गुरुवार, 27 जुलाई 2017

इतिहास को दोहराया नितीश कुमार ने बिहार में

बिहार में वर्तमान राजनीतिक परिवेश की बात इतिहास के पन्नो में दर्ज़ हो गई है ,जहां नितीश कुमार  ने बनाया है वहीँ इस बात को झुठलाया भी नहीं जा सकता कि उन्होंने इतिहास को दोहराया भी है. क्यूंकि जो आज नितीश ने किया है वह 1980 में हरियाणा में दो बार मुख्यमंत्री पद पर रहे भजन लाल कर चुके है।  राजनीति के चाणक्य और कई दलबदल के इंजीनियररहे भजनलाल अंतिम दिनों में बनाई अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस के सदस्यों को दल बदलने से नहीं रोक सके।  अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और समर्पण की बदौलत वह दो दशक तक हरियाणा की राजनीति के शिखर पुरुष बने रहे। भजनलाल दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। पहली बार 28 जून 1979 से पांच जुलाई 1985 तक और दूसरी बार 23 जुलाई 1991 से 11 मई 1996 तक।

भजन 1968 में बंसीलाल सरकार में शामिल हुए और लम्बे समय तक उनके संकट मोचक बने रहे। 1972 के विधानसभा चुनाव के बाद वह राज्य के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आए।   इसके बाद 1975 में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। हालांकि अपनी जोड़तोड़ की कला की बदौलत वह 1979 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। और बाद में 1980 में पूरे जनता पार्टी विधायक दल का कांग्रेस आई में दलबदल करा दिया। 

जो आरोप 1980 में भजन लाल पर लगे आज वही आरोप नितीश कुमार पर लग रहे है। कहा जा रहा है कि नितीश ने जनता के साथ धोखा किया और ऐसा करके उन्होंने भजन लाल को भी पीछे छोड़ दिया।  वैसे नितीश कुमार के दल बदली के कदम से जहां भाजपा का काफी फायदा हुआ है तो कांग्रेस को वो धोखा हुआ जैसे एक बेवफा मासूक हो , जिसका गम और घाटा न भुलाया जा सकता न छुपाया जा सकता है।  लालू अपना दर्द रावडी से सांझा कर लेंगे लेकिन फिर पप्पू बने राहुल कहाँ और किससे हाल ए दिल बयान करेंगे।  राजनीति के समीकरण दिन ब दिन बदल रहे है।  आया राम गया राम की राजनीति भी जारी है और घर वापसी का सिलसिला आजकल सुनाने और सुनने में आ नहीं रहा।  वैसे लोकतंत्र का इतना अच्छा मज़ाक कहीं होता दिखा नहीं जो 2017 के चुनावों में दिख रहा है।  इस मोदी लहर कहूं या लोकतंत्र को तबाह करने वाली वो नहर जो अपनी धुन में चल रही है। और न जाने कहाँ कब ये रफ़्तार पकड़ ले जिसकी लहरें जब उठेंगी तो कहाँ और किसके कौन गीले कर ढीले करेगी। 


वैसे भी अब उम्मीद नहीं है अब मुझे इस घटिया राजनीति के पैमाने में पयादे खेलने वालों से -जिनकी एक भी चाल एकमत में नहीं होती।  यहाँ तक की देश के हित में अगर देश का प्रधानमंत्री कोई बात कहे तो उनके प्रति भी कोई बयान के मत में नहीं आता।  राजनीति करके ही देश के नेताओं का पेट भर जाता है।  बयानबाजी करके ही उनके हलक सुख जाते है फिर ये सीमा पर नौजवानों की क्या हौंसला आवाजाही करेंगे ,देश के और इंसानियत के दुशमनों से क्या लड़ेंगे जिनको आपसे में ही उलझने से वक्त नहीं मिलता। चलो अब नितीश कुमार की चमक कितनी दिखती है और लालू और कितने लाल पिले होते है।  जारी है सिलसिला दलबदली ----- अगला कौन इंतज़ार है, और जिया भी बेकरार है।


बुधवार, 19 जुलाई 2017

शहीदों की चिताएं तो जलती है -यहाँ भी, वहां भी लेकिन फर्क और फ़िक्र किसे है !



