रविवार, 31 दिसंबर 2017

पंजाब 2017- 10 महीने में भी सरकार पर कई सवाल, कैसा रहेगा साल


कहते है कि पीछे मुडकर नहीं देखना चाहिए लेकिन साधारण मनुष्य़ हैं,  देखते ही है, लेकिन हल नहीं मिल पाता क्यों देखते हैं,- बीती बाते बीत चूकी होती है,  जिनका आगे कुछ नहीं किया जा सकता. लेकिन सीख तो छीपी होती है हर एक बात में-  और बीत रहे 2017 के कुछ पल ऐसे भी हैं- लेकिन कुछ ऐसी बाते होती है, जिन्हे बार-बार हवा लगती ही रहती है, कुछ ऐसे वादे होते हैं- जो जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं, औऱ ऐसा ही राजनीति में भी होता है, जब साल 2017 की शुरुआत हुई तो उस वक्त पंजाब विधानसभा चुनवों का दौर था., उस वक्त अच्छे दिन आएंगे, वाक्य भी खूब बोला जाता था, लेकिन पंजाब में कांग्रेस के अच्छे दिन आ गए., पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी और फिर निगम चुनावों तक कांग्रेस विजच हासिल करती चली गई, औऱ अब टारगेट 2019 का भी है.-


साल 2017 की शानदार शुरुआत

पंजाब में कांग्रेस का परचम

2017 की जीत ने जगाई 2019 के लिए उम्मीद

पंजाब में साल 2017 की शुरुआत विधानसभा  चुनाव के साथ सर्द मौसम के बीच चुनावी सरगर्मी से साथ हुई . औऱ साल 2017 पंजाब कांग्रेस के लिए अच्छे दिन लेकर आया। पंजाब में हुई जीत ने एक बार फिर कांग्रेस में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उम्मीद जगा दी, क्योंकि इससे पहले 3 राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के कारण कांग्रेस की स्थिति डगमगा गई थी। कांग्रेस ने जहां विधानसभा चुनाव में 10 साल बाद सत्‍ता में वापसी की. वहीं निकाय चुनाव में जालंधर,पटियाला और अमृतसर तीनों निगमों पर धाक जमाई।  कांग्रेस ने विधानसभा की 77 सीटें जीती जबकि 20 सीटों के साथ आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर और शिरोमणी अकाली दल 15 और भाजपा 3 सीटों तक ही सिमट कर रह गई।  कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने पटियाला सीट से तो चुनाव जीता ही । वहीं, लंबी सीट से पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से कड़ा मुकाबला किया। बादल को 66,375 वोट मिले जबकि कैप्टन ने 43,605 वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे। 

गुरदासपुर उपचुनाव में जाखड़ रहे विजयी
कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बीजेपी-अकाली गठजोड़ के उम्मीदवार स्वर्ण सलारिया को 1.93 लाख वोटों से शिकस्त दी। जाखड़ के पक्ष में 4,99,752 वोट पड़े और उनके सबसे क़रीबी उम्मीदवार रहे स्वर्ण सलारिया को 3,06,533 वोट मिले। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मेजर जनरल सुरेश कथूरिया के पक्ष में महज 23,579 वोट ही मिले। अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद विनोद खन्ना के निधन के कारण पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट पर ये उपचुनाव कराए गए थे।

उपचुनाव में केवल 56 फीसदी वोटिंग हुई। नतीजों से साफ हुआ कि सात महीने पुरानी कांग्रेस की सरकार के खिलाफ लोगों में कोई बड़ी नाराजगी नहीं थी।  बीजेपी और अकालियों की तुलना में कांग्रेस लोगों के सामने ज्यादा एकजुट और संगठित नजर आई। 

पंजाब निकाय चुनावों में भी सत्‍ताधारी कांग्रेस को कामयाबी मिली।  कांग्रेस ने विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी का सूपड़ा साफ कर दिया। विपक्षी दलों को एक भी निकाय में जीत नहीं मिली। आम आदमी पार्टी को तो एक भी सीट नहीं मिली। तीन नगर निगमों और 29 नगर परिषदों व नगर पंचायतों के लिए 17 दिसंबर को वोट डाले गए थे। कांग्रेस ने अमृतसर, जालंधर और पटियाला नगर निगम में एकतरफा जीत दर्ज की। जालंधर में उसे 80 वार्डों में से 65 और पटियाला में 60 में से 59  और अमृतसर में 85 में से 64 वार्डों पर परचम लहराया।
न्यूज डेस्क रिपोर्ट लिविंग इंडिया न्यूज


सियासी महौल तो आपने देख ही लिया लेकिन सियासत के बीच सत्ता मे आने के लिए पंजाब की कैप्टन सरकार ने कई वायदे भी किए, बाते-वादे भुलाए नहीं भूले जाते- जनता को याद रहे न रहे, लेकिन विपक्ष हमेशा याद रखता है, पंजाब सरकार सत्ता में आई और सैंकड़ो वादे किए- क्या-क्या वादे थे- अगर सरकार के मंत्री एक दो भूल भी जाएं तो विपक्ष वक्त-वक्त पर सरकार को याद दिलाता रहता है. औऱ उसके लिए सदन में भी जनता के हक के लिए हंगामा करता रहता है,

बदली सरकार, बदला मिजाज
पंजाब असेंबली में धक्कामुक्की
दो विधायक बेहोश
उतर गई थी दस्तारें

22 जून को विधानसभा का सत्र जारी था , यूं तो विपक्ष पर हंगामा करने का आरोप लगता ही रहता है, लेकिन 22 जून को जारी विधान सत्र के दौरान खूब हंगामा हुआ. विधानसभा में पहली बार मार्शल से धक्कामुक्की के दौरान महिला विधायक की बाजू में चोटें आई इस दौरान दो विधायक बेहोश भी हो गए, वहीं 5 विधायकों की दस्तारें भी उतर गई.

