गुरुवार, 12 मई 2016

चंडीगढ़ में बढती ट्रैफिक समस्या




जब भी जिस भी विषय - वस्तु के बारे में बात की जाती है . तब वहां का इतिहास और भुगौलिक स्थिति को समझाना काफी महत्वपूर्ण होता है . और आज हम उत्तर भारत की ब्यूटीफुल सिटी चंडीगढ़ के बारे में बात कर रहे है . चंडीगढ़ के इतिहास से तो हर कोई बाकिफ है . लेकिन उसमे क्या-क्या बदलाब हुए आज हम वो जानते है.

   16 साल में इतना बदला चंडीगढ़
साल 2000 तक चंडीगढ़ की पहचान बाबुओं के शहर के तौर पर ही थी। कहा जाता था- A city of white beards and green hedges। शहर आज भी ग्रीन है, हालांकि 16 साल के सफर ने इसे हैप्निंग और हैपिएस्ट शहरों में शुमार कर दिया है। आईटी पार्क आने के साथ ही यह मल्टीनेशनल कंपनियों का हॉट स्पॉट बन गया।

     चंडीगढ़ में ये हुए बदलाव...
- अपने सॉलिड बिजनेस आइडिया से यहां के लोगों की सोच बदली है और लोग रिस्क लेने लगे हैं।
- अब यहां के लोग नौकरी की तलाश में दूसरे शहरों में कम ही जाते हैं।
- पिछले 16 सालों में चंडीगढ़ ऐसे यंग एंटरप्रेन्योर्स का वर्क प्लेस बना, जो नए स्टार्टअप ला रहे हैं।
- हाल ही में यहां 80 स्टार्ट अप्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

   जहां जानवर बंधते थे अब वहां से उड़ते हैं प्लेन
 -  झुरहेड़ी गांव, जहां आज है इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- 2000 में चंडीगढ़ में एक छोटा सा एयरपोर्ट था, सिर्फ तीन फ्लाइट्स जाती थीं दिल्ली के लिए। दोपहर तीन बजे तक एयरपोर्ट बंद हो जाता था।
- ट्राईसिटी के पोटेंशियल को देखते हुए यहां एयरपोर्ट को विस्तार देने की प्लानिंग हुई।
- 2007-08 में मोहाली के गांव झुरहेड़ी के 93 किसानों की 330 एकड़ जमीन लेकर इलाके की सूरत ही बदल दी गई।
- पंजाब में पहली बार डेढ़ करोड़ रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन का मुआवजा दिया गया था।
- आज यहां शानदार इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, इंतजार है तो बस इंटरनेशनल फ्लाइट्स का।

    16 सालों में बढ़ा इंफ्रास्ट्रक्चर
- सोलह सालों में चंडीगढ़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर तरीके से डेवलप हुआ है।
- शहर की अधिकांश सड़कें फोर लेन से सिक्स लेन हो गई हैं।
- पार्किंग की दिक्कत से निपटने के लिए शहर की पहली मल्टीलेवल पार्किंग बनकर तैयार है।
- वहीं, पीजीआई और हाईकोर्ट में भी मल्टीलेवल पार्किंग बन गई है।
- कई जगहों पर ट्रैफिक की प्रॉब्लम को दूर करने के लिए एक नए ओवर ब्रिज बनाए गए हैं।
- शहर के राउंड अबाउट में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए ट्रैफिक लाइट्स लग गईं।
- एक नया बस अड्डा, नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स भी तैयार हो गया।
- इंडस्ट्रियल एरिया इंडस्ट्रियल बिजनेस पार्क बन गया।

  गार्डन सिटी बना चंडीगढ़
- चंडीगढ़ की पहचान पहले सिर्फ रोज गार्डन और रॉक गार्डन तक ही सीमित थी। अब शहर में एक दर्जन से अधिक थीम गार्डन हैं।
- गार्डन ऑफ फ्रेगरेंस, गार्डन ऑफ कोनिफर्स, टैरेस्ड गार्डन, पाम गार्डन, जैपनीज गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन इनमें प्रमुख हैं।