शहीदों की चिताएं तो जलती है -यहाँ भी, वहां भी लेकिन फर्क और फ़िक्र किसे है !
1999 के युद्ध के बाद से अब तक न जाने कितने शहीदों को घर आते देख चूका हूँ। कितने तिरंगे में लिपटे बेजान बेटे को लिपटते हुए माँ को देख चूका हूँ। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा पास ही के गांव के रहने वाले थे।  जिस वक्त उनको शहीदी प्राप्त हुई उस वक्त ज्ञान नहीं था क्या है युद्ध और क्या है सीमा ? हाँ धीरे-धीरे समाज ने सब सीखा दिया , यहाँ मेरा गांव है ,यहाँ मेरी दलीज़ है , यह मेरे देश है और भारत के मेप से ज्ञात कर लिया ये भारत और यह पाकिस्तान है।  थोड़ी बहुत कमी फिल्मों ने पूरी कर दी। धीरे -धीरे सोच भी पाकिस्तान के प्रति वैसी ही बनती गई जैसा बताया गया।  बचपन से ही भारतीय हूँ सबने सिखाया। लेकिन खुद ही जान सका आज की सबसे पहले क्या मै एक अच्छा इंसान हूँ ? अगर मै एक अच्छा इंसान हूँ तभी एक भारतीय हूँ।