वादा तेरा वादा...

कैप्टन सरकार ने अपने कितने वादे किए पूरे ?

पंजाब में सत्‍तासीन हुए कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्‍व वाली कैबिनेट की पहली बैठक में कई महत्‍वपूर्ण फैसले किए गए थे। कैबिनेट ने अपनी पहली ही बैठक में नशा पर हमला किया। और जल्द खात्मे की बात कही थी,  कैप्टन सरकार ने कई मसलों से ज्यादा पर चुनाव लड़ा था.
10 महीने की सरकार ने 10 वादे भी नहीं किए पूरे
1.   
                किसान कर्ज फाफी
2.       युवाओं को 2500 रुपए महीना बेरोजगारी भत्ता
3.       30 लाख स्मार्ट फोन
4.       फसल का 12 हजार रुपए/एकड़ मुआवजा
5.       12वीं तक की फ्री बुक्स
6.       सरकारी प्राईमरी स्कूलों में फर्नीचर
7.       हेल्थ इंशयोरेंस
8.       छठा वेतन आयोग
9.       सस्ती चाय पती-चीनी
         इंडस्ट्री को 5 रुपए प्रति यूनिट बिजली

क्या हुआ तेरा वादा

पंजाब सरकार को सत्ता में आए 10 महीने हो गए हैं. लेकिन सत्ता में 10 साल बाद सरकार को शायद जीत हाजम नहीं हो रही है..और अब तक 10 वादे भी पूरे नहीं कर पाई है.

नशे को खत्म करने की कसम का सच !
कैप्टन सरकार की 4 हफ्ते की सियासी कसम !
न नशा खत्म हुआ और न ही नशे की लत !
नशे के खात्मे के लिए बनी STF!

सबसे बड़ा मुद्दा सरकार बनने के बाद नशा का खात्मा करने का रहा. सरकार ने नशे के खात्मे के लिए STF बनाई, लेकिन छत्तीसगढ़ से पंजाब में नशे का खात्मा करने आए हरप्रीत सिहं भी, नशे पर रोक न लगा पाए.

कर्ज होगा कब माफ!

नए साल में कर्ज माफी किस्त देने की कही है बात

किसान परेशान, दे रहा जान!

पंजाब सरकार ने किसान कर्ज माफी की बात कही लेकिन सिर्फ चर्चाएं ही आई, पंजाब का अन्नदाता उम्मीद के सहारे बैठा रहा कि आज नहीं कल कर्ज माफ होगा, उम्मीद के सहारे दिन महीनों में बदल गए लेकिन अब साल बाद कर्ज माफी करने की बात पंजाब सरकार की और से कही गई है. पंजाब वित्त मंत्री की माने तो नए साल में किसान कर्ज माफी की किस्त जारी की जा सकती है. सरकार  के कर्ज माफी जैसे- जैसे दिन बढ़ते गए , वैसे-वैसे पंजाब में किसान खुदकुशियों का आंकड़ा भी बढ़ता चला गया.

अभी ये हाल

343 किसान खुदकुशी कर चुके हैं 9 महीने मेः विपक्ष

नवंबर में खुदकुशी करने वाले किसान 289 बताए गए थे

कैप्टन सरकार का दावा है कि 100 किसाने ने खुदकुशी की थी

10.25 लाख किसानों के फसली कर्ज के लिए 9500 रुपए माफ होने हैं

हाल किसानों का बेहाल है- और किसानों कर्ज से परेशान होकर जान दे रहा है. फसल की पैदावार कम हो रही है, अक्सर किसान बिजली के मसले को लेकर भी कहता है कि बिजली के कट ज्यादा लगने से फसल को पानी नहीं मिल पता जिस कारण धान की फसल की पैदावार में कमी आ जाती है. बिजली के कटों से परेशान किसान घर- और आंगन में तो अंधेरा होता ही है, देखते ही देखते कर्ज उसकी जिंदगी में भी अंधेरा ला देता है , और किसान की आंखों को कालरुपी कर्ज हमेशा के लिए बंद कर देता है. जो पीड़ित किसान परिवार के अंधेरे के आगोष में भेज देता है,क्योंकि सरकार उद्योगपतियों की बहाली के लिए बिजली की दरों में कमी करने के लिए प्रयत्नशील है,

घरेलू बिजली महंगी करने की वजह क्या ?
क्या चुनावी वादों की पूर्ति के लिए डाला जनता पर बोझ ?
थर्मल प्लांट बंद करने से होगा फायदा ?
बिजली महकमे से राणा गुरजीत के कितने हित जुड़े ?
माइनिंग मामले में क्यों विरोधियों के निशाने पर राणा गुरजीत ?