  होटल एंड शॉपिंग मॉल
- 2000 में शहर में एक भी फाइव स्टार होटल नहीं था। आज चंडीगढ़ में इस समय पांच बेहतरीन होटल, 80 से अधिक बड़े होटल्स और 50 से अधिक मल्टीनेशनल फूड चेन्स हैं।
- वर्ष 2003 में ढिल्लों सिनेमा की जगह पहला मल्टीप्लेक्स बना तो 2016 तक शहर के एक सिनेमा को छोड़कर सभी सिंगल स्क्रीन सिनेमा मल्टीप्लेक्स में कन्वर्ट होने के लिए तैयार हो गए।
   21वीं सदी में बदलता चंडीगढ़
-  2001 तक जहां झाड़ियां उगी हुई थी, वहां 2300 मकान बने
- 15 साल पहले घग्गर पार खाली जमीन थी। बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई थी।
- 2005 में हुडा ने यहां पर सेक्टर्स बसाने शुरू किए और सड़कें बनने लगी।
- एरिया डेवलप होता गया और आज यहा सेक्टर-23 से लेकर 28 तक बस चुके हैं।
- अब यहां पर 2300 मकान बन चुके हैं और 12 हजार 800 आबादी रहती है।
- इन सेक्टर्स में कई सोसाइटीज में लोग रहते हैं।
- घग्गर पार के सेक्टर्स में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यहां सड़क को हाईवे की तर्ज पर डबललेन किया गया है


चंडीगढ़ एक सुयोजित शहर है , और यहाँ हरियाणा ,पंजाब और हिमाचल प्रदेश के लोग निवास भी  करते है  ,और ज्यादातर लोगों का यहाँ स्थित पीजीआई में इलाज करवाने  के लिए आना - जाना भी लगा रहता है , गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आम तौर पर मरीज पीजीआई चंडीगढ़ इलाज कराने के लिए पहल देते हैं,लेकिन वर्तमान हालत कुछ ऐसे हैं कि यहाँ की पार्किंग व्यवस्था इन दिनों खुद ही बीमार पड़ी है , जो सुधरने का नाम ही नहीं ले रही है। पीजीआई फैकल्टी और स्टाफ के बीच पिछले दिनों पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद पीजीआई प्रशासन ने इस प्राब्लम को सुलझाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।लेकिन कब इस समस्या का समाधान होगा ये तो भविष्य ही बताएगा , पर आज इस रिपोर्ट से जानते है कि पीजीआई  में कहाँ - कहाँ पार्किंग की समस्या से जूझना पड़ रहा है -



                                   पी.जी.आई. में विकरालपार्किंग समस्या
पी.जी.आई. में पार्किंग समस्या बढ़ती जा रही है। मरीजों के साथ उनके परिजनों को वाहन पार्क करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। जानकारी के मुताबिक पी.जी.आई. की पार्किंग एक ही कांट्रैक्टर के पास है। पी.जी.आई. की करीब आधी पार्किंग पी.जी.आई. स्टाफ के लिए है जबकि बाकी बची पार्किंग मरीजों के लिए है। स्टाफ के लिए पार्किंग उनके  विभाग के पास बनाई गई है लेकिन मरीजों को वाहन पार्क  करने के लिए  विभाग से काफी दूर जाना पड़ता है।
                           
                                 एमरजैंसी
पी.जी.आई. की एमरजैंसी की अपनी कोई पार्किंग नहीं है। एमरजैंसी में आने वाले मरीजों को अपने वाहन एमरजैंसी के  सामने (अपोजिट) स्थित ब्लाक के साथ वाली बिल्ंिडग में खड़े करने पड़ते हैं।एमरजैंसी के सामने भार्गव ऑडिटोरियम, रिसर्च सैंटर आदि ब्लॅाक है, जहां पर पार्किंग में लोगों को अपने वाहन खड़े करने पड़ते हैं।

