मंगलवार, 21 जनवरी 2014

imtiaz and alia

                बाथरूम सिंगर है ;आलिया...........खोया रहता हूँ ;इम्तियाज़
चंडीगढ़ (सुनीलफिल्म निर्देशक इम्तियाज अली  आलिया भट्ट होटल ताज में अपनी आने वाली फिल्म हाईवे की प्रमोशन के लिए पहुंचे जोकि 21 फरवरी को रिलीजहोगी।फिल्म की लीड में रणदीप हुड्डा और आलिया भट्ट हैं। फिल्म में रणदीप पैसों के लिए आलिया को अगवाह कर लेता हैं इस बीच उन्हें आलिया से प्यार हो जाता है। इसफिल्म में संगीत एआर रहमान ने दिया है। फिल्म की कहानी कुछ साल पुरानी है जोकि टीवी पर आने वाले नाटक ‘रिश्ते’ में भी दर्शक देख चुके है।
नगरबाणी से हुई वार्ता में आलिया भट्ट ने बताया कि सिंगिंग उनकी आदत है।क्योंकि मैं तो बीएस बाथरूम सिंगर हूँ,फिल्म में एक गाना मैंने गया है,लेकिन यह काफी लंबागाना था.जिसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। ‘पटाखा गुड्डी’ नामक टी-शर्ट पहने आई आलिया ने कहा कि मेरा किरदार ‘जब वी मेट’ की करीना कपूर जैसा नहीं है।
फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली का कहना है कि मैं खुद थोड़ा खोया हुआ हूंइसलिए मेरी फिल्मों में किरदार भी खोये रहते हैं। खोया रहना अच्छी बात है। मेरी हर फिल्म मेंपंजाब सेंट्रल प्वाइंट होता है। मेरी आने वाली फिल्म 'हाईवेभी पंजाब की सड़कों से  गुजर कर  कश्मीर तक आपको एक लव स्टोरी देखने को मिलेगी।जब मै 9वीं  क्लास मेंअपने छोटे भाई आतिफ के साथ जमशेदपुर में रहता था  घर के एक हिस्से में सिनेमा घर था। मै जिस कमरे में रहता थाउस कमरे की दीवार सिनेमा घर से सटी हुई थी।फिल्म चलने पर आवाज़ सुनाई देती थी और रात को अक्सर अपने भाई को घर पर अकेला छोड़कर फिल्म देखने जाया करता था। सिनेमा के इस जुनून के चलते मई उससाल  9वीं क्लास में फेल हो गया था।बिमल रॉयराज कपूर और विजय आनंद। ञ्च फेवरेट फिल्मी जोड़ीदिलीप कुमार और मधुबाला मेरे हमेशा फेवरेट हैं।इस फिल्म मेंतीन चीजें खास हैंआलिया भट्टरणदीप हुड्डा और एआर रहमान इस फ़िल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद क्लाइमेक्स डिसाइड किया गया था। उनसे भविष्य कि बात कीगयी तब उन्होंने कहा अभी मेरे दिमाग में सिर्फ आईडिया है , जिसपर मै  रिसर्च कर रहा हूँ। बाकि इस फिल्म को एन्जॉय करो और फीडबैक  के लिए लोग इनकरें,,,, highwaythefilm.com