पंजाब सरकार उद्योगपतियों की बहाली के लिए लगातार प्रयासरत है,  9 महीने से पंजाब में उद्योगों की राह बनाने के लिए पंजाब सरकार जुटी हुई है, उद्योगपतियों को पंजाब सरकार 5 रुपए प्रति यूनिट बिजली की दर से देना चाहती है, लेकिन एक कहावत है. 9 दिन अढाई कोस दूर – यानि सरकार प्लान तो बहुत कर रही है, लेकिन बात –बात पर आर्थिक हालात ठीक न होने का राग आलाप देती है.

पंजाब सरकार के खजाने में नहीं है माल !
3 साल, ऐसा ही रहेगा हाल !

पंजाब में अगले तीन साल ऐसे ही गुजरेंगे जैसे गुजर रहे हैं यानी कि मंदहाली और गुरर्बत के जो दिन पंजाब सरकार के बीत रहे हैं वैसे ही अगले 3 साल भी बीतेंगे..ये हम नहीं बल्कि खुद पंजाब के खज़ाना मंत्री मनप्रीत सिंह बादल कह रहे हैं,...

दरअसल, मनप्रीत बादल पंजाब कैबिनेट की मीटिंग के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दे रहे थे....इसी दौरान जब उनसे पूछा गया कि सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पा रही है...किसान कर्जमाफी की पहली ही किश्त जारी होने में तारीख मिलती जा रही हैं....युवाओं को स्मार्टफोन जैसे तमाम वादे हैं जो पूरे नहीं हो पा रहे हैं तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पंजाब के अगले 3 साल ऐसा ही बीतेंगे क्योंकि हमारी माली हालत ठीक नहीं है..

 पंजाब के खज़ाना मंत्री मनप्रीत बादल ने खजाना खाली होने का हवाला देते हुए जब ये ज़ाहिर कर दिया कि अब अगले तीन साल तक उनसे ऐसा कोई सवाल न पूछा जाए तो हमने पंजाब के कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत से सवाल पूछा तो वो भी कुछ कुछ यही कहते नज़र आए...

हालांकि कांग्रेस विधायक राजकुमार वेरका ने भी बात यो लगभग यही कही लेकिन उनका लहज़ा थोड़ा सा दुहाई वाला था..अब बड़ा सवाल यहां पर ये उठता है कि अगर पंजाब की माली हालत ठीक नहीं है और अगले 3 साल ऐसा ही हाल रहने वाला है तो इसमें गौर करने वाली बात ये है कि सरकार अपने वादे कैसे पूरे करेगी जो सत्ता में आने से पहले किए गए थे...मसलन

किसान की पूर्णरूप से कर्जमाफी
युवाओं को स्मार्टफोन
बेरोजगार युवाओं को 2500 रुपए बेरोज़गारी भत्ता
बेघर दलितों को मुफ्त में आवास मुहैया कराने का वादा
ओलंपिक के गोल्ड विनर को 6 करोड़ रुपए दिए जाएंगे

ऐसे और भी कई वादे हैं जो कि बिना पैसों के पूरे नहीं किए जा सकते....अब तय सरकार को करना है कि प्रदेश की जनता को माली हालत का हवाला देकर समय काटने को कहना है या फिर अपने ही किए गए वादों को पूरा करना है...
न्यूज डेस्क रिपोर्ट लिविंग इंडिया न्यूज

लालबत्‍ती संस्‍कृति खत्‍म
कैबिनेट ने राज्‍य में वीआइपी कल्‍चर भी खत्‍म करने का भी फैसला किया। इसके तहत मुख्‍यमंत्री, मंत्री और नौकरशाह लाल या अन्‍य रंग की बत्‍ती लगी गाड़ी का इस्‍तेमाल नहीं करेंगे।


