलाई को आप ज्वाइन करना तय था। इसी को लेकर संभवत: नाश्ते पर उनकी केजरीवाल और सिसाेदिया से बातचीत भी हुई। लेकिन 29 तारीख को ही बिक्रम मजीठिया के मानहानि के मामले में केजरीवाल को अमृतसर कोर्ट में पेश होना है।
- इसके बाद 30 जुलाई से दो हफ्ते के लिए केजरी छुट्टी पर जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो वे 12 अगस्त को लौटेंगे। ऐसे में, सिद्धू 13 अगस्त के बाद ही आप में शामिल हो सकते हैं।








डोपिंग टेस्ट

क्या है डोपिंग टेस्ट?
आम तौर पर एक खिलाड़ी का करियर छोटा होता है. अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में होने के समय ही ये खिलाड़ी अमीर और मशहूर हो सकते हैं. इसी जल्दबाजी और शॉर्टकट तरीके से मेडल पाने की भूख में कुछ खिलाड़ी अक्सर डोपिंग के जाल में फंस जाते हैं.
यह बीमारी केवल भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में फैली हुई है. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय खेल पंचाट ने डोपिंग को लेकर रूस की अपील खारिज कर दी, जिससे रूस की ट्रैक और फील्ड टीम रियो ओलंपिक में भाग नहीं ले सकेगी. यहां तक कि बीजिंग ओलंपिक 2008 के 23 पदक विजेताओं समेत 45 खिलाड़ी पॉजीटिव पाए गए. बीजिंग और लंदन ओलंपिक के नमूनों की दोबारा जांच में नाकाम रहे खिलाड़ियों की संख्या अब बढ़कर 98 हो गई है.
क्या है वाडा और नाडा?
किसी भी खिलाड़ी का डोप टेस्ट विश्व डोपिंग विरोधी संस्था (वाडा) या राष्ट्रीय डोपिंग विरोधी (नाडा) ले सकता है. अंतरराष्ट्रीय खेलों में ड्रग्स के बढ़ते चलन रोकने के लिए वाडा की स्थापना 10 नवंबर, 1999 को स्विट्जरलैंड के लुसेन शहर में की गई थी. इसी के बाद हर देश में नाडा की स्थापना की जाने लगी. इसके दोषियों को 2 साल सजा से लेकर आजीवन पाबंदी तक सजा का प्रावधान है.

डोपिंग का इतिहास
वैसे देखा जाए तो डोपिंग का इतिहास काफी पुराना है। 1904 ओलंपिक में सबसे पहले डोपिंग का मामला सामने आया था, लेकिन इस संबंध में प्रयास 1920 से शुरू हुए। शक्तिवर्धक दवाओं के इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ियों पर नकेल कसने के लिए सबसे पहला प्रयास अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ ने किया और 1928 में डोपिंग के नियम बनाए गए।
1968 ओलंपिक में पहली बार डोप टेस्ट अमल में लाया गया और धीरे-धीरे ऐसा करने वाले खिलाड़ियों पर शिकंजा कसना शुरु हो गया। लेकिन इस दिशा में बड़ा प्रयास उस वक्त हुआ जब 1998 में प्रतिष्ठित साईकिल रेस टू-डी-फ्रांस के दौरान खिलाड़ी डोप टेस्ट में असफल होते पाए गए। ऐसे में यह महसूस किया गया कि डोप टेस्ट को लेकर अभी तक प्रयास बहुत ही बौना साबित हुआ है। लिहाजा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने 1999 में विश्व एंटी डोपिंग संस्था (वाडा) की स्थापना की। इसके बाद प्रत्येक देश की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर डोपिंग रोधी संस्था ( नाडा) की स्थापना की जाने लगी।