                                 एंडवासआई डिपार्टमैंट
पी.जी.आई. के एडवांस आई डिपार्टमैंट के मरीजों के लिए कोई पार्किंग नहीं है। आई सैंटर के पास जो पार्किंग है वह सिर्फ  पी.जी.आई. के स्टाफ के लिए बनाई है। आई सैंटर पर आने वाले मरीजों को वाहन खड़े करने के  लिए नई ओ.पो.डी. के सामने बनी पार्किंग में जाना पड़ता है और वहीं से पैदल आना पड़ता है।

                                    नेहरू अस्पताल
नेहरू अस्पताल, नेहरू सराय और  डैंटल अस्पताल के बीचों-बीच बनी पार्किंग को भी सिर्फ स्टाफ के  लिए रखा गया है। पहले यह पार्किंग मरीज प्रयोग कर सक ते थे लेकिन अब डैंटल अस्पताल के साथ एक पार्किंग बनाई गई है। जो काफी छोटी है। इस पार्किंग में वाहनों को अंदर ले जाना और बाहर निकालने में काफी समय बर्बाद हो जाता है।

                                 स्टाफ के लिए पार्किंग
पी.जी.आई. में स्टाफ  डाक्टर्स, नर्स व क्लर्कआदि के लिए आई सैंटर ब्लाक के साथ ही पार्किंग बनाई गई है जबकि नेहरू ब्लाक के बीचों-बीच भी पार्किंग बनाई गई है।




पंजाब यूनिवर्सिटी में ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि कैंपस में जाम की स्थिति पैदा हो गई है और साथ ही इसके पार्किंग की समस्या भी बढ़ जाती है। जिससे कैंपस में स्टूडेंट्स, फैकल्टी और अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए अब प्रशासन ब्रिज बनाने पर विचार कर रहा है ताकि जिससे इस समस्या का हल हो सके।


                                                 पी.यू. में ट्रैफिक की समस्या जल्द होगी खत्म
पी.यू. में पार्किंग समस्या को खत्म करने के लिए मल्टीलैवल पार्किंग और कैंपस के बीचोंबीच ब्रिज बनाने की योजना बनाई जा रही है। योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले लगातार बैठकों का दौरा जारी है। अगर कैंपस में मल्टी स्तर की पार्किंग और ब्रिज बन जाता है तो इससे कैंपस से ट्रैफिक  कंट्रोल हो जाएगा। कैंपस में मल्टी स्तर की पार्किंग कहां-कहां बनेगी इसके  लिए नई रूपरेखा तैयार की जा रही है।

                                                        बनाया जाएगा ब्रिज
वहीं कैंपसमें जो ब्रिज बनाया जाएगा, वह सैक्टर-14 से सैक्टर-25 के  बीचों-बीच बनाने की योजना है। फिलहाल इन पर कितना फंड खर्च होगा, यह तय नहीं हुआ है। कैंपस में ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए कई की योजनाएं बनाई जा रही हैं लेकिन अब पी.यू. ने ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए ब्रिज बनाने का रास्ता निकाला है। 

                                                       पी.यू. जूझ रहा ट्रैफिक समस्या से
आपको बता दें कि पी.यू. ट्रैफिक समस्या से लंबे समय से जूझ रहा है। कैंपस में में स्टूडैंट, फैकल्टी मैंबर्स व आऊटसाइडर अपनी-अपनी गाडिय़ों व अन्य व्हीकल पर आते हैं, लेकिन कैंपस में पार्किं ग की समस्या होने पर उन्हें अपने व्हीकल कैंपस में कहीं पर भी पार्क करने पड़ते हैं। हाल ही में कैंपस में आऊटसाइडर्स की गाडिय़ों की एंट्री गेट नंबर दो व तीन से बंद कर दी है, जबकि गेट नंबर एक पर उन्हें पार्किंग करने के  लिए कहा जाता है। 