रविवार, 24 दिसंबर 2017

बिना मुछ वाले सीएम की रीत बरकरार



हिमाचली में एक कहावत है, 'जालु आई मुछ फिर अपणी ठुक' कुछ ऐसा हुई है अबकी बार भी हिमचाल में- देवभूमि के दंगल में कई दिग्गज थे. लेकिन चुनाव से पहले हिमाचली टोपी को लेकर घमासान मचा हुआ था और चुनाव के बाद मुछ वाले सीएम को लेकर- बहरहाल अब हिमाचल के सिर का ताज के लिए मोर्चा एक बार फिर से बिना मुछ वाला मार गया है।  1952 से अब तक हिमाचल के जितने भी सीएम रहे सभी बिना मुछ के थे।  लेकिन पेंच उस वक्त फसा जब प्रेम कुमार धूमल को मात मिली ,जिसके बाद भाजपा केंद्र तक चिन्तन में थी - कि किसको हिमाचल में सीएम बनाया जाए।  चर्चाओं और चिंतन का दौर जारी था, और अब जय राम ठाकुर को सीएम का पद भाजपा की तरफ से देने  एलान कर दिया है। होता भी क्यों न मंडी से 9 विधायक भाजपा  के खाते में आए है , और यह सब जयराम ठाकुर की बदौलत  ही है , चाहे उसके पीछे अब जो भी हो।  लेकिन गौर हो की जब भाजपा ने जब मंडी में रैली की थी  तब अमित शाह ने जयराम ठाकुर का ओहदा बढ़ाने की बात कही थी।  और अब  अपने कहे पर शाह ने सच  दिया है. लेकिन अब शायद भाजपा में भी अंदर ही अंदर कार्यकर्ता कहीं न कहीं मायूस है , मायूस तो उस दिन भी थे जब धूमल की नैया पार न लग पाई थी।  लेकिन फिर उम्मीद थी कि शायद हारे हुए सैनिक को कमान फिर से सौप दे भाजपा ,. लेकिन  ऐसा हुआ नहीं -2019 को मूल आधार मानते हुए भाजपा ने कमान कहीं और  सौंप दी।  अगर कार्यकर्ताओं के हाल ए दिल की बात की जाए तो उन्हें अंदर ही अंदर दुःख तो है कि सीएम की कमान धूमल को न मिल पाई ,. लिहाजा अब देखना होगा कि सीएम जयराम अब  धूमल साहब के कितना करीब आते और कौन सी हिमाचल की भागदौड़ सौंपते है। 
वैसे कांग्रेस भी अबके वर्ष पिछले साल को शायद याद करना भूल गई हो। कि इसी महीने 25 दिसंबर को वो अपनी हिमाचल सरकार के चार  साल का जश्न धर्मशाला में मना रही थी । लेकिन अबकी सर्द हवा ने कांग्रेस की आँखों में से आंसू निकाल हैं. पर क्रिसमस का सेंटा भाजपा की झोली में जयराम देकर  गया है।

रविवार, 22 अक्टूबर 2017

लिखे हुए लिंक पर क्लिक करना जरुरी है क्या !

लिखे हुए लिंक पर  क्लिक करना जरुरी है क्या !

हर्वी ने तो हिला दिया है रे बाबा! अब #metoo पर रोज नया किस्सा पढ़ने को मिलता है। जो आइडिया पता नहीं भी होगा अब उसका भी यहां ज्ञान मिलता है. अच्छा है लेकिन सच्चा है , कोई अपना दर्दे हाल बयान करता है।  कोई इसे जोक्स समझाता है।  #metoo में जो भी है मस्त है, क्यूंकि जनता आजकल ऐसा ही कुछ पढ़ने में व्यस्त है।  काफी न्यूज़ पेपर को अब नया लुक मिल गया है , पहले सिर्फ हैडर ही न्यूज़ का कैची और सेक्सी सा होता था।  लेकिन अब #metoo ने नया ट्रेंड सोशल मिडिया में ला दिया है।  कोई लड़की अपना हाल #metoo के जरिए ब्यान करती है और जनता मस्त होकर चाय की चुस्कियों के साथ -मशाला लगाकर इसे रीड करती है। 
खैर हाल-ए-दिल कोई क्या जाने -जिसको दर्द है, वही इस दर्द को समझ सकता है।  हर्वी वाइंस्टीन ने तो मजे ले लिए अब जनता पढ़-पढ़कर मजे मार रही है।   #metoo अगर नहीं पढ़ा है तो पढ़िएगा जरूर- आपको भी लड़कियों को छेड़ने का नया आइडिया मिल जाएगा।  हां -यही है, जो सही है ! इसमें कोई दो राय नहीं है।  ऐसी बहुत सी स्टोरी है जिनसे लड़कियों को छेड़ने -उन्हें तंग करने के आइडिया मिलते है।

जी बिल्कुल ; किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं कह रहा हूँ आजकल यही हो रहा है , न जाने कितनी लड़कियों ने अपना दर्द ब्यान किया , जिसे वह किसी के साथ नहीं कर सकती।  परिवार में शर्म, दोस्तों में शायद जो भी कोई एक दो होंगे।  उनपर भी विश्वास की मात्रा में कमी , क्यूंकि घर का भेदी लंका ढहाए, अब हाल जो है वो किसको बताए , कहां जाए -क्या अंदर ही अंदर घुट घुट कर मर जाए।  मरता तो कोई नहीं परन्तु एक बार की हुआ दो बार हुआ फिर आदत पड़ गई , कि कोई सुधर तो सकता नहीं, अब खुद के मन को मार कर  चुपचाप सहन करना भी मरना ही है. 
चलो  #metoo पर अपना दर्द ए दास्तान ब्यान की तो जनता मजे लेने लगी है।  लड़कों को नए नए आइडिया मिलने लगे हैं, इसमें को दो राय नहीं मैंने भी कुछ अजीब -गरीब किस्से वस  #metoo के हैदर को देख कर ही जाने हैं।  लेकिन उसके साथ की तस्वीर और भी अट्रेक्टिव होती है.