republic day

                             जनता काजनता के लिए                                                                     
चंडीगढ़(सुनील )  गणतंत्र यानी जनता काजनता के लिए और जनता द्वारा..... गणतंत्र दिवस अर्थात जनता का राष्ट्रीय पर्व,परन्तु क्या आम जनता पने इस राष्ट्रीय त्यौहार को उतने ही उत्साह के साथ मनाती है ितने उत्साह से देश में होली,दिवाली जैसे धार्मिक सामाजिक पर्व मनाये जाते हैं ?   वैसे भी गणतंत्र दिवस का अपना िशेष महत्त्व है  ! 2014में भी देश अपनी आज़ादी और सके बाद हुए व्यवस्था परिवर्तन की खुशियाँ मनाने की तैयारियों में जुटा है    .गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाले इस सालाना जलसे मे राजपथ  देश भर से आये कलाकारसैनिक और स्कूली बच्चे अपनी कला के रं बिखेरेंगे और सरहदों की हिफाज़त करने वाली सेनाओं के जवान अपनी ताकत और जोश के जरिये एक बार फिर हमें इस बात का विशश्वास िलाएंगे की हमारादेश पूरी तरह सुरक्षित है  !
भारत का संविधान दुनिया का सबसे बडा लिखित संविधान है। संविधान में सरकार के संसदीय स्वरूप की व्यवस्था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्द्रीय कार्यपालिका कासांविधानिक प्रमुख राष्ट्रपति   है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसारकेन्द्रीय संसद  की परिषद् में राष्ट्रपति तथा दो सदन है जिन्हें राज्यों की परिषद्राज्यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा  के नाम सेजाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्यवस्था की गई है कि राष्ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रमुख प्रधानमन्त्री  होगाराष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद्की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करेगा। इस प्रकार वास्तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है।मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभाके प्रतिउत्तरदायी है। प्रत्येक राज् में एक विधानसभा है। जम्मू कश्मीरउत्तर प्रदेशबिहारमहाराष्ट्रकर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधानपरिषद्  कहा जाता है। राज्यपाल  राज् का प्रमुख है।प्रत्येक राज् का एक राज्यपाल होगा तथा राज् की कार्यकारी शक्ति उसमें विहित होगी। मंत्रिपरिषद्जिसका प्रमुख मुख्यमन्त्री  हैराज्यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्पादन में सलाह देती है। राज् कीमंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से राज् की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज् विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। अवशिष् शक्तियाँ संसदमें विहित हैं। केन्द्रीय प्रशासित भूभागों को संघराज् क्षेत्र कहा जाता है। 
   26 जनवरी, 1950 को भारत देश के संविधान को लागू किया गया.तब से आज तक इस दिन को देश गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाया जाता है .26 जनवरी आजादी से पहले भी देश के लिए एक अहम दिन था.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1930 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था इसके साथ एक और महत्वपूर्ण फैसला इस अधिवेशन के दौरान लिया गयाकि प्रतिवर्ष 26 जनवरी कादिन “पूर्ण स्वराज दिवस” के रूप में मनाया जाएगा इस दिन सभी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे भारतीय संविधान के वास्तुकार, भारत रत्न से अलंकृत डॉ। भीमरा अम्बेडकर   समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतान्त्रिक देश बन गया।इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिन कहलाया गया। 211 विशेषज्ञों के द्वारा दो साल ग्यारह महीने और 18 दिनों में भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था !
25 नवम्बर 1949 को देश के सँविधान को मंजूरी मिली.24 जनवरी 1950 को सभी सांसदों और विधायको  ने इस पर हस्ताक्षर किए और इसके दो दिन बाद ही  26 जनवरी 1950 को सँविधान लागू कर दिया याडॉराजेन्द्र प्रसाद देश को पहले राष्ट्रपति बने !तब से 26 जनवरी,1950का दिन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है !26 जनवरी का दिन भारत के साथ ही साथ ऑस्ट्रेलिया के लिए खास महत्व रखता है.ऑस्ट्रेलिया में 26 जनवरी को आधिकारिक राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है. 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया डे भी कहा जाता हैऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री इस मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हैंयह दिन ऑस्ट्रेलियामें ब्रिटिश उपनिवेश के आरंभ को दर्शाता हैजिस गणतंत्र ने हमें अभिव्यक्ति की आजादीकहीं भी रहने और घूमने की आजादी और अन्य अधिकार दिए थे उसे हम याद ही नहीं रख पाएआज लोग अपने अधिकारोंके लिए तो लड़ते हैं लेकिन अपने कर्तव्यों से दूर भागते हैं और यही वजह है.आज 64 साल बाद भी देश गणतंत्र होने के बावजूद भ्रष्टाचारमहंगाई और सामाजिक बुराइयों में फंसा हुआ है !