                                                          बनी कई योजनाएं
इससे पहले कैंपस से ट्रैफिक नियंत्रित हो इसके लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। कैंपस में पिछले साल ही हॉस्टल में रहने वाले स्टूडैंट्स को गाडिय़ां न रखने के नियम बनाए गए, स्टूडंैट्स को बस शटल सर्विस का प्रयोग करने के लिए कहा गया। उन्हें साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करने की योजना भी बनाई गई, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। कैंपस में ट्रैफिक  की समस्या जस की तस बनी हुई है।



 

शनिवार, 19 दिसंबर 2015

हेराल्‍ड केस: सोनिया-राहुल गांधी को 5 मिनट में मिली बेल

  हेराल्‍ड केस: सोनिया-राहुल गांधी को 5 मिनट में मिली बेल
कोर्ट से बाहर आते ही मोदी सरकार पर किए चुन-चुनकर हमले
सोनिया ही नहीं, इंदिरा गांधी से भी टकरा चुके हैं सुब्रमण्‍यम स्‍वामी

       जब भी भारत और भारतीय राजनीती की बात की जाती है . गाँधी परिवार के नाम का जिक्र सबसे पहले किया जाता है ! “ आज़ादी के पहले से , आज़ादी के बाद तक “ आदम साहस और आत्मविश्वास के लिए-  इस बात का गवाह वर्तमान में स्वयं इतिहास और उसके पन्ने है और आज एक बार फिर इतिहास में गाँधी परिवार का नाम जुड़ भविष्य में पलटे जाने वाले पन्नो में जुड़ गया है .

दरअसल  नेशनल हेराल्ड केस में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी आरोपियों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत प्रदान की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई आगामी 20 फरवरी को दोपहर 2 बजे मुकर्रर की गई है।यह मामला सुब्रमण्यम स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत पर आधारित है जिसमें इन पर धोखधड़ी, साजिश और आपराधिक विश्वाघात का आरोप लगाए गए हैं। बीजेपी नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने अदालत से अपील की थी कि सोनिया और राहुल के विदेश जाने पर रोक लगाई जाए, जिसके बाद सोनिया गाँधी का ब्यान भी आया था कि कोई हमे डरा नहीं सकता .


‘ दोस्त - दोस्त न रहा
     आपको बता दें कि सोनिया-राहुल गांधी खिलाफ नेशनल हेराल्‍ड मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले सुब्रमण्‍यम स्‍वामी एक जमाने में राजीव गांधी के करीबी दोस्‍त हुआ करते थे। ये वही स्‍वामी हैं,जिन्‍होंने बोफोर्स कांड के वक्‍त खुलकर राजीव गांधी का पक्ष लिया था। स्‍वामी ने सदन में खुलकर कहा था कि राजीव गांधी ने पैसा नहीं लिया है। एक इंटरव्यू में उन्‍होंने खुद इस बात को स्‍वीकार किया था कि राजीव गांधी और वह घंटों साथ रहा करते थे।

आयरन लेडी इंदिरा गांधी से टकरा गए थे स्‍वामी   
सुब्रमण्‍यम स्वामी को गंवानी पड़ी थी नौकरी
  गाँधी परिवार के खिलाफ हुए स्वामी

              एक जमाना वो भी था, जब स्‍वामी आयरन लेडी इंदिरा गांधी से टकरा गए थे और कोर्ट से जीतकर भी आए थे। सुब्रमण्‍यम स्‍वामी के पिता सीताराम सुब्रमण्यम जाने-माने गणितज्ञ थे। सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने आईआईटी के सेमिनारों में पंचवर्षीय योजनाओं का खुलकर विरोध भी किया। उन्‍होंने विदेशी पूंजी निवेश पर निर्भरता को भी भारत के लिए नुकसान दायक बताया। उनका दावा था कि भारत इसके बिना भी ऊंची विकास दर हासिल कर सकता है। इंदिरा गांधी की नाराजगी के चलते सुब्रमण्‍यम स्वामी को दिसंबर 1972 में आईआईटी दिल्ली की नौकरी गंवानी पड़ी थी। वह इसके खिलाफ अदालत गए और 1991 में अदालत का फैसला स्वामी के पक्ष में आया। वे एक दिन के लिए आईआईटी गए और फिर पद से इस्तीफा दे दिया था। नानाजी देशमुख ने स्वामी को जनसंघ की ओर से राज्यसभा में 1974 में भेजा था। आपातकाल के 19 महीने के दौर में सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। इस दौरान उन्होंने अमेरिका से भारत आकर संसद सत्र में हिस्सा भी ले लिया और वहां से फिर गायब भी हो गए थे। 1977 में जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे थे। 1990 के बाद वे जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। 11 अगस्त, 2013 को उन्होंने अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया। इसके बाद वह हमेशा गांधी परिवार के खिलाफ ही नजर आए।
और आज भी स्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को कोर्ट में पहुँच दिया . लेकिन सोनिया गाँधी ने जीत हासिल की .