हाँ तस्वीर से याद आया , आजकल तस्वीर ही मजबूर कर देती है कि खबर को पढ़ा जाए।  बहुत से न्यूज़ पोर्टल में ऐसे न्यूज़ हैडर होते है या पिक्स होती है जिन्हे देख कर ही क्लिक करने की लालसा सी होती है।  जिससे एक बात तो है कि जितना अश्लील लिखोगे, दिखाओगे उतना ही बिकोगे।   क्यूंकि पहले टीवी चैनल में स्पेशल एंटरटेनमेंट का प्रोग्राम बनाया जाता था.  उसके बाद से दर्शकों का #fashionTV से ध्यान कम हो गया।  हाल ही के बंद हो चुके कर्यक्रम #thekapilsharmashow   की बात की जाए तो उसमे भी अश्लील डायलॉग और परफॉर्मेंस जरूर थे और हमारी जनता भी मजे से देखा करती थी.
टीवी की छोड़िये जनाव क्यूंकि न्यूज़ चैनलों के भी यही हाल है। #रामरहीम और #हनीप्रीत के किस्से कहानिया या ख़बरें हो. या सपना चौधरी और हर्षिता का डांस मजे तो खूब आते है , खबर दिखने वालों को भी और देखने वालों को भी।
 #metoo यार अब तो  घर पर मोबाईल और ऑफिस में कम्प्यूटर चलते वक्त भी दिल में डर सा बना रहता है. कि कोई हॉट वेबसाइड या तस्वीर सर्च इंजन #गूगलबाबा पर न जाए।  वैसे  भी जनता जागरूक रहने की पूरी कोशिश में लगी रहती है वेशक प्याज का भाव पता न हो लेकिन #फ्लिपकार्ट  और #एमाज़ॉन पर क्या ऑफर है उसका पता होता है।  लेकिन इस  दौरान भी अश्लीता का शिकार होना ही पड़ता है।  अब जनाब क्या किया जाए -कैसे कहाँ पर किस विषय पर सर्च किया जाए,  #metoo की बात नहीं है  आजकल तो तीज त्यौहार पर भी ऐसे -ऐसे अट्रेक्टिव हैडर होते हैं कि न चाहते हुए भी क्लिक बज ही जाता होगा। चलिए जो भी है अब इंतज़ार  यही है कि ऐसा भद्दा लिखा दिखाया और जाता है , क्यूंकि अंकुश लगने की तो बात ही पैदा नहीं होती है हाँ  #metoo के सक्यूएर या कोई नया ट्रेंड शुरू हो जाता है , क्यूंकि जनता सब जनता है और भांपती है, बेशक ऐसे लिंक पर क्लिक करते हुए कांपती है। बेकाउसज़ सर्दियों के दिन है बाबू मोहशाय ?  #sunilkumarhimachali

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

सोचने का तरीका बदल गया


आजकल सोचने के तरीका बदल गया है, मुझे अपना ही लगता है- या सबका ऐसा ही. तय है सभी का हाल ही यही है।  मेरी उम्र के जो नौजवान है ,  उनका तो हाल भी यही है. पीएम मोदी ने देश की दशा और दिशा बदल दी है।  लेकिन आज तक उनका ब्यान नहीं बदला है 'मेरे देश के सवा सौ करोड़ देश वासियों' केदारनाथ यात्रा पर गए पीएम मोदी का आज भी वही ज्ञान था वही आकंड़े थे जो आज से कई साल पहले थे - मेरे शब्दों में उसपर विचार कुछ महीने पहले भी यहीं ही थे।  खैर उम्मीद है मेरे देश की जनसंख्या के आंकड़े भी पीएम मोदी के अल्फ़ाज़ों में जल्द बदल जाएंगे।  

अभी हम सब का सोचने का तरीका बदल गया है। आजकल हम न जाने क्यों उँगलियों के सहारे सोचते है ,मना की दिमाग से हमारे अंगूठे की नाश जुडी होती है. लेकिन कम्प्यूटर के की-बोर्ड के स्पेस को दबाने के अलावा बाकि जगह तो हम उँगलियों का ही इस्तेमाल करते है।  वैसे भी अब उँगलियों के सहारे से ही सारा काम है।  

उँगलियों से ही हम सोचते है -इसलिए हमारे सोचने का तरीका बदल गया।  किसी ने कुछ बोल दिया -तब उँगलियों के सहारे सोचना ! किसी का ख्याल - तब उँगलियों के सहारे सोचना ! कोई काम, कोई आदेश, कुछ भीजो भी आपका दिल करे -आपका दिल कहे! दिमाग सुने क्यूंकि स्थति ऐसी है कि आजकल सोचने का तरीका बदला है तो हमे साथ वालों की बात भी पहली बार में समझ नहीं आती. इतना ही नहीं कई बार हमारे इस सोचने के तरिके से सामने वाले या दूसरे व्यक्ति को गुस्सा भी आता है।  