राष्ट्र कोई भी है देशवासी को जान से प्यारा होता है।  कोई ऐसी ख़बरें भी देखता हूँ जिसमे राष्ट्र के प्रतिक  को आग के हवाले करने में देरी नहीं लगाई जाती। किसी व्यक्ति विशेष या दल  का जिक्र नहीं करूँगा लेकिन किसी भी देश के लिए उसका झंडा उसकी शान होता है , मानसिकता लोगों की बदली है उनको आग लगाओ किसी देश के प्रतीक को क्यों आग के हवाले किया जाता है।  हर कोई बुरा नहीं होता - कुछेक बुरे लोगों के कारण खामियाजा पूरी कौम को भुगतना पड़ता है।  और शायद यही आज पाकिस्तान के साथ हो रहा  है. आज कई जगह में लिखा देखता हूँ पकिस्तन को 'पाक' लिखा जाता है।  फिर 'पाक' का मतलब किनारे कर आगे बढ़ जाता हूँ।
लेकिन आज फिर सुर्ख़ियों में पाकिस्तान है ,यहाँ ही नहीं पाकिस्तान में खुद पाकिस्तान सुर्खियां बन चुका है।  सिर्फ कुछेक लोगों की मानसिकता के कारण -मुझे तो ये समझ नहीं आता ये कौन से जिहाद और कौन सी जन्नत की बात करते है।  
मंगलवार को नियंत्रण रेखा पर नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से मोर्टार दागे गए थे. जिसके चलते इलाके के 9 स्कूलों में करीब 200 बच्चे और स्कूल स्टाफ से सदस्य फंस गए थे. सभी बच्चे पूरा दिन स्कूल में फंसे रहे. जिसके बाद बुलेट प्रूफ वाहनों से उन्हें रेस्क्यू किया गया. हालांकि, किसी भी बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. वहीं पाकिस्तान की तरफ हो रही गोलीबारी में सेना के एक जवान की शहादत हो गई थी.वहीं मोगा के रहने वाले शहीद जवान का नाम जसप्रीत सिंह बताया गया. बुधवार देर शाम उसका शव पैतृक गांव पहुंचा और उसका अंतिम संस्कार किया गया।
जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में बुधवार को पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन किया गया. पुंछ में एलओसी पर सीमा पार से मोर्टार दाए गए.गोलीबारी का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया है. इस गोलीबारी में पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा है. कई पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है. कई घायल भी हुए हैं. खुफिया सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने पीओके में मेढ़र सेक्टर में पाक बंकरों और वाहनों को तबाह किया है.
दोनों देशों के जवान मारे जा रहे है। फर्क किसे है और फ़िक्र किसे है? दोनों ही देशों के लोगों को बचपन से एक ही बात सिखाई जाती है। पाकिस्तान -हिन्दुस्तान आपस में दुश्मन देश है।  इतिहास के पन्नों को बदलते -बदलते पता लगता है कि दोनों देश नहीं थे - एक ही को दो हिस्सों में सियासत के हुक्मरानो ने बाँट दिया है।  और आज इन हुक्मरानों के चेहरे तो बदल गए है लेकिन मुद्दा वही है - लेकिन और न जाने कितने माँ के बेटे शहीद होंगे और जिनकी चिताएं सरहद के आर -पार दोनों ही तरफ जलेंगी। 
जो क्रूरता पाकिस्तान की और से की जाती है भुलाई भी नहीं जाती।  लेकिन कुछेक लोगों की नामसमझी के कारण वहां के लोगों को भी शायद अब एक ही नज़र से देखा जाता है।  जिनका कोई कसूर भी नहीं।  ऐसा ही भारतीय जनता के साथ भी है।  जिसका न जाने कौन सा चेहरा पकिस्तान में दिखाया जाता है। 
हर सुबह वैसे भी यही खबर आती है - पाकिस्तान की और से फिर सीजफायर का उललंघन किया गया।  लगता है एलओसी से सटे इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों ने 50 सालों तक ऐसे हालात के साथ जीना सीख लिया था- पर 264 किमी लंबे इंटरनेशनल बॉर्डर के लोगों के लिए यह किसी अचंभे से कम नहीं है।एक तो जम्मू सीमा इटरनेशनल बॉर्डर है, जहां इंटरनेशनल ला लागू होते हैं और दूसरा कहते हैं कि सीजफायर भी जारी है,’ क्या सच में सीजफायर ऐसा होता है? नागरिकों को निशाना बना मोर्टार तथा छोटे तोपखानों से गोलों की बरसात करना। दागे गए कई गोले फूटते हैं तो मासूमों की जानें ले ले लेते हैं। कई अपंग और कई लाचार हो जाते हैं।जो गोले फूटते नहीं हैं वे गलियों और खेतों में जिन्दा मौत बन कर रहते हैं।
सब पाकिस्तान की और से किया जाता है।  पाकिस्तान में कहा जाता है सब भारत की और से किया जाता है।  नहीं जानता भारत और पाकिस्तान का भविष्य क्या होगा।  क्या ये दोनों एक होंगे या नहीं।  और  कोई ये भी नहीं जानता है कि सीजफायर का क्या भविष्य होगा पर सीमावासियों का भविष्य जरूर खतरे में है। वे रोजाना तिल-तिल कर मर रहे हैं। सिरों पर पाक सेना के गोलों की बरसात का खतरा मंडरा रहा है तो साथ ही भूखे मरने की नौबत भी आने लगी है। परेशानी यह है कि राज्य सरकार उनकी मदद उसी स्थिति में करती है जब युद्ध घोषित हो और इन लोगों की बदकिस्मती यह है कि प्रतिदिन होने वाला सीजफायर का उल्लंघन उनके लिए  किसी युद्ध से कम नहीं है। 
अब कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खात्‍मे के लिए अब एक नया प्‍लान तैयार कर लिया गया है। इस प्‍लान के तहत आतंकियों के खात्‍मे के लिए अब सेना का साथ हाईली स्‍पेशलाइज फोर्स के कमांडोज देंगे। यह कमांडो और कोई नहीं बल्कि नौसेना के मरीन कमांडो होंगे। भारत के मरीन कमांडो दुनिया के बेहतरीन कमांडो दस्‍ते में गिने जाते हैं। इन्‍हें मार्कोस भी कहा जाता है। मुंबई हमले के दौरान ताज होटल पर हुए आतंकी हमले में पहला मोर्चा संभालने वाले यही कमांडो थे।इन कमांडो को बेहद कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना होता है। मार्कोस जल, थल और वायु सभी जगह ऑपरेशन को अंजाम देने में महारत हासिल रखते हैं। यह कमांडो यूनिट दुश्‍मन को बिना भनक लगे उनपर टूट पड़ने में माहिर होती है। इनके पास हाइटेक वैपंस के साथ कई अन्‍य उपकरण भी होते हैं। इन्‍हें बेहद मुश्किल मिशन जैसे समुद्री लुटेरों को खत्‍म करने में लगाया जाता है। यही वजह है कि सेना का साथ देने के लिए अब मार्कोस का इस्‍तेमाल करने का मन बनाया गया है। आतंकियों की धर-पकड़ और उन्‍हें खत्‍म करने में अब इनका सहयोग लिया जाएगा। लिहाजा अब आतंकियों का बच पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।
चलो उम्मीद है कि आतंकियों  का खात्मा हो सके।  चैन और शांति कायम हो सके। क्यूंकि आतंकियों से तो पाकिस्तान भी परेशान है।   लेकिन क्या पाकिस्तान से मधुर संबंध होंगे ये चिंता का विषय न जाने कब तक और कितनी पीढ़ियों तक रहेगा।  उम्मीद पर तो ज़िंदगी कायम है तो यही सही के कल किसी माँ का बेटा -बेटी शहीद होकर घर न आए और सरहद पर सब सही हो जाए।