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

malls

माल्स में मंदी का दौर 

आधुनिक युग में जहाँ हर कोई व्यस्त रहता है ,उस व्यस्तता को कम  करने के लिए हम किसी न किसी तरीके से मनोरंजन के साधन ढूंढ लेते है। मनोरंजन के साधन तो बहुत  हैं लेकिन मॉल थेयटर और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स हमारी जिन्दगी में हिस्सा बन चुके है। आराम फरमाने के लिए ,मनोरंजन के लिए या फिर शॉपिंग के लिए हम अक्सर मॉल्स आदि में जाया करते है। माल्स का प्रचलन दिनों दिन बढ़ता ही नज़र आ रहा है।  
 ठीक इसी तरह चंडीगढ़ जैसे शहर में भी माल्स का काफी प्रचलन है।  जहाँ पर हर वर्ग के लोगों को हर मौसम में देखा जाता है। लोगों में ब्रांड्स कि लोकप्रियता की कोई सीमा नहीं है।  करोड़ों के हिसाब से विभिन्न तरह के ब्राण्ड्स हर रोज अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए , हर मॉल में अपनी फ्रैंचाइज़ी देने लगे हैं।  भले ही वो ब्रांड कपडे , अस्स्रीस  या फिर खाने पीने के हों। 

जब नगर बाणी की टीम ने माल्स का दौरा किया तब पहले के मुकाबले अब कम् संख्या में लोग नजर आये। लोगों से वार्ता करने पर ज्ञात हुआ की अब शहर में माल्स की  संख्या ज्यादा हो गयी है और जो भी जरूरतमंद वस्तु चाहिए वह अब आसानी से मॉल और मार्केट में मिल जाती है इसका कारण ये भी है कि हर माल्स व  बाजार  में अपनी ब्रांड फ्रैंचाइज़ी देने लगे हैं। यही कारण माल्स में दुकानदारों से बात करने पर उन्हों ने दिया। उन्हों ने यह भी कहा कि पहले युवा काफी मात्र में माल्स की  तरफ रुख किया करते थे लेकिन अब कोई खास बजह नजर नहीं आती , जिससे हमे पता लग सके कि लोगों के अंदर मॉल थेयटर और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के प्रति दिलचस्वी कम होती जा रही है।जिस कारण माल्स आदि में मंदी का दौर आ गया है। 
जब थीएटर की बात लोगों से की गयी तो उस जाँच से ज्ञात हुआ की आज जो भी नयी फ़िल्म मार्किट में आती है तो ज्यादा से ज्यादा तीन दिन तक थीएटर में टिक पाती है दूसरी  वजह ये भी बताई गयी कि आसानी से  हफ्ते  के भीतर  तक फ़िल्म टीवी चैनेल पर दिखाई जाती है जिससे टाइम कि बचत भी होती है। हम अपने परिवार को भी समय दे पातें है। आजकल  मॉल थेयटर और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक ही तरह की  चीजें आसान दरों पर उपलब्ध हो जाती है और आम तौर पर यहाँ अब 16 से 35 वर्ष आयु वाले लोग ही नजर आते है। खाश रूप से देखा जाये तो कपल का भी  रश अब पहले के मुकाबले कम ही देखने  को मिलता है। 

गुरुवार, 16 जनवरी 2014

bhupender hudda

            600करोड रुपए प्रति वर्ष का लाभ;हुड्डा 
चंडीगढ़(सुनील; मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा हरियाणा स्टेट प्रैस क्लब द्वारा आयोजित प्रैस-से-मिलिए कार्यक्रम में मुख्यातिथि पधारे।उन्होंने कहा कि अप्रैल, 2013 की पुरानी बिजली की दरें इस वर्ष एक जनवरी, 2014 से लागू मानी जाएगीं।अप्रैल 2013 के बाद बढ़ाई गई बिजली की दरों को सरकार द्वारा वापिस ले लिया गया है।राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को 600करोड रुपए प्रति वर्ष का लाभ मिलेगा।इसके अतिरिक्त अब कृषि बिजली उपभोक्ताओं को25 पैसे प्रति यूनिट की जगह 10 पैसे प्रति यूनिट या 15 रुपए प्रति बीएचपी प्रति माह की दर से बिजली मिलेगी। इस राहत से राज्य के 5.5 लाख कृषि उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।जो एफएसए 34 पैसे बढाया गया था उसे भी वापिस लिया गया।यह राहत उन घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को प्रदान की जाएगीजिनका बिजली का द्विमासिक बिल 1000 यूनिट तक आएगा।इससे राज्य के लगभग 38 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को लाभ लगभग एक रुपए 30 पैसे का लाभ मिलेगा।एक जनवरी, 2014 से घोषित 1600 यूनिट द्विमासिक बिजली के बिल में स्लैब प्रणाली का लाभ उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा। इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग के महानिदेशक सुधीर राजपाल, विधायक धर्मसिंह छोक्करमुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा. के.के. खंडेलवालओएसडी रणधीर सिंहसूचना एवं अतिरिक्त मीडिया सलाहकार सुनील परती व अन्य उपस्थित थे। 