मेरा तो तरीका सोचने के बदला ही है ,आपका भी निश्चय ही बदला होगा- आजकल हम जब भी कुछ सोचते है तो सिर्फ हाथ से मोबाईल का ऊँगली से स्क्रॉल डाउन करते हुए सोचते है।  कुछ करते है : वक्त-वे-वक्त ऊँगली से ही मोबाइल की हर मूवमेंट करते है। वर्तमान में हमारे हालत ऐसे हो गए है कि हर स्थिति में हम मोबाइल पर ऊँगली घूमते रहते है, कुछ भी हमारे दिनचर्या में हो रहा हो -वस स्क्रीन पर ऊँगली चलती रहती है, ध्यान कहीं और होता है. हमारी सोच- फेसबुक, व्हाट्सएप्प, इंस्टाग्राम, ट्विटर अन्य सोशल एप्प  चलते हुए न जाने कौन से सातवें आस्मां पर पहुंची हुई होती है।  बाकि ही सोच बदलो - तभी देश बदलेगा , और मुझे अब यही लगता है कि सोच बदलने का तरीका ही हम लोग बदलते जा रहे है ऐसे में क्या - क्या बदलेगा इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. अभी सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर ही नतीजे सामने आ रहे है, भविष्य में न जाने क्या और सामने आएगा।  क्यूंकि अब सोचने  का तरीका बदल गया है।  ऐसे में दिल-ओ-दिमाग की जद्दोजहद में फैसला क्या होगा तय करना मुश्किल है - क्यूंकि इस सोच की शुरुआत कहीं से और अंत कहीं और से होता है।  

रविवार, 8 अक्टूबर 2017

चुनावी करवा चौथ की रौनक

चुनावी करवा चौथ की रौनक
देश भर में छुट्टी का माहौल है. वैसे भी आज दिन में ही चांद का दीदार हो गया।  आज  सूरज की तेज रोशनी भी , चांदनी जैसी हुस्न की चमक को फीका न कर पाया। मेहँदी की चमक, चेहरे पर दमक और चूड़ियों की खनक ने आज सुबह से ही दिल ओ दिमाग को उलझाए से रखा. सुबह-सुबह व्रत शुरू करने के वक्त हलकी -हलकी ठंड थी. सारे दिन प्लैनिंग दिमाग़ में हो रही थी कैसे क्या करना है। आज का दिन साल भर के लिए खास होता है तो ज्यादातर  दिनचर्या की समय सारणी में बदलाव होना तय थे. ऊपर से आज रविवार था - शहरी और ग्रामीण दोनों ही तरफ की महिलाओं के सारे के सारे कामकाज में बदलाव था. जिनके आधार पर परिवार के बाकि सदस्यों ने भी पहले से प्लान तैयार किए हुए थे।  लेकिन जब सुबह की थोड़ी सी ठंडक में दिनभर का सोच-विचार कर, पैमाना तैयार किया तो दोपहर होते-होते सियासी गर्माहट बढ़ गई. फिर क्या था। टीवी के सामने से किसी का मन नहीं था - छोड़ा जाए।  क्यूंकि उसवक्त चुनावी करवा चौथ शुरू हो गया था।  दो राज्यों में उपचुनाव 11 अक्टूबर को है और दोनों ही राज्यों के नेता भी लोकसभा सीट के लिए चुनाव प्रचार में जुटे हुए है। दिन-रात जीत की दुआ अपने-अपने भगवान् से मांग रहे है। 
           
  ये दौर भी करवाचौथ के व्रत से कम नहीं।एक दिन चुनाव प्रचार के लिए रह गया है- भौर से ही नेता लोग भूखे प्यासे मैदान-ए-जंग में जुटे हुए थे। सबके लिए प्रतिष्ठा का  सवाल बना हुआ है। लोकसभा सीट जो किसी दुल्हन से कम नहीं उसको पाने के लिए उम्मीदवार उपवास करके प्रचार कर रहे हैं. भूख नींद सब भूल चुके हैं. और चुनावी करवा चौथ मनाने में व्यस्त है। 
  बात पंजाब की करें तो यहाँ सत्ता में बैठी कांग्रेस के दूल्हे राजा सुनील जाखड़ विजय होने की बात कह रहे है।  पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब वित्त मंत्री मनप्रीत बादल, कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और भी पंजाब कांग्रेस के कई बढ़े नेता करवाचौथ का व्रत रखे हुए हैं, सुनील जाखड़ की जीत के लिए दुआ मांगते हुए जनजनार्धन के दरबार पर हाज़िरी लगा रहे है।  चुनाव प्रचार कर रहे है। 

       वहीँ भाजपा-अकाली के उम्मीदवार स्वर्ण सालरिया भी अपने करवा चौथ के व्रत को पूरा करने के लिए हर छोटी-छोटी बात पर अमल कर रहे है. भाजपा-अकाली कदम से कदम मिलाते हुए चुनावी करवाचौथ व्रत के विधि-विधान में लगे हुए हैं. इसी बीच पंजाब की आम आदमी पार्टी अभी नयी दुल्हन है जो अपने तौर तरीके से चुनावी करवाचौथ के कामकाज-कर रही है।  न ही अबके चुनाव में दिल्ली मायके से कोई प्रचार के लिए आया , न ही कोई उपहार आया।  ऐसे में अकेले ही चली हुई है  गुरदासपुर उपचुनाव के उम्मीदवार सुरेश खजुरिया के हक़ में।  लेकिन उसे अभी ज्यादा ज्ञान भी नहीं है पूजा के सामान का। 

       चुनावी करवाचौथ में एक-दूसरे के श्रृंगार, गले के हार और सलवार-सूट या साड़ी पर भी नज़र है। खुद ही खुद के मंच से एक दूसरे से चुनावी करवाचौथ के पहले के पहनावे को बताया जा रहा है. एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी बरकार है. इन दिनों कई जगह नेता भी एक-दूसरे पर लांछन लगाने में पीछे नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान जनता के बीच जाकर गड़े मुर्दे भी उखाड़ रहे हैं.