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

अगला होगा कहाँ- कौन शिकार, हाँ- यह जान लें – होंगे कितने शिकारी, नहीं है कोई पहचान !




अगला होगा कहाँ- कौन शिकार,  हाँ- यह जान लें – होंगे कितने शिकारी, नहीं है कोई पहचान !

काफी कुछ भर गया है जहन में न जाने क्या ? बस उबाल से मार रहा है। रविवार दोपहर जब मीनाक्षी जी का कॉल आया उसके बाद बेचैनी सी और बढ़ गई। सब कह भी रहे है आँखों के नीचे काले घेरे और बढ़ गए है। सो जाया कर! लेकिन ध्यान पिछले कुछ दिनों से फिर समाज में घट रही घटनाओं की और जाने लग पड़ा। सोच फिर दो हिस्सों में बंट गई।  हर पहलू को दो हिस्सों में बांट रहा हूँ, लेकिन किसी हल तक नहीं पहुँच पाया हूँ। अपने जहन में उठ रहे इन सवालों को शांत कैसे करूँ। 

मीनाक्षी जी ने विनम्रता पूर्वक आग्रह किया था , एक मीडिया कर्मी की तरह नहीं ,एक हिमाचली की तरह सेक्टर 17 प्लाजा में आ जाना। कैंडल मार्च है -कुड़िया के लिए ! फ़ोन कट कर दिया, लंच कर रहा था ,साथ में दो -चार बंधू और भी बैठे हुए थे। 

जिसके बाद एक किन्तु सा उत्पन हो गया है देव भूमि के बेटा और वीर भूमि का वासी कहने पर ? हाल में गुड़िया काण्ड की जैसे ही खबर मिली , इग्नोर  करता रहा , व्हाट्सप्प ,फेसबुक पर काफी पोस्ट टैग की गई थी। काफी हिमाचल के दोस्तों ने मैसेज भी किए.  जनता था ध्यान दूंगा ,दिक्क्त होगी। 

लेकिन उन लोगों की मानसिकता को लेकर फिर से जानने की इच्छा पैदा हो गई है,- जब न रहा गया खबर से दूर रहने से - जो कुकर्म जैसे अपराधों को अंजाम देते है।  क्या चल रहा होगा उनके दिमाग में। ऐसा क्या है जो अपना आपा खो देते है , क्या उन लोगों का अपने ऊपर कोई कंट्रोल नहीं - या हवस ने उन्हें भूखा दरिंदा बना दिया है।
कोई एक वारदात ऐसी हो तो न बोलूं -लेकिन दिसंबर में दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद से ऐसी जब की कोई खबर सामने आती है तो - सवाल कई होते है ,लेकिन इस तरह की प्रवृति के लोगों के घर में कोई माँ -बहन अगर हो और उसके साथ ऐसा हो तो शायद ये इस दर्द का अहसास जान सके। 