मंगलवार, 14 जनवरी 2014

daal chini

                                                   बहुत गुणकारी है दाल चीनी 
  दाल चीनी का पौधा जितना छोटा है। दाल छिनी की सुखी पत्तियां तथा दाल को मसलों के रूप में प्रयोग लाया जाता है। इसकी दाल थोड़ी मोटी ,चिकनी तथा हलके भूरे रंग कि होती है। 
दाल चीनी के दस फायदे हैं। 
1. दाल चीनी का नियमित सेवन करने से मोटापा कम होता है। 
2. दाल चीनी का सेवन करने से रक्त की मात्र में वृद्धि होती है। 
3 जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए ,हल्के गर्म पानी में दाल चीनी का पाऊडर और थोड़े से शहद को मिलकर दर्द वाली जगह मालिश करने पर फायदा होता है। 
4. पेट में दर्द होने पर, एक छमक शहद के साथ दाल चीनी पाउडर लेने से पेट दर्द और एसीडिटी में आराम मिलता है। 
5. त्वच के रोगों में फायदेमंद, त्वचा में खाज और खुजली होने पर दाल चीनी पाऊडर तथा शहद बराबर मात्रा में मिलाकर। इस पेस्ट को त्वचा पर लगाने से समस्या दूर होती है। इस पेस्ट में नींवू मिलकर लगाने से त्वचा पर पड़े निशान दूर होते है। 
6,सर्दी -जुकाम के लिए, सर्दी जुकाम होने पर दाल चीनी का प्रयोग करना चाहिए।  एक चमच्च शहद में दाल चीनी  पाऊडर मिलकर सुबह शाम लेने से , तथा हलके गर्म पानी में एक चुटकी दाल चीनी पाऊडर तथा एक चुटकी पीसी काली मिर्च मिलाकर पिने से गले कि खरास दूर होती है। 
7. मोटापे के लिए, मोटे लोगों को भी दाल चीनी का प्रयोग करना चाहिए। चाय में एक चम्मच दाल दालचीनी पाउडर मिलकर एक गिलास जल में उबालें , इसमे एक चम्मच शहद मिलकर सुबह-शाम पिने से मोटापा दूर होता है। 
8. दिल के मरीजों के लिए, शहद और दाल चीनी पाऊडर का पेस्ट बनाकर रोटी के साथ खाने से धमनियों मे कोलेस्ट्रॉल जमा नही होगा, तथा दिल के दौरे की संभावना भी कम होगी।  
9. केंसर में भी फायदेमंद , केंसर जैसे घातक रोगों क्र लिए दाल चीनी फायदेमंद है।  केंसर के रोगियों को एक चम्मच शहद में दाल चीनी पाऊडर मिलाकर एक माह तक नियमित सेवन करने से फायदा मिलता है। 
10.दांत दर्द में आराम, एक चम्मच शहद में थोडा सा दाल चीनी पाऊडर मिलाकर दांतों पर नियमित दो-तीन बार मलने से दांत दर्द में आराम मिलता है। दाल चीनी के नियमित सेवन से अस्थमा व लकवे में भी फयदा होता है,तथा समरण शक्ति तेज़ होती है। 