चुनावी करवाचौथ की पूजा में बैठने का वक्त है और सुनील जाखड़ को बाहरी बताया जा रहा है।  भाजपा-अकाली की ऊपर चौथ का चन्द्रमा ग्रहण बना हुआ है, अकाली नेता लंगाह पर  बदचलन होने के आरोप  के आरोप लगे तो स्वर्ण सलारिया पर भी 2014 का मामला आग पकड़ने लगा. ऐसे में करवाचौथ की पूजा की ज्योति की लो सुनील जाखड़ की थाली में जगने लगी है. क्यूंकि आप के उम्मीदवार सुरेश खजुरिया अभी पहला दफा चुनावी करवा चौथ के व्रत की पूजा में है तो उनकी तरफ हवा का बहाव दिखा नहीं, उस और ऑक्सीजन की कमी ज्योति को जलाए रखने के लिए पहले से ही कम लग रही है।  


जो भी है...पतिव्रता स्त्री की तरह या नई बॉयफ्रेंड को गर्ल फ्रेंड की अदा -  कांग्रेस, भाजपा और आप के उम्मीदवार भी कोई कमी नहीं छोड़ रहे है। क्यूंकि अब जलवा दिखाने का वक्त है  तो किसी से कम कोई नहीं खुद को आंक रहा।  आंके भी क्यों व्रत तो जारी है अब जनता किसकी पूजा से खुश होती है , और किसका करवा फूटता है यह जनता जनार्धन ही तय करेगी , जिसकी पूजा का फल 15 अक्टूबर को होगा।      

रविवार, 1 अक्टूबर 2017

पड़ोसी की नीयत साफ़ नहीं

पड़ोसी की नीयत साफ़ नहीं है।  अब फिर से कोई न कोई नापाक हरकत करने की तैयारी में है। कोई-न-कोई प्लान बना रहा है।लेकिन हमारे  यहां जश्न की पूरी  तैयारी है।  रंग-रौग़न का काम जोरों पर है।  दशहरा हो गया है और अब दिवाली आने वाली है।  खूब तैयारियां की जा रही है।  हमारे घर में भी पूरी प्लानिंग चल रही है। हर तरफ से हर इंतज़ाम किया जा रहा है।  त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है अब ऐसे में उपहार लेने देने का सिलसिला भी जारी है। कुछ अपने भी मुँह बनाकर बैठे हुए है।

लेकिन क्या करें! पड़ोसी की नीयत साफ़ नहीं हैं ,ऐसे में हमें भी सतर्क रहने की जरुरत है. न जाने पकिस्तान कौन से आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में बैठा है. भारतीय सीमा बल भी पूरी मुस्तैदी के साथ सरहद पर नज़र गड़ाए हुए है. भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमणम जम्मू के दौरे पर जाकर आई , जाहिर है की रक्षा मंत्रायलय भी पुरे प्रबंध किए हुए है। रिपोर्ट्स की बात की जाए तो दिवाली से पहले पडोसी पाकिस्तान घुसपैठ की आस में बैठा हुआ है।लेकिन अब चीन की तरफ से भी कोई न कोई गतिविधि की जा सकती है।

कहा जाता है कि डायन भी एक घर छोड़ कर किसी को निशाना बनाती है। लेकिन अपने तो दोनों पड़ोसी डायन से भी बढ़कर हैं न जाने किस वक्त उनकी कौन सी नापाक करतूत सामने आ जाए। वैसे चीन की तरफ से उम्मीद नहीं है , क्यूंकि 1962 के बाद शायद उसको याद है कि भारतीय जवानो की बाजुओं में जो दम है उससे चीन का दम निकल जाए।  रही बात पकिस्तान की ये पडोसी तो बेशर्म है, घूंघट की आड़ में भी अपनी नापाक हरकतों से बाज़ नहीं आता।

पडोसी से अक्सर कहासुनी ज़र,जोरू और ज़मीन के खातिर होती है।लेकिन पाकिस्तान की जोरू का तो पता नहीं कश्मीर के भारतीय जमीं से नज़र टिकाए हुए वर्षों से बैठा है. इतने सालों से न जाने नज़र थकी भी नहीं, लेकिन सरहद से क्रॉस भी नहीं कर सकती क्यूंकि भारतीय सीमा सुरक्षा बल पाकिस्तान की इस गन्दी नज़र को कभी टिकने नहीं देगा। वैसे भी पाकिस्तान हकूमत की रस्सी जल गई है लेकिन बल नहीं गया। नवाज़ के प्रति भारत की शराफत है जो मोदी साहब दोस्ती धर्म और पडोसी से अच्छे रिश्ते की उम्मीद लगाए बैठे है , वर्ना यह तो तय है की भारत न जाने कौन सी दिवाली को पडोसी का दिवाला निकाल दें।