 1968 में पहली बार हुई थी फजीहत
भारत में डोपिंग को लेकर बड़ा खुलासा 1968 के मेक्सिको ओलंपिक के ट्रायल के दौरान हुआ था, जब दिल्ली के रेलवे स्टेडियम में कृपाल सिंह 10 हजार मीटर दौड़ में भागते समय ट्रैक छोड़कर सीढ़ियों पर चढ़ गए थे. उस दौरान कृपाल सिंह के मुंह से झाग निकलने लगा था और वे बेहोश हो गए थे. जांच में पता चला कि कृपाल ने नशीले पदार्थ ले रखे थे, ताकि मेक्सिको ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर पाएं. इसके बाद तो फिर डोपिंग के कई मामले सामने आए.
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के नियमों के अनुसार डोपिंग के लिए खिलाड़ी और केवल खिलाड़ी ही जिम्मेदार होता है. डोपिंग में आने वाली दवाओं को पांच श्रेणियों में रखा गया है. ये हैं- स्टेरॉयड, पेप्टाइड हार्मोन, नार्कोटिक्स, डाइयूरेटिक्स और ब्लड डोपिंग.

कैसे लिया जाता है टेस्ट?

किसी भी खिलाड़ी का कभी भी डोप टेस्ट लिया जा सकता है. इसके लिए संबंधित फेडरेशन को जिम्मेदारी दी गई है. किसी प्रतियोगिता से पहले या प्रशिक्षण शिविर के दौरान डोप टेस्ट अक्सर लिए जाते हैं. ये टेस्ट नाडा या फिर वाडा की तरफ से कराए जाते हैं. वह खिलाड़ियों के मूत्र को वाडा नाडा के विशेष लेबोरेट्री में पहुंचाती है.

नाडा की लेबोरेट्री नई दिल्ली में है. '' टेस्ट में पॉजीटिव आने पर खिलाड़ी को बैन किया जा सकता है. यदि खिलाड़ी चाहे तो 'बी' टेस्ट के लिए एंटी डोपिंग पैनल में अपील कर सकता है. इसके बाद फिर नमूने की जांच होती है. यदि 'बी' टेस्ट भी पॉजीटिव आए तो अनुशासन पैनल खिलाड़ी पर पाबंदी लगा सकती है.

दोषी खिलाड़ी कर सकता है अपील
नाडा से मिली सजा के खिलाफ खिलाड़ी वाडा में अपील कर न्याय मांग सकता है। इतना ही नहीं खिलाड़ियों के खिलाफ किसी तरह अन्याय ना हो इसलिए विशेष खेल न्यायालय स्पोर्ट्स आर्बिटेशन कोर्ट भी बनाया गया है, जो सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है।