काफी मानसिक रोगी देखता हूँ - रोज़ लोगों के बीच रहता हूँ तो उनका आचरण व्यवहार सब देखता हूँ , क्यूंकि समाज का ही जीव हूँ तो इंसानी जीवों को तो देखना ही पड़ेगा।  वैसे भी नौवीं में इंलिश की किताब में रीड किया था -इंसान दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर है , अकसर इस बात को झुंड में बैठे दोस्तों और जानकारों के साथ बोलता ही रहता हूँ। 
वैसे भी जब भी किसी लड़की की आबरू से जुड़ा कोई वकया सामने आता है तो उसके चरित्र को लेकर भी काफी कुछ बातें कही जाती है। लेकिन समझदारों को कौन समझाए 'चरित्र हीनता से बड़ी कोई हीनता नहीं होती -एक पक्ष के आधार पर ही अपने विचार इस कदर ब्यान करते है जैसे सब इनके सामने ही हुआ है ,भली -भाँती बाक़िफ़ है।  इतनी बकवास न जाने कहाँ से शब्दों का भण्डार मिल जाती है ,जो जुबान पर लगाम ही नहीं लगता। फिर सोचता हूँ 'इस इंसानी बकवास से कहीं ज्यादा अच्छा कुत्ते का भौंकना है।'

जिस दिन मुझे मीनाक्षी जी और कई लोगों ने चंडीगढ़ आने के लिए कहा और कहा की कैंडल मार्च का हिस्सा बने लेकिन हालात कर्म के आगे मज़बूर थे। गुडिय़ा की आत्मा की शांति के लिए रविवार को कोटखाई के दांदी जंगल के पास जिस जगह उसका शव बरामद हुआ था, वहां पर उसके परिजनों ने गायत्री पाठ किया। आप भी दुआ करना की गुड़िया की आत्मा को शांति मिले और देवभूमि में ऐसी घिनौनी वारदात दोबारा न हो ऐसा माहौल कायम करने की कोशिश करना। ताकि फिर से किसी की बेटी बहन और माँ - हवस के मानसिक रोगियों की भेंट न छाडे। 

वैसे भी रोज़ अखबार पढ़ता हूँ हर तीसरे पन्ने पर इस तरह की खबर होती है ,जो खुद का भी मानसिक संतुलन बिगाड़ सा देती है।  वैसे भी अखबार के पन्नो से ही पता चला कोटखाई रेप और मर्डर मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली बार-बार सवालों के घेरे में आ रही  है। पुलिस ने शनिवार को 2 संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लिया था। कोटखाई से कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें शिमला पहुंचाया गया। इसके बाद रिपन अस्पताल में मैडीकल करवाने के बाद रात को उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि इस बात की पुलिस अधिकारी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं कर रहे हैं, जिससे साफ हो गया है कि पुलिस रसूखदारों के प्रभाव में कार्य कर रही है।इसके बाद  केस में संदिग्ध ईशान का CM को लिखा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल  हुआ है , जिसमे संदिग्ध ने अपना पक्ष रखने की कौशिश की है।  उल्लेखनीय है कि ईशान वहीं लड़का है, जिसका 11 जुलाई को गैंगरेप और हत्या मामले में फोटो वायरल हुआ था और शनिवार 15 जुलाई को पुलिस ने हिरासत में लेकर रिपन अस्पताल में मेडिकल करवाया था। इतना ही नहीं उसने जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात भी कही है।लेकिन उसका क्या फायदा है ?
 नहीं ज्ञात मुख्य आरोपी कौन है- जिनका नाम लिया जा रहा है वह किस हद तक इस काण्ड में शामिल है।  लेकिन  कोटखाई रेप एंड मर्डर केस में मरने से पहले आंखों में आंसू लिए छात्रा के मुंह से यह अंतिम शब्द निकले थे- जो करना है करो, लेकिन मुझे मत मारो। मैं जीना चाहती हूं, मैं किसी का नाम नहीं बताऊंगी।यह खुलासा पूछताछ के दौरान दरिंदों ने किया है। रेप करने के बाद करीब 5 मिनट तक वह उनसे जान से न मारने की भीख मांगती रही, लेकिन जब मुख्य आरोपियों ने उसकी बात नहीं सुनी। उल्टा उन्होंने अपने साथियों से कहा कि- बेइज्जती हो जाएगी। ऐसे में एक आरोपी ने उसका गला दबा दिया। 10 से 12 मिनट तक वह तड़पती रही। उसके बाद वह मर गई।