गुरुवार, 3 अगस्त 2017

#JabHarrymetSejal लपालप लपकने लगे लगबेलु तू लिपस्टिक पर बनारसी बाबू



#JabHarrymetSejal  लपालप लपकने लगे लगबेलु तू लिपस्टिक पर बनारसी बाबू

जब वी मेट के बाद इम्तियाज़ एक और एक्सपरिमेंट कर चुके है, सेजल और हैरी के साथफिल्म कई मायनो में  खास है..इम्तियाज़ के लिए बड़ी बात है जो शाहरुख़ का साथ है। और शाहरुख के लिए इसलिए ख़ास है कि शायद, इस फिल्म से खान साहब टिकट खिड़की पर थोडे और रईस बन जाएक्यूंकि रईस ने उन्हें काफी कुछ सिखाया है , वैसे भी जनाब को मार्केटिंग गुरु कहा जाता है - शाहरुख जानते है कि अपनी फिल्म को कैसे बेचना है लेकिन  इस बार तो डिपलो का भी साथ लिया है ताकि सबको फुर्र करदे
बता दूँ कि #JabHarrymetSejal एक हिंदी रोमांटिक कॉमेडी फ़िल्म है जिसका लेखन एवं निर्देशन इम्तियाज़ अली ने  किया  है। फ़िल्म का युवाओं को बेसब्री से इंतज़ार है। क्यूंकि अब एक हफ्ता हो गया है, कुछेक फिल्मे ( Mubarakan - Hindi, Indu Sarkar - Hindi, Lipstick Under My Burkha - Hindi) बीते हफ्ते कुछ रंग जमा नहीं पाई और कुछेक को रुझा नहीं पाई। कमाई भी संडे के दिन भी धंदे में मंदे वाले हालात रहे।
अब शाहरुख़ और अनुष्का का फ़िल्मी रोमांस कितना इल्मी रहता है - कितना दर्शकों को बांधे रखते है यह कल क्लियर हो जाएगा। जिनको क्लियर नहीं हो पाएगा उनकी आँखों से पर्दा संडे के दिन उठ जाएगा , वैसे मंडे को भी इस बार काफी हाउस फुल जाने वाला है, रक्षा बंधन है और इम्तियाज़ की रक्षा कितनी शाहरुख और अनुष्का कर पाते है ये तो अब कुछ ही घंटों की बात है।  
वैसे भी भारत में कोई  ही पॉपुलर शहर रहा हो जहां #JabHarrymetSejal के हेरी और सेजल न पहुंचे हो। लेकिन जब बनारस में फिल्म के प्रमोशन के लिए पहुंचे तो वहां भारतीय जनता पार्टी के सांसद और  भोजपुरी के सुपर स्टार मनोज तिवारी ने अपनी गृहनगरी बनारस में हैरी और सेजल के साथ उनके डायरेक्टर इम्तियाज अली की काफी दिल से मेजबानी की और उन्हें गाना भी सिखाया। सिखाया तो सिखाया साथ में बिठा के शाहरुख़ से गवाया भी.
इस दौरान खूब मस्ती के रंग में रंगे बनारसी बाबू नज़र आए, जो 31 जुलाई को दिए गए अपने मर्यादा के पाठ को भी भूल गए ,जहां उन्होंने मर्यादा में रहने  की बात कही थी।  मर्यादा की सीमा  इसलिए लांघ गए होंगे ,शायद लेटेस्ट शो 'लिपस्टिक अन्डर माय बुर्का' देख  कर आए होंगे। तभी तो  शाहरुख ने अनुष्का  के लिए लगावेलू तू लिपस्टिक ...  गाना गाया और सांसद महोदय ने गवाया , सिखाया और सुर से सुर भी मिलवाया। 
दिल्ली के एक स्कूल में मर्यादा की शिक्षा देने वाले सांसद के अंदर शायद अपना कलाकार जाग गया होगा ,जो चंद पलों के लिए भूल गया कि समाज में एक गायक के साथ -साथ एक समाज सेवी भी है एक नेता भी है -जिसको शोभा नहीं देते एक अभिनेता और अभिनेत्री के सामने चार कदम दूर से सुर से सुर मिलता हुए , चरणवंदनीय नृत्य मुद्रा में नज़र आए.
चलो ये तो इनका व्यक्तिगत जीवन है, हम व्यक्ति विशेष पर टिपण्णी नहीं कर सकते। लेकिन अमित शाह की सांसे फुल जाती है जब सांसद संसद की कार्यवाही में शामिल नहीं होते।  जहाँ जनता के हक़ की बात इन्हे उठानी होती है, वहां न जाने कितने नेताओं के गले सूखते नज़र आते है , लेकिन साहिब गाना- गाना भी गवाइए भी लेकिन उसके लिए एक मंच भी तो बनाइये , यू ही एक सड़क छाप की तरह  हरकते करना और गली-मोहल्लों के लोंडो वाले गाने गाना कहां सौभा देता है? फिर जब लोंडे लोग ऐसी हरकते करते है तो उनके लिए ऐसे ही किस्से होते है जो वो मुद्दे बना देते है। जब एक सांसद को शर्म नहीं आती तो उनको क्या ख़ाक फर्क पड़ेगा।