बुधवार, 8 जून 2016

उड़ता पंजाब पर सियासी जंग, प्रमाणन बोर्ड भी तंग

उड़ता पंजाब पर सियासी जंग, प्रमाणन बोर्ड भी तंग 

शाहिद कपूर की अपकमिंग मूवी 'उड़ता पंजाब' पर विवाद थमता नहीं दिख रहा है। फिल्म के प्रोडयूसर अनुराग कश्यप के एक कमेंट पर मोदी सरकार के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा- "आपको लगता है कि आप नॉर्थ कोरिया में हैं? यहां वोट ले लेते हैं, डेमोक्रेसी है।" सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन की रिवाइजिंग कमेटी ने इस मूवी से 89 सीन हटाने को कहा है। फिल्म 17 जून को रिलीज होनी है। पर अब चर्चा है कि 5 जुलाई को होगी।
फिल्म पर विवाद क्यों...
- आशंका जताई जा रही है कि इस फिल्म का असर 2017 के पंजाब असेंबली इलेक्शन पर हो सकता है।
- कई पार्टियां ड्रग्स को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। दरअसल, फिल्म के क्लाइमेक्स में एक लोकल नेता चुनाव जीतने के लिए अपने मेनिफेस्टो के साथ ड्रग्स के पैकेट बांटता है।
- ड्रग्स को किस तरह दो-तीन प्रोडक्ट्स के साथ मिलाकर बनाते हैं और फैक्ट्री में यह कैसे बनती है, इसकी पूरी डिटेल फिल्म में है। यह भी बताया गया है कि किस तरह से फैक्ट्री ऑपरेट हो रही है।
- फिल्म में शाहिद कपूर ड्रग एडिक्ट पॉप सिंगर बने हैं और अपने गानों में ड्रग्स के बारे में बताते हैं।
- वे कहते हैं कि सभी को ड्रग्स लेनी चाहिए। फिल्म में आलिया भट्ट भी ड्रग एडिक्ट के कैरेक्टर में हैं।
पंजाब में ड्रग्स के आंकड़े
- इस साल जनवरी से अब तक 134 किलो हेरोइन पकड़ी गई।
- इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत एक करोड़ रुपए/ किलो है।
- पिछले पांच साल में 8400 किलो अफीम पकड़ी गई है। कीमत 60 हजार से लेकर 1.20 लाख रुपए/ किलो ।
- 1500 किलो अफीम डोडा चूरा (पोस्त) पकड़ा गया है।
फिल्म मेकर अनुराग के ट्वीट पर मोदी के मंत्री का जवाब
- राठौड़ ने कहा- "आपको लगता है कि आप नॉर्थ कोरिया में हैं? यहां वोट ले लेते हैं, डेमोक्रेसी है।" बता दें कि यह जवाब उन्होंने फिल्ममेकर अनुराग कश्यप के नॉर्थ कोरिया में रहने वाले बयान पर दिया था।
- "जो भी फिल्ममेकर बोर्ड के फैसले से सहमत नहीं है, वह रिवाइजिंग कमेटी के या ट्रिब्यूनल के पास जा सकता है।"
- "पिछले पांच महीनों में कई फिल्ममेकर्स सीबीएफसी के फैसले से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने ट्रिब्यूनल में अपील की और बाद में सैटिसफाई भी हुए।"
- "अगर कुछ ऐसा है तो आप भी अपील कर सकते हैं।"
अभी तक क्या हुआ?
- पंजाब में आगामी इलेक्शन को देखते हुए मंगलवार को अरविंद केजरीवाल से लेकर राहुल गांधी तक ने बयान दिए।
- बता दें कि सेंसर बोर्ड इस फिल्म से 'पंजाब' शब्द हटाना चाहता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बाद #UdtaPolitics ट्रेन्ड करने लगा है।
- अनुराग कश्यप के नॉर्थ कोरिया वाले बयान का केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा- "मैं आपसे सहमत हूं।"
- वहीं राहुल गांधी ने कहा- "पंजाब में ड्रग की प्रॉब्लम है। मूवी को सेंसर करने से खत्म नहीं होगी। इसके लिए हमेंं हल खोजना होगा।"
- बाद में कश्यप ने ट्वीट कर कहा, ''मैं कांग्रेस, AAP और दूसरी पॉलिटिकल पार्टियों से कहना चाहता हूं कि वे इस लड़ाई से दूर रहें।"
- "ये मेरे अधिकारों और सेंसरशिप के बीच का मामला है। मेरी लड़ाई सेंसर बोर्ड में बैठे एक तानाशाह आदमी से है। ये मेरा नॉर्थ कोरिया है।"
- "बाकी लोग अपनी-अपनी लड़ाई लड़ें, मैं अपनी लड़ाई लड़ लूंगा।"
सेंसर बोर्ड को क्या आपत्ति है?
- सेंसर बोर्ड को मूवी के डॉयलाग्स पर आपत्ति है, जिसमें गालियों का इस्तेमाल किया गया है।
- वहीं, कुछ दिन पहले ट्रिब्यूनल ने फिल्म को सर्टिफिकेट दिए बिना वापस रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा था और अब खबर है कि फिल्म से 'पंजाब' शब्द हटाने की सलाह निर्माताओं को दी गई है।
- बोर्ड का मानना है कि यह फिल्म युवाओं को गलत दिशा दिखा रही है।
केंद्र सरकार का क्या कहना है?
- उधर, केंद्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि सेंसर बोर्ड का काम सार्टिफिकेट देने का है, उस पर प्रतिबंध लगाने का नहीं।
- केंद्र सरकार कहना है कि इस विवाद से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
- सेंसर बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि 'उड़ता पंजाब' के 6-7 दर्जन दृश्यों या डायलॉग को लेकर रिव्यू कमेटी ने फिल्म के निर्माता को अवगत कराया है। हालांकि, अभी तक नोटिस जारी नहीं किया गया है।
- पंजाब के डिप्टी सीएम और होम मिनिस्टर सुखबीर बादल के मुताबिक, "पंजाब बॉर्डर स्टेट है, जहां पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारी मात्रा में ड्रग्स आती है। पंजाब से होकर ये पूरे देश में पहुंचती है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ के सतर्क होने के कारण ये ड्रग्स यहां से पकड़ी जाती है। बदनामी पंजाब की होती है।"