सुनवाई के दौरान अदालत परिसर बंद किया गया
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर को सुरक्षा के लिहाज से बंद कर दिया गया था। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता मोतीलाल वोरा, मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, प्रियंका गांधी, एके एंटनी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शीला दीक्षित के अलावा अन्‍य भी अदालत पहुंचे थे।

हम जारी रखेंगे अपनी लड़ाई
नहीं कर सकते सिद्धांतों से समझौता
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, क्‍योंकि हम सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते।

बेवजह हाइप क्रिएट किया गया केस , कोर्ट ने बिना शर्त दे दी बेल
कांग्रेस नेता और जाने-माने वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि हम कल से कह रहे थे कि इस केस में बेवजह हाइप क्रिएट न की जाए। कोर्ट ने बिना शर्त के बेल दी है। सैम पित्रोदा को जज ने छूट दी है, क्योंकि वे कान के ऑपरेशन की वजह से आए नहीं हैं।

गुलाम नबी आजाद के घर हुई बैठक
कांग्रेस मुख्‍यालय पर समर्थकों का जमावड़ा, पार्टी नेताओं की बैठक
कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं की कोर्ट में पेशी से पहले और बाद में कांग्रेस दफ्तर के अंदर और बाहर में काफी गहमागहमी का माहौल रहा। दिल्ली के अकबर रोड पर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर समर्थकों का जमावड़ा रहा। लोग सोनिया और राहुल के समर्थन में नारे लगाते रहे। इनके हाथों में कांग्रेस का झंडा और बैनर-पोस्टर थे। यहां सुरक्षा के लिए पुख़्ता इंतज़ाम किए गए। वहीं, देश के अन्‍य शहर भोपाल और मुंबई में भी कांग्रेस समर्थकों ने प्रदर्शन किया।



सोनिया और राहुल को 50-50 हजार के मुचलके पर मिली बेल
जमानत के बाद केंद्र पर वार
बोली सोनिया साफ़ मन से हुए हम कोर्ट में पेश
जूठे इलज़ाम लगवाते है मोदी बोले राहुल

      जमानत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि हम कोर्ट के सामने साफ मन से पेश हुए। उन्होंने कहा कि देश का कानून सबके लिए बराबर है। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार सरकारी एजेंसियों का विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है, लेकिन हम उनसे डरने वाले नहीं हैं।

वहीं राहुल गांधी ने कहा कि हम कोर्ट का सम्मान करते हैं।  मोदी झूठे इल्जाम लगवाते हैं। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं.

फिलहाल नेशनल हेराल्ड केस पटियाला हॉउस कोर्ट ने नए साल के दुसरे महिना की 20 तारीख तय कर दी है . अब गाँधी परिवार के लिए  साल 2016 कैसा रहेगा ये तो भविष्य और वक्त ही तय करेगा!