हिमाचल में ऐसा यह कोई पहला वाकया नहीं है , न जाने कितनी लड़कियों को क्या कुछ सहन करना पड़ता है और न ही देश में।  वैसे भी दिल्ली में निर्भया कांड के बाद पूरा देश गुस्से में आ गया था, दिल्ली की सड़कों पर हज़ारों लोग उतर आए. खूब प्रदर्शन हुए, मोमबत्तियां जलीं, आंदोलन हुए, निर्भया के बलात्कारी और हत्यारों को फांसी की सज़ा भी हुई. बलात्कार को लेकर कड़े कानून की बहस चली, निर्भया से दरिंदगी करने वाले नाबालिग को लेकर नई बहस शुरु हुई कि इस तरह के अपराध में नाबालिग को कितनी उम्र की राहत मिलनी चाहिए. सरकार ने निर्भया फंड भी बनाया, पुलिस की निर्भया टीमें जगह-जगह तैनात की गईं लेकिन क्या हुआ इसका असर.

महाराष्ट्र के लातूर में एक औरत से गैंगरेप किया गया है. गैंगरेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में पत्थर मारे गए हैं और फिर लोहे की रॉड डाली गई है.पीड़ित महिला बीमार थी और इलाज के बाद अस्पताल से घर जा रही थी तभी रास्ते में ऑटो में तीन लोगों ने उसे घसीट लिया और फिर हैवानियत का खेल खेला. फिर से हेडलाइन देखी देश हुआ शर्मसार...हैवानियत की हदें पार आदि आदि. लेकिन इनसे क्या होगा, रोज़ाना कितनी महिलाएं बलात्कार का शिकार होती हैं. कहीं कोई किसी को फर्क नहीं पड़ता है.

लेकिन अब इन मानसिक रोगियों का इलाज कैसे किया जाए ये बहुत ही चिंता का विषय है।  इनका शिकार लड़कियां ही नहीं लड़के भी होते है - ऐसी ख़बरें भी कई बार मेरी उँगलियों से टाइप होकर आगे निकली है। चिंता का विषय भी शायद तब हो जब इस बीमारी का डॉक्टरों द्वारा पता लगाया जा सके।  जिसका कोई पता ही नहीं - उसे कैसे पहचाना जाए। लेकिन कुछ तो ऐसा होगा जिससे इस तरह के प्रवृति के इंसानों की पहचान हो सके। 

हाँ वर्तमान में समाज में यौन कुंठा लगातार बढ़ रही है. हालात सुधरने की बजाय बिगड़ सकते है। सस्ते इंटरनेट ने हर हाथ में पॉर्न उपलब्ध कर दिया है जो लोगों को सेक्स को लेकर हिंसक बना रहा है. और न जाने की सेक्स के रिगार्डिंग मार्केट में क्या चीजें है  ,क्यूंकि मुझे यहाँ लिखते हुए भी शर्म आएगी , वैसे भी जीतनी नॉलेज सेक्स के रिगार्डिंग समाज में होनी चाहिए उतनी नहीं है।क्यूंकि जिस उम्र में हमें स्कूल में x और y हार्मोन्स का ज्ञान दिया जाता है , उस वक्त सिबा दांत निकालने यानि हंसने के अलावा कुछ नहीं होता। मानसिकता इतनी बदल चुकी है कि मोबाईल एप तक अब लोगों के लिए उपलब्ध है। अब मुझे तो यह भी लगता है की वैज्ञानिको की नज़र में एड्स के बाद अब कोई नई बीमारी सेक्स से जुडी आने वाली है।