बॉलीवुड हुआ सेंसर बोर्ड के खिलाफ
# महेश भट्ट ने कहा है- "ये आजादी चाहने वालों की ड्यूटी है कि उड़ता पंजाब के लिए लड़ेंं। फिल्म में दिखाया गया है कि किस कदर युवा सिंथेटिक और अन्य नशों में डूबकर जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।"
# करण जौहर के मुताबिक- "उड़ता पंजाब हमारे दौर की सच्चाई बयान करती है। सच्चाई को सेंसर करना भुलावे जैसा है। सही के साथ खड़े रहना होगा।"
# डायरेक्टर सुधीर मिश्रा कहते हैं- "किसी फिल्म को सेंसर नहीं किया जाना चाहिए। सिर्फ सर्टिफिकेट देना चाहिए। उसे बनाने में बहुत पसीना बहाना पड़ता है। लेकिन इसका जवाब और बेहतर फिल्में बनाना है।"
# हंसल मेहता ने कहा- "मुझे बहुत बहुत गुस्सा आ रहा है। क्या सच्चाई प्रदेश की छवि बिगाड़ सकती है? उड़ता पंजाब पर सेंसर भ्रम है या मिली-भगत, सरकार सच्चाई दिखाने वाली फिल्मों से इतनी डरती क्यों है, उड़ता पंजाब सेंसर्ड।"
# रणबीर शौरी के मुताबिक- "प्रिय पीएमओ इंडिया, सीबीएफसी द्वारा लगातार फिल्म जगत को ब्लैकमेल किए जाने पर रोक लगाएं। फिल्मों से भारत को दिक्कत नहीं हो रही है।"



DUBTA PUNJAB: एक साल में 17 हजार से ज्यादा NDPS एक्ट में हुए गिरफ्तार
  'फिल्म उड़ता पंजाब' पंजाब के असली हालात पर बनी है या नहीं, ये तो रिलीज होने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अंग्रेजी प्रिंट मीडिया में छपी एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट होश फाख्ता करने वाली है, जिसके मुताबिक, पंजाब में 2014 में 17068 और 2015 दिसंबर तक 11593 ड्रग एडक्टिस हिरासत में लिए थे।

 एक ही गांव के 47 लोग NDPS एक्ट के तहत अंदर...
दस परिवारों के 47 लोग एडिक्टिस
-मीडिया में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कपूरथला के गांव बूट का हवाला दिया गया है जिसमें 47 ड्रग एडिक्टिस पर NDPS एक्ट के तहत 2014 में मामले दर्ज हुए थे।
-अकेले बूट गांव में दस परिवारों के 47 सदस्य नशे के साथ गिरफ्तार किए गए थे, जो अभी तक या तो जेल में ही हैं, या फिर जमानत पर छूट गए हैं।
6598 FIR की आरटीआई से जानकारी...
-यह मीडिया रिपोर्ट को आरटीआई के तहत ली गई 6598 एफआईआर पर आधारित हैं।
-इस रिपोर्ट को आठ महीने की लंबी इनवेस्टिगेशन के बाद प्रकाशित किया गया है।
-हिरासत में लिए गए 42.4 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनके पास से 5 ग्राम और इससे कम हेरोइन, 100 ग्राम और इससे कम इनटोक्सिकेटिड पाउडर या 50 ग्राम अफीम पकड़ी गई थी।
फिल्म 'उड़ता पंजाब' पर सियासत...
-बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर की फिल्म 'उड़ता पंजाब' पर रिलीज होने से पहले सियासी घामासान छिड़ा हुआ है।
-पंजाब में नशाखोरी के हालात पर बनी इस फिल्म से सेंसर बोर्ड ने कई सीन कट करने लिए कहा है और अपील ट्रिब्यूनल ने तो फिल्म से पंजाब शब्द तक हटाने के आदेश दे डाले हैं।