 mediasunil1@gmail.com
sunil k himachali


गुरुवार, 5 नवंबर 2015

आस्था से जुड़ी मिट्टी

आस्था से जुड़ी  मिट्टी 
दीपावली आने वाली है -हमारी सांस्कृतिक व्यवसाय शुरू हो गया है। मीट्टी के दीपक बनाने का काम रात दिन चल रहा है। वर्तमान में साफ़ झलकता है की मिटटी हमारी आस्था से कितनी जुडी हुई है।  जब मिटटी से दीपक बनाने वाले कामगारों को मेहनत करते हुए देखा आपको बता दें की  -  दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावलीको आदि  दो अल्फ़ाज़ में  सन्धिविच्छेद किया जाए (दीप +आवली )और आवली का मतलब है पंक्ति यानि दीपों की पंक्ति दीपावली ।  इस  दीपों की पंक्ति को  दीपोत्सव भी कहते हैं लेकिन आधुनिकता की दौड़ में दीपावली के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण दीपक और श्रीलक्ष्मी - श्रीगणेश की मूर्तियाँ गढऩे वाले कुम्हार अपने घरों को रोशन करने से वंचित हैं और अपनी पुस्तैनी कला एवं व्यवसाय से जैसे विमुख हो रहे हैं। कभी उत्सवों की शान समझे जाने वाले दीपों का व्यवसाय आज संकट के दौर से गुजर रहा है और दीपावली में रोशनी करने वाले मिट्टी के कारीगर आज दो जून की रोटी के लिए तरस रहे हैं.

पुस्तैनी कारोबार पर छा रहा अँधेरा 
 करवा चौथ हो या अहोई अष्टमी, दीपावली हो अथवा कोई अन्य त्योहार, ये कुम्हारों के चाक और बर्तनों के बिना पूरे नहीं होते. कुम्हार के चाक से बने खास दीपक दीपावली में चार चांद लगाते हैं लेकिन बदलती जीवन शैली और आधुनिक परिवेश में मिट्टी को आकार देने वाला कुम्हार आज उपेक्षा का दंश झेल रहा है. बाजारों में चाइनीज झालरों की धमक ने मिट्टी के दीपक की रोशनी को फीका करना शुरु कर दिया है। सदियों से मिटटी के बनाये गए दीपक को घरों में जलाकर हम दीपावली मनाते चले आ रहे है, लेकिन आज के समय बाजार मे आये चीन के दीपकों ने मिटटी के दियों की महक को छीन लिया है। जिसके चलते कुम्हार बदहाल हुए जा रहे हैं। मंहगाई और मरता हुआ व्यापार कहीं कुम्हारों को कहानी न बना दे। आधुनिकता की मार दीपावली में घर घर प्रकाश से जगमगा देने वाले दीप बनाने वाले कुम्हारों के घरो पर भी पड़ी है। जिस कारण दीप बनाने वाले स्वयं दीप जलाने से वंचित रह जाते हैं और उनके घर अंधेरा ही रहता है। इसे विडबना नहीं तो और क्या कहा जाए कि दीपावली के दिन लोग घरों में जिस लक्ष्मी गणेश की पूजा मूर्तियों और दीपक के जरिए लक्ष्मी के आगमन के लिए करते हैं। उसे गढऩे वाले कुम्हारों से ही वह कोसो दूर है। आधुनिकता के दौर में पूजा आदि के आयोजनों पर प्रसाद वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाली मिट्टी के प्याले, कुल्हड़ एवं भोज में पानी के लिए मिट्टी के ग्लास आदि भी प्रचालन अब नहीं रहा, इसकी जगह अब प्लास्टिक ने ले ली है। पारंपरिक दीप की जगह मोमबत्ती एवं बिजली के रंज बिरंगे बल्बों ने ले ली है।

मिटटी में मिटटी  हो रहा जिस्म : सदरुद्दीन 
चंडीगढ़ निवासी कुम्हार सदरुद्दीन बताते हैं कि सुबह से रात तक जिस्म मिटटी में  मिटटी हो जाता है।  जब दीये की खरीददारी करने वाले ही कम रह गए हैं तो ज्यादा बनाने से क्या फायदा. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक चायनीज दीये की मांग हर साल बढती ही जा रही है. दो जून की रोटी के लिए कड़ी धूप में मेहनत करने वाले कुम्हार का परिवार मिट्टी के व्यवसाय में महीनों .लगा रहता है उसके बावजूद न तो उसे वाजिब दाम मिलते हैं और न ही खरीददार. समय की मार और मंहगाई के चलते लोग अब मिट्टी के दीये उतने पसंद नहीं करते. चीन में निर्मित बिजली से जलने वाले दीये और मोमबत्ती दीपावली के त्योहार पर शगुन के रुप में टिमटिमाते नजर आते हैं.