रविवार, 12 जनवरी 2014

siromanni akali

sunil; भले ही  शिरोमणि अकाली दल के जनरल सरदार सुखदेव सिंह ढींडसा कि तरफ से आगामी लोक सभा चुनाव  में अपनी जीत को सुनिश्चित  करने के लिए अपने परिवार के साथ मिल कर चुनाव क्षेत्र में चुनाव से पहले ही  दिन रात एक कर दिया परन्तु इस बार भी   यह बाज़ी ढींडसा के पाले में नज़र नही आ रही करीब 6  महीने पहले शुरू हुए चुनाव सभाओ में यह चर्चा सुनाई  दे  रही थी कि लोगो की  सेवा का यह कार्ज़ राज सभा का मेंबर बनने व् पंजाब ,में अकाली सरकार बनने के तुरन्त बाद क्यों शुरू नहीं हुआ ?लोगो में इस बात का गुस्सा भी देखने को दिखाई दिया कि लोक सभा चुनाव की  हार के  बाद अपने क्षेत्र को बदलने की  भावना के साथ देख कर नज़र अंदाज़ क्यों किया जाता रहा है दूसरी तरफ जनता को बड़ी बड़ी राहते देने   का वादा करने वाले चुनाव में जीते कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी विजेंदर सिंगला भी चाहे लोगो कि उम्मीदो पर पुरे नहीं उतरे परन्तु उन्होंने भी ढींडसा से एक साल पहले दुबारा अपनी डूबती बेड़ी पार लगाने के लिए हाथ पैर मारने शुरू कर दिए थे  एक दौड़ में दोनों एक दूसरे से बढ़ते जरुर देखे गये लो घाबदा कोठी का हस्पताल केंद्र की वजह व् दुरी तरफ के अकाली दल की  तरफ से जगह दिए जाने से सफल हुआ प्राथमिक जरूरते आज भी लोगो के सिर चढ़ कर बोल रही है सिद्धांतो को जानने वाले भी राजसी निति बनाने वालो की उलझाने वाली योजनायो के कारण समझोतो के राह पड चुके है हर किसी को आगामी समय अच्छा व्यतीत करने के लिए जोड़ घटा करके समय व्यतीत करना पड़ रहा है पहली लोक सभा चुनाव के समय  पर गुरमीत सिंह काला मान का जेल जाना ,संत टेक सिंह धनोला को बाबा  सिंह ट्रस्ट से नजदीक करके पर्चा दर्ज़ होना व् सुरिंदर पाला बालाको जेल की सिलाखो तक पहुचाने के किस्से , कई सवालो  को जन्म देते देखे गए इस तरह के हालातो में न्याय पालिका व् राजसी पकड़ के उलझे हुए भेद भी जग जाहर होने से नहीं रोके जा सके मज़बूरी कि दल दल में फसे लोग फिर से राहत   के लिए काम निकलने पर लगे हुए है परन्तु उनको अभी भी प्राथमिक जरूरते पूरी करने के लिए कोई तीसरा बदल नज़र नहीं आ रहा लोगो पर अक्सर यह दोष लगाया जाता है कि लोग राहत तो चाहते है पर टैक्स अदा करने से कन्नी काट लेते है यहाँ एक सवाल उठता है जिस्ने टैक्स दिखाए  नहीं जाते पर जनता से लिए जाते है क्या उनके बदले में लोगो को सहुलतें दी जाती है अगर टैक्स के  अनुपात अनुसार सहूलतें  नही दी जा रही फिर इस प्रकिर्या के लिए कोन  जिम्मेवार है व् इस तरह के जिम्मेवार  व्यक्तियो के ऊपर कोई कारवाई क्यों  नहीं की  जाती भारत कि राजधानी दिल्ली के अन्दर आम आदमी हाथ में आई वज़ारत न  लोगो में एक हलचल सी छेड़ दी है कि देश कि राजधानी  के अंदर लोग पुराने राजनितिक नेतायो को हरा कर राहत प्राप्त कर सकते है तो पंजाब में क्यों नहीं यह बात जंगल कि आग कि तरह फैलती हुए दिखाई दे रही है व् जिस तरह से यह आवाज़ बुलंद होने जा रही है उसको देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता  की आगामी चुनाव के नतीजे कुछ और रंग दरसायंगे