बुधवार, 18 मई 2016

वाक्य में अँधा होता है प्यार ?



कभी बॉलीवुड की रंगीन फ़िल्म में सुना था कि प्यार अँधा होता है। लेकिन उस डायलॉग की समझ  आज कहीं जाकर आई है। जब समाज में प्यार के करिंदों और परिंदों दोनों को प्यार करते देखा। किसी का सच- किसी का जूठा - किसी का टालमटोल वाला तो किसी का दिल बहलाने वाला और सच में जो सच्चा प्यार देखा वो था मतलब निकालने वाला और बिल्कुल मतलबी। शायदा इन्हीं के बीच का एक अंश है - वाक्य में प्यार अँधा होता है।  क्यूंकि वर्तमान में जो समाज की क्रमबध घटनाएं सामने आ रही है उनसे तो शत प्रतिशत यही अंदाज़ा लगाया जा  सकता  है कि प्यार की कोई उम्र  तो नहीं होती लेकिन उस जब उम्र ने पढ़ाव प्यार करने की दहलिज से बाहर रख दिया हो तो सही भी नहीं लगता - एक २३ साल की लड़की के ३३ साल के लडके से प्रेम संबंध। सही उस लड़की ने क्या देख कर उस लड़के से नाता जोड़ा होगा। या शादीशुदा  महिला  प्रेमी संग भागी। और  २ बच्चों की माँ ने किया प्रेमी के साथ मिलकर पति  हत्या, कुछ ऐसी ही ख़बरें भी अक्सर समाचार पत्र की सुर्खियां बनी रहती है।तब भी आप स्वंय जान सकते हो कि  वाक्य में अँधा होता है प्यार ! 

गर्लफ्रेंड ही होती है लवर , बॉयफ्रेंड हमारा प्रेमी?

गर्लफ्रेंड ही  होती है लवर , बॉयफ्रेंड हमारा प्रेमी?

जब मैंने खुद इस विषय में प्यार करने वाले युवाओं से बातचीत की और उनकी दिल की गहराइयों को समझा तो कुछेक का यही कहना वस हो गया तो कैसे हुआ ये नहीं पता हाँ भविष्य में क्या होगा ये कुछ तय नहीं हाँ जो चल रहा है जैसे चल रहा है सही है - लेकिन इस दौरान मुझे एक और बात ज्ञात हुई कि गर्लफ्रेंड और लवर दोनों को समाज में एक ही रूप में देखा जाता है।आज अगर लड़का और लड़की एक अच्छे दोस्त है तो उसे दोस्त नहीं प्रेमी जोड़ा पुकारा जाता है। इतना ही नहीं कुछ एक ऐसे भी है जो दोस्त भी नहीं लेकिन दोस्त से बढ़कर लेकिन प्रेमी भी नहीं  .. कुछेक ने जब उदाहरण सुने तब चकित हो गया - युवाओं का यही मनना  है कि श्रीकृष्ण जी की राधा जी प्रेमिका है और उनकी पत्नी भी है - लेकिन ताजुब हुआ कि  किसी को ये नहीं पता की राधा जी सिर्फ भगवन श्रीकृष्ण जी की सखी है।