ग्राहक को तरस रहा कुम्हार 
मिट्टी के व्यवसाय से जुड़ी  70 वर्षीय मंगी देवी  का कहना है कि अब मिट्टी के दीप का जमाना गया. कभी दीपावली पर्व से एक महीने पहले मोहल्लों में रौनक हो जाती थी और कुम्हारों में भी यह होड़ रहती थी कि कौन कितनी कमाई करेगा लेकिन अब तो खरीददार ही नजर नहीं आते.

बरसों से मिट्टी के बर्तन बेचकर पेट पालने वाले छोटेलाल का कहना है, "महंगाई की मार से मिट्टी भी अछूती नहीं रही, कच्चा माल भी महंगा हो गया है. दिन रात मेहनत के बाद हमें मजदूरी के रुप में अस्सी से 100 रुपये की कमाई हो पाती है. इससे परिवार का गुजारा नहीं हो पाता."

कहानी न बन जाए 'एक था कुम्हार'

 आने वाले समय में ऐसा दिन ना आ जाए जब कभी हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को कहानी सुनानी पड़े की, एक था कुम्हार। जिस तरह से कुम्हार के जीवन यापन करने वाले बाजार पर चीन जैसे दीपक हावी होते जा रहे हैं। उससे तो यही लगता है की शायद कुम्हार का घूमता हुआ चाक रुक जाएगा और कुम्हार सिर्फ कहानियो मे ही सुनने को मिलेंगे। हाडतोड़ मेहनत के बाद दीये बनाने बाले कुम्हार फुटपाथ पर दूकान लगाकर जहां बाजार मे एक एक ग्राहक को तरस रहा है, वहीँ चाईनीज दीपकों की बिक्री हाथों हाथ हो जाती है। दीपावली असत्य पर सत्य की जीत सहित रौशनी का भी त्यौहार है, लेकिन एक सत्य यह भी है की हमारी माटी की महक पर चाईनीज भारी पड़ गए। जिसके चलते आने वाले दिनों मे हजारों कुम्हारों के घरों मे दीपक क्या चूल्हे भी नहीं जल पायेंगे।


pm मोदी ने कहा-इस दिवाली मिट्‌टी के दीपक जलाएं
प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में लोगों से अपील की  कि वे इस दिवाली पर मिट्टी के दीपक का उपयोग करें जिससे गरीब कुम्हारों के घरों में समृद्धि आए। उन्होंने यह अपील अलवर के पवन आचार्य द्वारा दिए गए सुझाव पर की। आचार्य ने मोदी के 12वें रेडियो कार्यक्रम में अपनी बात रखी। 

आपसे अनुरोध - 
 साँझ समुदाय की आराफ से आप सभी से अनुरोध है कि इस दीपावली पर कुम्हारों द्वारा बनाये जा रहे भारतीय परम्परा के मिटटी के दिये और उनके बनाये गए मिट्टी के खिलौने अवश्य खरीदें और हाँ, खरीदते समय किसी प्रकार का मोल-भाव न करें, नहीं तो तब आप के आगे आने वाली पीढ़ी को यह दीप, खिलौने बनाने वाले नहीं दिखेंगे। इस काम में काफी श्रम लगता है और मुनाफा कम है लेकिन इनमें भारतीय परम्परा को जि़ंदा रखने का जूनून है...इस जुनून में आप भी अपने भारतीय होने की भूमिका अवश्य निभायें। दीपावली में मिट्टी के दीप अवश्य जलाएँ...क्योंकि आप चीन से बने दीये खरीदने में कोई कोताही नहीं बरतेंगे...चीन का सामान कम से कम खरीदें जिससे आप भारत के गरीबों द्वारा बनाये गए सामान खरीदने का पैसा बचा सके।